रेन कोट की पानी से बचाव की क्षमता घटने के कारण और उपाय

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रेन कोट की पानी से बचाव की क्षमता घटने के कारण और उपाय

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  • Publish Date - February 27, 2026 / 11:55 AM IST,
    Updated On - February 27, 2026 / 11:55 AM IST

( कैरोलिना क्विन्टेरो रोड्रिगुएज, आरएमआईटी यूनिवर्सिटी )

मेलबर्न, 27 फरवरी (द कन्वरसेशन) तेज बारिश में बाहर निकलने के कुछ ही समय बाद यदि रेन कोट के अंदर कपड़े भीगने लगें, तो अक्सर लगता है कि “वाटरप्रूफ” कोट ने काम करना बंद कर दिया। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर रेन कोट अचानक खराब नहीं होता, बल्कि उसकी बाहरी परत, गंदगी और लंबे उपयोग का असर धीरे-धीरे उसकी क्षमता कम करता है।

अधिकतर गुणवत्तापूर्ण रेन कोट के भीतर एक विशेष वाटरप्रूफ मेम्ब्रेन लगी होती है। गोर-टेक्स जैसी तकनीक में पीटीएफई या ईपीटीएफई की अत्यंत पतली परत होती है, जिसमें सूक्ष्म छिद्र बने होते हैं। ये छिद्र पानी की बूंदों को भीतर आने से रोकते हैं, लेकिन शरीर से निकलने वाली जलवाष्प को बाहर जाने देते हैं। कुछ अन्य कोट ठोस, गैर-छिद्रयुक्त मेम्ब्रेन का उपयोग करते हैं, जो नमी को अवशोषित कर अणु-दर-अणु बाहर निकालती हैं।

रेन कोट के बाहरी कपड़े पर “ड्यूरेबल वाटर रिपेलेंट” (डीडब्ल्यूआर) नामक रासायनिक परत लगाई जाती है, जिससे पानी बूंदों के रूप में फिसल जाता है। पहले इन परतों में पीएफएएस जैसे “फॉरएवर केमिकल्स” का इस्तेमाल होता था, लेकिन पर्यावरणीय चिंताओं के कारण अब सिलिकॉन या हाइड्रोकार्बन आधारित विकल्प अपनाए जा रहे हैं।

लेबल पर लिखे शब्दों का अंतर समझना भी जरूरी है। “वाटरप्रूफ” कोट तेज बारिश में भी पानी रोकने के लिए डिजाइन किया जाता है और इसमें सील की गई सिलाई व मेम्ब्रेन होती है। “वाटर रेजिस्टेंट” केवल हल्की बारिश तक सुरक्षा देता है, जबकि “वाटर रिपेलेंट” केवल बाहरी सतह पर पानी की बूंद बनने की क्षमता दर्शाता है।

समय के साथ कोट की वाटरप्रूफ क्षमता घटने का मुख्य कारण बाहरी डीडब्ल्यूआर परत का घिस जाना होता है। बैकपैक की पट्टियां, सीट बेल्ट, धूप, धूल और प्रदूषण इसे नुकसान पहुंचाते हैं। कठोर डिटर्जेंट से धुलाई भी इसकी प्रभावशीलता कम कर सकती है।

इसके अलावा, शरीर का तेल, पसीना, सनस्क्रीन और कीट-रोधी क्रीम कपड़े में जमा होकर मेम्ब्रेन के छिद्रों को बंद कर सकते हैं। इससे न केवल पानी रुकने की क्षमता घटती है, बल्कि पसीना भी भाप के रूप में ठीक से बाहर नहीं निकल पाता। लंबे समय तक लगातार मोड़ने और दबाव से मेम्ब्रेन पतली पड़ सकती है या उसमें सूक्ष्म दरारें आ सकती हैं। कंधों पर लगे सिलाई वाले टेप भी उखड़ने लगते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि रेन कोट को लंबे समय तक उपयोग योग्य बनाए रखना पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि तकनीकी कपड़ों के निर्माण में काफी संसाधन लगते हैं।

देखभाल के लिए रेन कोट को समय-समय पर हल्के तरीके से धोना चाहिए। जिप और वेल्क्रो बंद कर, विशेष वाटरप्रूफ क्लीनर या हल्के साबुन का उपयोग करना चाहिए। सामान्य डिटर्जेंट और फैब्रिक सॉफ्टनर के उपयोग से बचना चाहिए, क्योंकि वे अवशेष छोड़ सकते हैं।

यदि बाहरी परत कमजोर हो जाए, तो बाजार में उपलब्ध स्प्रे-ऑन या वॉश-इन उत्पादों से डीडब्ल्यूआर को दोबारा लगाया जा सकता है। कुछ परतें हल्की गर्मी, जैसे कम तापमान वाले ड्रायर या हल्की इस्त्री से फिर सक्रिय हो जाती हैं।

विनिर्माता के निर्देशों का पालन करना सबसे सुरक्षित उपाय है। साथ ही, रेन कोट को लंबे समय तक गीला और मुड़ा हुआ नहीं छोड़ना चाहिए तथा अत्यधिक सनस्क्रीन या रसायनों के संपर्क से बचाना चाहिए, ताकि उसकी वाटरप्रूफ क्षमता लंबे समय तक बनी रहे।

( द कन्वरसेशन ) मनीषा वैभव

वैभव