(सज्जान हुसैन)
इस्लामाबाद, 12 जून (भाषा) चीन के साथ हुए एक समझौते के तहत निर्मित पाकिस्तान की हंगोर श्रेणी की पहली पनडुब्बी कराची बंदरगाह पहुंच गई है जो ‘‘पाकिस्तानी नौसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम’’ है। एक बयान में यह जानकारी दी गई।
पनडुब्बी के बृहस्पतिवार को ‘पाकिस्तान नेवी डॉकयार्ड’ पहुंचने पर उसके स्वागत में एक समारोह आयोजित किया गया जिसमें पाकिस्तान फ्लीट के कमांडर वाइस एडमिरल अब्दुल मुनीब मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
पाकिस्तानी नौसेना के एक बयान के अनुसार, पनडुब्बी के पहुंचने पर उसका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। इस अवसर पर पाकिस्तान नौसेना के अधिकारी एवं कर्मी और पनडुब्बी के चालक दल के परिजन मौजूद थे।
नौसेना ने कहा, ‘‘पाकिस्तान नौसेना अकादमी के कैडेट ने पनडुब्बी और उसके चालक दल को औपचारिक सलामी दी। इस दौरान पाकिस्तान नौसेना के जेड-9ईसी हेलीकॉप्टर ने फ्लाई-पास्ट किया।’’
यह पनडुब्बी 2015 में हुए उस समझौते के तहत चीन में बनाई गई है, जिसके अनुसार हंगोर श्रेणी की आठ डीजल-इलेक्ट्रिक चालित हमलावर पनडुब्बियों का निर्माण किया जाना है।
शुरुआती चार पनडुब्बियों का निर्माण चीन में ‘चाइना शिपबिल्डिंग एंड ऑफशोर इंटरनेशनल कंपनी’ (सीएसआईसी) कर रही है, जबकि अन्य चार पनडुब्बियों का निर्माण और संयोजन प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के तहत पाकिस्तान में ‘कराची शिपयार्ड एंड इंजीनियरिंग वर्क्स’ (केएसईडब्ल्यू) में किया जा रहा है।
‘हंगोर’ शब्द बांग्ला भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ ‘शार्क’ होता है। यह 1971 से पहले की परंपराओं से जुड़ा है जब बांग्लादेश पाकिस्तान का हिस्सा था। मूल हंगोर फ्रांस में बनी डैफने श्रेणी की पनडुब्बी थी जो पाकिस्तान नौसेना की हमलावर पनडुब्बियों की श्रृंखला का हिस्सा थी।
आधुनिक हंगोर श्रेणी की पनडुब्बियां बेहद उन्नत हैं और दुश्मन की नजर में आए बिना हमला करने में सक्षम हैं।
भाषा सिम्मी मनीषा
मनीषा