(योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, 16 जनवरी (भाषा) संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस ने कहा कि दुनिया के सबसे ताकतवर देशों को सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए सबसे आगे रहना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग आज विशेषाधिकारों से चिपके रहने की कोशिश करेंगे, उन्हें कल इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
संरा महासचिव गुतारेस ने बृहस्पतिवार को 193 सदस्यीय महासभा में 2026 के लिए अपनी प्राथमिकताओं पर अपने भाषण में कहा, ‘‘ऐसी संस्थाओं में सुधार होना चाहिए जो आज की दुनिया को दर्शाती हों। 1945 के समस्या समाधान के तरीकों से 2026 की समस्याओं का हल नहीं निकलेगा। अगर ढांचे हमारे समय, हमारी दुनिया, हमारी वास्तविकताओं को नहीं दिखाते हैं तो वे अपनी पहचान खो देंगे।’’
उन्होंने समकालिक वास्तविकताओं को दिखाने के लिए वैश्विक संस्था में सुधार का आह्वान करते हुए कहा कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं का वैश्विक जीडीपी में हिस्सा हर दिन थोड़ा-थोड़ा कम हो रहा है, जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं का आकार, ताकत और असर बढ़ रहा है।
गुतारेस ने कहा, ‘‘जो लोग आज विशेषाधिकारों से चिपके रहने की कोशिश करते हैं, उन्हें कल इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। और इसलिए हम सभी को बदलने के लिए हिम्मत दिखानी होगी। दुनिया इंतजार नहीं कर रही है। हमें भी नहीं करना चाहिए।’’
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के रूप में गुतारेस का पांच साल का दूसरा कार्यकाल 31 दिसंबर, 2026 को खत्म होगा। उन्होंने आने वाले साल के लिए अपनी प्राथमिकताओं पर महासभा में अपने पारंपरिक भाषण में कहा कि वह 2026 के हर दिन को अहमियत देंगे और एक बेहतर दुनिया के लिए काम करते रहने, लड़ते रहने और कोशिश करते रहने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध रहेंगे।
भारत सुरक्षा परिषद में सुधार की दशकों पुरानी मांग में सबसे आगे रहा है, जिसमें इसकी स्थायी और गैर-अस्थायी दोनों श्रेणी में बढ़ोतरी शामिल है। भारत का कहना है कि 1945 में स्थापित 15 देशों की परिषद 21वीं सदी के मकसद के लिए सही नहीं है और इसमें आज की भूराजनीतिक हकीकत नहीं दिखती।
नयी दिल्ली ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि वह सही मायने में संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सीट की हकदार है।
भारत पिछली बार 2021-22 में संयुक्त राष्ट्र के सत्र में गैर-स्थायी सदस्य के तौर पर बैठा था। एक विभाजित सुरक्षा परिषद मौजूदा शांति और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में नाकाम रही है और यूक्रेन युद्ध तथा इजराइल-हमास संघर्ष जैसे झगड़ों पर परिषद के सदस्य बंटे हुए हैं।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में काउंसलर, एल्डोस मैथ्यू पुन्नूस ने संरा महासभा के पूर्ण सत्र में ‘संगठन के कार्य पर महासचिव की रिपोर्ट’ विषय पर राष्ट्रीय वक्तव्य देते हुए कहा कि संरा का अपने जरूरी कामों में जानबूझकर दखल नहीं देना असर, वैधता और प्रामाणिकता से जुड़े सवाल उठाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के मामले में यह बात काफी साफ़ है। जैसे-जैसे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में झगड़े बढ़ रहे हैं, दुनिया उम्मीद कर रही है कि संरा मानवीय दुख और तकलीफ़ को खत्म करने के लिए कुछ करेगा।”
भारत ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि मानवता के लिए बड़े लक्ष्यों को पाने में मौजूदा कमियों को लेकर संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा ढांचे पर करीब से नज़र डालने की जरूरत है।
पुन्नूस ने कहा, “सुरक्षा परिषद में सुधार करना इसके लिए सबसे ज़रूरी है। यूएनएससी में आज की भूराजनीतिक असलियत प्रदर्शित होनी चाहिए। स्थायी और गैर-स्थायी दोनों श्रेणियों को बढ़ाना होगा।’’
भाषा वैभव नेत्रपाल
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