पाकिस्तान की मानवाधिकार संस्था ने पीओके में हिंसा पर चिंता जताई

पाकिस्तान की मानवाधिकार संस्था ने पीओके में हिंसा पर चिंता जताई

पाकिस्तान की मानवाधिकार संस्था ने पीओके में हिंसा पर चिंता जताई
Modified Date: June 8, 2026 / 05:39 pm IST
Published Date: June 8, 2026 5:39 pm IST

(एम जुल्करनैन)

लाहौर, आठ जून (भाषा) पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने सोमवार को कहा कि वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी हिंसा को लेकर ‘‘चिंतित’’ है, जहां हिंसक झड़पों में चार पुलिस अधिकारियों समेत 11 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों घायल हो गए।

एचआरसीपी ने स्थानीय सरकार के उस फैसले पर आपत्ति जताई, जिसके तहत ‘ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (जेएएसी) को आतंकवाद-रोधी कानून के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया है।

अधिकारियों ने जन व्यवस्था और सुरक्षा का हवाला देते हुए शुक्रवार को जेएएसी पर प्रतिबंध लगा दिया था।

आयुक्त सरदार वाहीद खान के मुताबिक, पीओके के रावलाकोट में रविवार को पुलिस और जेएएसी प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में कम से कम सात नागरिक और चार पुलिसकर्मी मारे गए।

उन्होंने बताया कि झड़प से पहले और बाद में 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के अनुसार, हिंसा की शुरुआत तब हुई, जब एक व्यापारी की मौत को लेकर तनाव भड़क उठा, जिसे कथित तौर पर शुक्रवार रात कानून प्रवर्तन कर्मियों के साथ टकराव में गोली मार दी गई थी।

अधिकारियों ने आरोप लगाया कि रविवार को प्रदर्शनकारियों ने रावलाकोट के सैन्य अस्पताल पर हमला किया।

सोमवार को जारी बयान में एचआरसीपी ने नागरिकों और पुलिसकर्मियों दोनों की मौत, बल प्रयोग और संचार सेवाएं बंद किए जाने की कड़ी निंदा की।

आयोग ने कहा, ‘‘संवाद जरूरी है, लेकिन जब तक इस क्षेत्र के लोगों को राजनीतिक अधिकार से वंचित रखा जाएगा, तब तक यह संवाद सार्थक नहीं हो सकता। शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा होनी चाहिए और शिकायतों का पारदर्शी तरीके से समाधान किया जाना चाहिए।’’

आयोग ने केंद्र और स्थानीय सरकार दोनों से अपील की कि वे ‘‘तनाव और न बढ़ाएं, लोगों के मौलिक अधिकारों का सम्मान करें और वास्तविक, समावेशी वार्ता के लिए प्रतिबद्ध हों।’’

एचआरसीपी ने स्थिति का जायजा लेने के लिए एक तथ्यान्वेषण दल भेजने की भी घोषणा की।

आयोग ने जेएएसी के नौ जून को प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले उसे आतंकवाद-रोधी कानून के तहत प्रतिबंधित किए जाने के सरकारी फैसले पर सवाल उठाए। साथ ही अशांति के दौरान सूचनाओं को दबाने के लिए इंटरनेट और संचार सेवाएं बंद किए जाने की भी निंदा की।

पिछले साल भी पीओके में बिजली के अत्यधिक बिल और आटे की बढ़ती कीमतों के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन हुए थे, जिनमें तीन पुलिस अधिकारियों समेत कम से कम नौ लोगों की जान गई थी और सैकड़ों अन्य घायल हुए थे।

भाषा खारी पारुल

पारुल


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