दुबई, एक जुलाई (एपी) ईरान द्वारा निर्धारित मार्ग का पालन नहीं करने के कारण एक पोत होर्मुज जलडमरूमध्य में फंस गया है। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने बुधवार को इस बारे में खबर दी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब ईरान युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने पर बातचीत के लिए अमेरिका के पश्चिम एशिया मामलों के दूत स्टीव विटकॉफ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर कतर के दोहा में मौजूद हैं।
ईरानी टेलीविजन की खबर में प्रभावित जहाज की पहचान एक विदेशी कंटेनर पोत के तौर पर की गई। हालांकि, इसके अलावा और कोई जानकारी तुरंत नहीं दी गई है।
प्रतीत होता है कि ईरानी सरकारी टीवी की रिपोर्ट का मकसद ईरान के उन दावों को पुख्ता करना है जो तेहरान ने अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद से इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर किए गए हैं। दुनिया इसे लंबे समय से एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानती रही है और युद्ध से पहले दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा यहीं से गुजरता था।
क्षेत्र के दो अधिकारियों ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर बताया कि बुधवार को कतर में राजनयिकों के बीच तकनीकी बातचीत शुरू हुई। इन चर्चाओं में शामिल अधिकारी समझौते को अंतिम रूप देने के लिए जरूरी बारीकियों पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि शीर्ष नेता समझौते पर मुहर लगा सकें। हालांकि, जलडमरूमध्य और लेबनान को लेकर मतभेद अब भी बने हुए हैं।
ईरान ने बातचीत शुरू होने पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
ईरान और अमेरिका के बीच हुए एक अंतरिम समझौते के तहत इस बात पर सहमति बनी थी कि 60 दिनों तक जहाजों को बिना किसी शुल्क के इस जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, तेहरान ने इस बात पर जोर दिया कि जहाजों के मार्ग का नियंत्रण उसके पास रहेगा और बाद में वह इस मार्ग से गुजरने के लिए शुल्क भी वसूलेगा। यह व्यवस्था इस जलमार्ग में दशकों से चली आ रही प्रथा से अलग है।
अमेरिका और कई खाड़ी अरब देशों ने स्पष्ट किया है कि वे इस तरह के शुल्क को स्वीकार नहीं करेंगे।
उधर, ओमान और संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी द्वारा ओमान के तट के निकट एक नया समुद्री मार्ग शुरू करने की कोशिश के बाद पिछले सप्ताहांत पूरे पश्चिम एशिया में हमले शुरू हुए जिससे पता चला कि क्षेत्र में तनाव अब भी बना हुआ है।
ईरान के सरकारी टीवी ने कहा कि पोत में सामान लदा है और वह ‘‘उथले पानी में फंस गया है क्योंकि उसने जो मार्ग चुना था वहां पानी कम गहरा था और वह आगे नहीं बढ़ पाया।’’
टीवी ने कहा कि इस जलडमरूमध्य में पोत संचालकों को ईरान की अर्द्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के निर्देशों का पालन करना होगा।
इसमें कहा गया है कि गार्ड की नौसेना ने दुनिया भर के पोत के कैप्टन, पोत मालिकों और नौवहन कंपनियों के अधिकारियों को बार-बार चेतावनी दी है कि फारस की खाड़ी में ‘अधिकृत मार्ग’ के अलावा किसी अन्य मार्ग से आवाजाही पर ऐसी घटनाएं हो सकती हैं जिनकी भरपाई नहीं की जा सकेगी।
रिपोर्ट में उन दो पोत का जिक्र नहीं किया गया जिन पर ईरान ने हाल में हमला किया था क्योंकि वे तेहरान की मंजूरी के बिना जलडमरूमध्य से गुजर रहे थे; इनमें से एक पोत कतर से कच्चा तेल ले जा रहा था।
कतर की मध्यस्थता में होने वाली बातचीत से पहले, विटकॉफ और कुशनर मंगलवार को कतर पहुंचे। हालांकि ईरान ने कहा है कि उसकी अमेरिकियों के साथ कोई बैठक करने की योजना नहीं है।
बुधवार सुबह कतर ने अमेरिकियों और अपने विदेश मंत्री, शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी के बीच हुई बैठक की पुष्टि की। कतर के विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि बातचीत में अंतरिम समझौते के साथ-साथ ‘‘बातचीत और कूटनीति के जरिए क्षेत्र में सुरक्षा एवं स्थिरता को बढ़ावा देने की कोशिशों’’ पर भी चर्चा हुई।
लेबनान के मुद्दे पर भी बात हुई, जो अंतिम समझौते का एक अहम पहलू है। ईरान ने जोर देकर कहा है कि ईरान समर्थित मिलिशिया हिज्बुल्ला और इजराइली सेना के बीच लड़ाई खत्म होनी चाहिए।
ईरान ने यह भी मांग की है कि इजराइल दक्षिणी लेबनान में कब्जे वाली जमीन को तत्काल छोड़ दे जबकि इजराइल ने कब्जा छोड़ने से इनकार किया है और कहा है कि हिज्बुल्ला को निशाना बनाने के लिए वह इलाका नहीं छोड़ेगा।
ईरान ने बुधवार को किसी भी बातचीत की तुरंत पुष्टि नहीं की। हालांकि, बातचीत में अहम भूमिका निभा रहे ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने रात में ईरानी सरकारी टेलीविजन को बताया कि युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने की कोशिशें जारी हैं।
गलीबाफ ने कहा, ‘‘हम बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अगर वे बातचीत में तय हुई बातों को लागू करने से इनकार करते हैं, तो हम युद्ध के लिए तैयार हैं।’’
इराक के दो सुरक्षा अधिकारियों ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर बताया कि बुधवार को ही इराकी अधिकारियों ने बगदाद के कड़े सुरक्षा वाले ‘ग्रीन जोन’ के ऊपर एक छोटा ड्रोन मार गिराया। इस इलाके में कई देशों के दूतावास और सरकारी इमारतें हैं।
अधिकारियों में से एक ने बताया कि ड्रोन में कोई हथियार नहीं था और शायद उसका इस्तेमाल निगरानी के लिए किया जा रहा था। किसी भी गुट ने तुरंत इस ड्रोन के अपने होने का दावा नहीं किया।
एपी सुरभि शफीक
शफीक