( जोनाथन रॉबर्ट्स – क्वीन्सलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के रोबोटिक विभाग में प्रध्यापक, मार्क पोर्टस – क्वीन्सलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के क्यूयूटी स्पोर्ट्स विभाग में प्रदर्शन निदेशक )
ब्रिस्बेन, 29 अप्रैल (द कन्वरसेशन) एक ‘ह्यूमनॉइड’ रोबोट ने हाल ही में हाफ मैराथन दौड़कर और मानव विश्व रिकॉर्ड को पीछे छोड़कर दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं। लगभग उसी समय, एआई-संचालित एक रोबोट ने टेबल टेनिस में एक शीर्ष खिलाड़ी को भी हरा दिया।
जहां अनुभव की कमी थी, वहां रोबोट ने अपनी तेज प्रतिक्रिया और निरंतरता से इसकी भरपाई की। ये घटनाएं मील के पत्थर जैसी लगती हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि मशीनें अब खेल जैसे मानवीय क्षेत्र में प्रवेश कर रही हैं।
इसे इंसानों और रोबोट के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा के रूप में देखना सही नहीं है। खेल रोबोटिक्स का असली उद्देश्य यह समझना है कि मशीनें गतिशील और अनिश्चित परिस्थितियों में कैसे सीखती हैं और प्रतिक्रिया देती हैं, और इसका मानव प्रदर्शन पर क्या प्रभाव पड़ता है।
रोबोट को खेल सिखाया कैसे जाता है?
रोबोट को खेल सिखाने की प्रक्रिया मानव खिलाड़ियों से पूरी तरह अलग होती है। इंसान अभ्यास, कोचिंग और अनुभव के जरिए सीखते हैं, जहां देखने, निर्णय लेने और प्रतिक्रिया देने की प्रक्रिया एक साथ चलती है।
इसके विपरीत, रोबोट को ‘सिमुलेशन’, ‘डेटा’ और नियंत्रण ‘एल्गोरिदम’ के जरिए प्रशिक्षित किया जाता है। इंजीनियर वर्चुअल वातावरण तैयार करते हैं, जहां रोबोट लाखों बार अभ्यास कर सकते हैं। वे वस्तुओं को ट्रैक करना, गति का अनुमान लगाना और शरीर का समन्वय करना सीखते हैं।
तेज गति वाले खेल जैसे टेबल टेनिस में यह चुनौती और कठिन हो जाती है, जहां रोबोट को गेंद की दिशा का अनुमान लगाकर कुछ ही क्षणों में सटीक प्रतिक्रिया देनी होती है। इसके लिए कंप्यूटर विजन, मशीन लर्निंग और रीयल-टाइम कंट्रोल का घनिष्ठ समन्वय जरूरी है।
हाल के वर्षों में “सिम-टू-रियल” तकनीक ने इस क्षेत्र में प्रगति को काफी तेज किया है जिसमें ‘सिमुलेशन’ में सीखी गई क्षमताओं को वास्तविकता में लागू किया जाता है।
रोबोट बास्केटबॉल और फुटबॉल जैसे खेलों में भी अब केवल गेंद को पहचानने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि टीम के रूप में समन्वय, रणनीति बनाना और प्रतिद्वंद्वियों के अनुसार खुद को ढालना भी सीख रहे हैं।
मनोरंजन से आगे
रोबोट एथलीट भले ही आकर्षक प्रदर्शन का माध्यम हों, लेकिन उनका सबसे बड़ा उपयोग मानव खिलाड़ियों के प्रशिक्षण में हो सकता है।
खेलों में प्रभावी अभ्यास एक बड़ी चुनौती है। खिलाड़ियों को कौशल विकसित करने के लिए बार-बार अभ्यास की जरूरत होती है, लेकिन साथ ही वास्तविक मुकाबले जैसी विविधता भी जरूरी होती है।
रोबोटिक्स इस संतुलन को बनाने में मदद कर सकता है। उदाहरण के लिए, एक रोबोटिक टेनिस सर्वर विश्वस्तरीय खिलाड़ी की तरह खेल सकता है और साथ ही गेंद की गति, दिशा और स्थान में नियंत्रित बदलाव भी ला सकता है।
इससे खिलाड़ियों के लिए “शिक्षण वातावरण” तैयार होता है, जिसमें वे वास्तविक प्रतियोगिता जैसी परिस्थितियों में निर्णय लेने और प्रतिक्रिया देने का अभ्यास कर सकते हैं।
शोधकर्ता टेनिस, क्रिकेट और फुटबॉल जैसे खेलों में इस तकनीक के उपयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं, ताकि प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी बनाया जा सके और तकनीक को प्रदर्शन से जोड़ा जा सके।
इसके अलावा, रोबोट कोच और प्रशिक्षण साझेदारों पर शारीरिक दबाव को कम करने में भी मदद कर सकते हैं, जबकि खिलाड़ी उच्च स्तर के अभ्यास से गुजरते रहते हैं।
क्या रोबोट बन पाएंगे ‘महान’?
आने वाले दशक में रोबोट अधिक फुर्तीले, मजबूत और जटिल परिस्थितियों में काम करने में सक्षम हो जाएंगे। असमतल जमीन पर दौड़ना, गेंद पकड़ना या फेंकना जैसी क्षमताएं भी बेहतर होती जाएंगी।
फिर भी, कुछ सीमाएं बनी रहेंगी। खेलों में महानता केवल तकनीकी दक्षता नहीं होती, बल्कि इसमें रचनात्मकता, दबाव में निर्णय लेने की क्षमता और अनुभव व भावनाओं से जुड़ी समझ भी शामिल होती है।
खेल विज्ञान के अनुसार, उत्कृष्ट प्रदर्शन खिलाड़ी, कार्य और वातावरण के बीच जटिल समन्वय से होता है। रोबोट विशिष्ट कार्यों में उत्कृष्ट हो सकते हैं, लेकिन वे इस मानवीय अनुभव को पूरी तरह नहीं जी सकते।
इसलिए संभव है कि रोबोट कुछ सीमित कार्यों में इंसानों से आगे निकल जाएं, लेकिन व्यापक अर्थों में ‘खेल महानता’ हासिल करना उनके लिए कठिन रहेगा।
खेलों में रोबोट की नयी भूमिका
खिलाड़ियों की जगह लेने के बजाय, रोबोट खेल परिवेश का हिस्सा बनेंगे। जैसे वीडियो विश्लेषण और पहनने योग्य सेंसर ने प्रशिक्षण को बदला है, वैसे ही रोबोटिक्स भी कोच और खेल वैज्ञानिकों के लिए एक नया उपकरण साबित हो सकता है।
यह तकनीक ऐसे अभ्यास वातावरण तैयार करने में मदद करती है, जिन्हें सटीक रूप से नियंत्रित करने के साथ-साथ खिलाड़ियों की जरूरत के अनुसार ढाला जा सकता है।
असल अवसर रोबोट चैंपियन बनाने में नहीं, बल्कि मानव प्रदर्शन को बेहतर समझने और खिलाड़ियों को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाने में है।
(द कन्वरसेशन) मनीषा अविनाश
अविनाश