सिंगापुर इंडियन फाइन आर्ट सोसाइटी की भारतीय शास्त्रीय कलाओं को वैश्विक मंच पर ले जाने की योजना

सिंगापुर इंडियन फाइन आर्ट सोसाइटी की भारतीय शास्त्रीय कलाओं को वैश्विक मंच पर ले जाने की योजना

सिंगापुर इंडियन फाइन आर्ट सोसाइटी की भारतीय शास्त्रीय कलाओं को वैश्विक मंच पर ले जाने की योजना
Modified Date: September 11, 2026 / 02:14 pm IST
Published Date: September 11, 2026 2:14 pm IST

(गुरदीप सिंह)

सिंगापुर, 11 सितंबर (भाषा) दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय पारंपरिक और सांस्कृतिक कलाओं को बढ़ावा दे रही सिंगापुर इंडियन फाइन आर्ट्स सोसाइटी (एसआईएफएएस) की योजना अब अपने इस कार्य को वैश्विक स्तर पर ले जाने की है। संगठन के अध्यक्ष केवी राव ने यह जानकारी दी।

एसआईएफएएस की स्थापना 1949 में की गई थी और 77 साल पुराना यह संस्थान भारतीय शास्त्रीय कलाओं के लिए उत्कृष्टता का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।

एसआईएफएएस से गत तीन दशक से जुड़े रहे राव ने कहा,‘‘हमारा उद्देश्य स्पष्ट है। जड़ें गहरी हों और पंख फैले हुए हों।’’

उन्होंने शुक्रवार को ‘पीटीआई-भाषा’से कहा, ‘‘हम भारतीय शास्त्रीय कलाओं की परंपराओं और उनकी बारीकियों से गहराई से जुड़े रहना चाहते हैं, और साथ ही अपने छात्रों, पूर्व छात्रों, शिक्षकों, कलाकारो के लिए ऐसे व्यापक अवसर बनाना चाहते हैं जिनसे वे इस क्षेत्र और दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंच सकें।’’

राव ने कहा, ‘‘आज भारतीयता एक वैश्विक भावना है। भारत की सांस्कृतिक पहचान न केवल भारतीय मूल के लोगों को जोड़ती है, बल्कि दुनिया भर में भारत के दोस्तों को भी आकर्षित करती है, जिससे कलात्मक परंपराओं को अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों और पीढ़ियों के बीच साझा किया जा सकता है।’’

राव 2019 से एसआईएफएएस के अध्यक्ष हैं और पिछले महीने सिंगापुर में उन्हें कारोबार और सामुदायिक नेतृत्व के लिए 26वें मदर टेरेसा अंतरराष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया।

एसआईएफएएस के मौजूदा समय में करीब 2,000 सदस्य हैं और इसकी एक अकादमी है जिसमें 1,700 से अधिक छात्र भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और दृश्य कला की 18 विधाओं में शिक्षा ले रहे हैं।

भाषा धीरज वैभव

वैभव


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