पीओके चुनाव : कानून-व्यवस्था की चिंताओं के कारण 10 अगस्त के अधिकांश मतदान स्थगित

पीओके चुनाव : कानून-व्यवस्था की चिंताओं के कारण 10 अगस्त के अधिकांश मतदान स्थगित

पीओके चुनाव : कानून-व्यवस्था की चिंताओं के कारण 10 अगस्त के अधिकांश मतदान स्थगित
Modified Date: August 7, 2026 / 07:39 pm IST
Published Date: August 7, 2026 7:39 pm IST

इस्लामाबाद, सात अगस्त (भाषा) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 10 अगस्त को तीसरे चरण के चुनाव के वास्ते निर्धारित 11 सीट में से सात पर होने वाला मतदान सुरक्षा-व्यवस्था की चिंताओं के मद्देनजर अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है। यह जानकारी शुक्रवार को दी गई।

हिंसक विरोध-प्रदर्शनों से प्रभावित चुनाव के पहले और दूसरे चरण का मतदान क्रमशः 27 जुलाई और दो अगस्त को हुआ था तथा तीसरे चरण में सोमवार को पीओके के पुंछ संभाग की 11 सीट के लिए मतदान होना था।

पीओके की तथाकथित विधानसभा के लिए कुल 45 सीट पर चुनाव हो रहे हैं।

पीओके के निर्वाचन आयोग ने एक बयान में कहा, ‘‘पुंछ जिले के सात निर्वाचन क्षेत्रों और सुधनति के पल्लंद्री में 10 अगस्त को मतदान नहीं होगा।’’

हालांकि, बाग जिले की तीन सीट और हवेली की एक सीट पर मतदान तय कार्यक्रम के अनुसार 10 अगस्त को ही होगा।

निर्वाचन आयोग ने कहा, ‘‘हमें वहां के गृह सचिव की ओर से एक रिपोर्ट मिली है, जिसमें पुंछ जिले और पल्लंद्री जिले के कुछ इलाकों में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है। इन सीट पर मतदान की अगली तारीख बाद में घोषित की जाएगी।’

निर्वाचन आयोग ने कहा कि उसे इन जिलों के कुछ राजनीतिक नेताओं और उम्मीदवारों से अनुरोध मिले हैं, जिनमें मौजूदा हालात को देखते हुए पुंछ और पल्लंद्री जिलों में चुनाव टालने की मांग की गई है।

आयोग के बयान में कहा गया, ‘‘हम हालात की समीक्षा करने और सभी जरूरी बातों पर विचार के बाद पुंछ और पल्लंद्री के लिए मतदान की नयी तारीखों और चुनाव के संशोधित कार्यक्रम की घोषणा करेंगे।’’

भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश उसके अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। नयी दिल्ली का यह भी कहना है कि पाकिस्तान ने इन केंद्र-शासित प्रदेशों के कुछ हिस्सों पर ‘गैर-कानूनी और जबरन कब्जा’ कर रखा है।

भारत ने पीओके में तथाकथित स्थानीय निकाय चुनावों को मंगलवार को ‘‘पूरी तरह से दिखावा’’ बताया था और कहा था कि ऐसी ‘खोखली’ कवायदें उस इलाके की जमीनी हकीकत को छिपा नहीं सकतीं।

भाषा शुभम सुरेश

सुरेश


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