विदेशी निधि को विनियमित करना एक अहम कदम है; अमेरिका में भी ऐसे ही कानून हैं: क्वात्रा

विदेशी निधि को विनियमित करना एक अहम कदम है; अमेरिका में भी ऐसे ही कानून हैं: क्वात्रा

विदेशी निधि को विनियमित करना एक अहम कदम है; अमेरिका में भी ऐसे ही कानून हैं: क्वात्रा
Modified Date: August 10, 2026 / 10:55 am IST
Published Date: August 10, 2026 10:55 am IST

वाशिंगटन, 10 अगस्त (भाषा) अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम में किए गए बदलाव का मकसद और अधिक पारदर्शिता लाना था और उम्मीद है कि संगठन तय प्रक्रिया के माध्यम से ही धन प्राप्त करेंगे।

क्वात्रा ने रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कई पोस्ट कर कहा कि सार्वजनिक और राजनीतिक क्षेत्रों में विदेशी वित्तीय लेन-देन को विनियमित करना राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं से प्रेरित एक स्वतंत्र एवं वैध कदम है। उन्होंने इस उद्देश्य के लिए अमेरिका द्वारा बनाए गए इसी तरह के कानूनों का भी हवाला दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका में 1938 से एफएआरए (विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम) और 2010 से एफएटीसीए (विदेशी खाता कर अनुपालन अधिनियम) लागू है। ऑस्ट्रेलिया ने 2018 में और कनाडा ने 2024 में कानून बनाया। ब्रिटेन की योजना जुलाई 2025 में लागू हुई। यूरोपीय संघ (ईयू) अभी कानून बना रहा है।’’

‘एक्स’ पर क्वात्रा का यह पोस्ट एक अमेरिकी सांसद द्वारा एफसीआरए में किए गए बदलावों पर चिंता जताने के कुछ दिनों बाद आया है। सांसद का दावा था कि इन बदलावों से भारत सरकार को गिरजाघरों और परमार्थ संस्थाओं पर नियंत्रण करने का अधिकार मिल जाएगा।

उन्होंने कहा कि जब किसी संस्था का विदेशी धन प्राप्त करने का पंजीकरण खत्म हो जाता है या संस्था स्वेच्छा से उसे वापस कर देती है तो निर्धारित प्रावधान के अनुसार विदेशी अंशदान और उससे बनाई गई संपत्ति राज्य सरकार के अधीन आ जाती है। यह नियम 2010 से लागू है।

क्वात्रा ने कहा, ‘‘2026 के विधेयक में इस तरह की संपत्ति की सुरक्षा के लिए एक विशेष प्राधिकरण के गठन और उन्हें वापस पाने के तरीके को भी जोड़ा गया है। अगर कोई संस्था अपना पंजीकरण फिर से बहाल करवा लेती है, तो उसकी सारी संपत्ति और उपयोग नहीं की गई धनराशि वापस कर दी जाती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पूजा-स्थलों की अपनी अलग सुरक्षा व्यवस्था होती है। अगर किसी ऐसे संगठन का पंजीकरण रद्द हो जाता है जिसने पूजा-स्थल से जुड़ी कोई संपत्ति बनाई है तो पूजा जारी रखने के लिए वह संपत्ति उसी धर्म के किसी दूसरे एफसीआरए-पंजीकृत संगठन को सौंप दी जाती है।’’

उन्होंने उन आशंकाओं को भी खारिज कर दिया कि नए कानून का मकसद नागरिक संस्थाओं को मिलने वाली विदेशी मदद को रोकना है।

उन्होंने बताया कि भारत में 30 लाख से अधिक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) हैं और इनमें से बहुत कम, यानी 14,450 एनजीओ ही एफसीआरए पंजीकृत है।

क्वात्रा ने कहा, ‘‘नागरिक संस्था के अधिकतर संगठन पूरी तरह से इस कानून के दायरे से बाहर हैं।’’

उन्होंने बताया कि भारत ने सबसे पहले 1976 में एफसीआरए कानून बनाया था और 2010 में इसमें बदलाव करके इसे और आधुनिक बनाया।

क्वात्रा ने कहा कि 2016, 2018 और 2020 में किए गए बदलावों से एफसीआरए को और मजबूत किया गया।

भाषा सुरभि मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में