कोलकाता, 29 अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं ने बुधवार को पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के उत्साह पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह राज्य में ‘परिवर्तन’ के लिए शुभ संकेत है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य सामिक भट्टाचार्य, केंद्रीय राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर, वरिष्ठ नेता दिलीप घोष और अभिनेता से नेता बने मिथुन चक्रवर्ती ने मीडिया से बातचीत में ऐसे ही विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि लोगों ने बिना डर और धमकी के अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग किया।
खड़गपुर सदर से चुनाव लड़ रहे घोष ने पत्रकारों से कहा कि केंद्रीय बलों की तैनाती इसलिए जरूरी हुई क्योंकि ‘‘पश्चिम बंगाल की स्थिति कश्मीर से भी बदतर हो गई थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पहले तृणमूल के गुंडे विपक्षी उम्मीदवारों पर हमला करते थे और मतदाताओं को डराते थे, लेकिन अब वे ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। अब हर जगह हिंसा-मुक्त और भय-मुक्त माहौल है और इसका श्रेय निर्वाचन आयोग को जाता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘राज्य के लोग अब ‘परिवर्तन’ और तृणमूल शासन की विदाई चाहते हैं।’’
उनकी बात दोहराते हुए भट्टाचार्य ने पत्रकारों से कहा, ‘‘50 वर्षों बाद पश्चिम बंगाल के लोगों ने निर्भय हो कर मतदान किया है, तथा मतदान केंद्रों के बाहर सत्तारूढ़ दल के नेताओं द्वारा मतदाताओं को धमकाने और डराने के दृश्य नहीं दिखे। हर कोई वोट डालने के लिए आगे आया है। जिसे चाहें वोट दें, स्वतंत्र रूप से अपने अधिकार का प्रयोग करें।’’
ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ‘‘केंद्रीय बलों और चुनाव आयोग की कथित ज्यादती के झूठे दावे अब नहीं चलेंगे’’ और पहले चरण तथा मौजूदा दूसरे चरण में राज्यभर में हुए भारी मतदान से यह बात स्पष्ट है।
उन्होंने कहा, ‘‘फाल्टा में तृणमूल उम्मीदवार मतदाताओं को धमका रहे थे। चुनाव आयोग के विशेष पुलिस पर्यवेक्षक वहां मतदाताओं में विश्वास पैदा करने गए थे और मतदान निष्पक्ष तथा शांतिपूर्ण ढंग से हो रहा है। ममता दीदी का खेल खत्म हो गया है।’’
अभिनेता और भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने बेलगछिया में ‘‘एक आम मतदाता की तरह’’ किसी विशेष सुविधा की मांग किए बिना, कतार में खड़े होकर वोट डाला।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे कोई सुविधा नहीं चाहिए। मैंने एक आम व्यक्ति की तरह मतदान किया।’’
चक्रवर्ती ने राज्य में सरकार परिवर्तन की उम्मीद जताते हुए कहा, ‘‘रुझान देखकर मुझे उम्मीद है कि मतदान 90 प्रतिशत से अधिक होगा। और अगर ऐसा होता है, तो आप अनुमान लगा सकते हैं कि क्या होगा।’’
भाषा गोला मनीषा
मनीषा