श्रीलंका ने दूसरे ईरानी पोत को ‘डॉक’ करने की अनुमति दी, जहाज पर सवार 208 लोगों को सुरक्षित निकाला

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श्रीलंका ने दूसरे ईरानी पोत को ‘डॉक’ करने की अनुमति दी, जहाज पर सवार 208 लोगों को सुरक्षित निकाला

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  • Publish Date - March 6, 2026 / 12:48 AM IST,
    Updated On - March 6, 2026 / 12:48 AM IST

कोलंबो, पांच मार्च (भाषा) श्रीलंका ने बृहस्पतिवार को ईरान के दूसरे पोत को पूर्वी बंदरगाह त्रिंकोमाली पर ‘डॉक’ (लंगर डालना) करने की अनुमति दी और जहाज पर सवार सभी 208 कर्मियों को सुरक्षित निकाल लिया। राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने यह जानकारी दी।

इससे एक दिन पहले, श्रीलंका के निकट ईरान के एक नौसैनिक पोत (फ्रिगेट) पर हमला हुआ था।

टेलीविजन पर प्रसारित अपने संबोधन में, दिसानायके ने कहा कि जहाज, ‘आईआरआईएनएस बुशहर’ ने इंजन की खराबी का हवाला देते हुए श्रीलंकाई जलक्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति मांगी थी।

उन्होंने कहा, ‘‘मानवीय सहायता करते समय हम तटस्थ रहना चाहते थे।’’

राष्ट्रपति ने कहा कि श्रीलंका की भूमिका संघर्ष में शामिल एक पक्ष के अनुरोध पर प्रतिक्रिया देने तक ही सीमित थी।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हर जीवन अनमोल है।’’

उन्होंने कहा कि पोत पर सवार चालक दल के सभी 208 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।

इससे पहले दिन में, श्रीलंका ने कहा था कि एक अन्य ईरानी पोत ने उसके जलक्षेत्र में प्रवेश की अनुमति मांगी है और इस संबंध में वह उचित कदम पर विचार कर रहा है।

श्रीलंकाई अधिकारियों ने बुधवार को कहा था कि उन्होंने श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी हमले के बाद डूबे ‘आईरिस देना’ नामक ईरानी पोत से करीब 80 ईरानी नाविकों के शव बरामद किए हैं।

सरकार के प्रवक्ता और मंत्री नलिंदा जयतिस्सा ने संसद में मुख्य विपक्षी नेता साजित प्रेमदासा द्वारा दूसरे ईरानी पोत के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘हमें इसकी जानकारी है और हम पोत पर मौजूद सभी लोगों की जान की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम को लेकर विचार कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम क्षेत्रीय शांति की रक्षा की खातिर इस मुद्दे के समाधान के लिए हस्तक्षेप कर रहे हैं।’’

जयतिस्सा ने कहा कि पोत श्रीलंका के विस्तारित आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में प्रतीक्षा कर रहा है, लेकिन वह उसके जलक्षेत्र से बाहर है।

सूत्रों ने कहा कि पोत ने आपात सहायता का अनुरोध किया है।

इस बीच, अमेरिका द्वारा टॉरपीडो से निशाना बनाए गए पोत के चालक दल के जीवित बचे सदस्यों का उपचार किया जा रहा है। अस्पताल के सूत्रों ने कहा कि उनकी चोटें गंभीर नहीं हैं।

मारे गए 84 ईरानी नौसैनिकों के शवों का पोस्टमॉर्टम गॉल के करापिटिया अस्पताल में किया जाएगा। इसी अस्पताल में घायलों का उपचार जारी है।

जिस पोत पर हमला हुआ, वह नौसैनिक बेड़ा समीक्षा अभ्यास के बाद भारत के विशाखापत्तनम से अपने देश लौट रहा था।

श्रीलंकाई नौसेना ने हालांकि इसकी वजह नहीं बताई कि पोत ने आपातकालीन संदेश क्यों भेजा था लेकिन अमेरिकी रक्षा मंत्री पेट हेगसेथ ने कहा कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया।

भाषा शफीक सुभाष

सुभाष