श्रीलंका की अदालत ने ईस्टर हमला मामले में 15 लोगों को दोषी ठहराया

Ads

श्रीलंका की अदालत ने ईस्टर हमला मामले में 15 लोगों को दोषी ठहराया

  •  
  • Publish Date - September 23, 2026 / 12:49 AM IST,
    Updated On - September 23, 2026 / 12:49 AM IST

कोलंबो, 22 सितंबर (भाषा) श्रीलंका की एक अदालत ने 2019 के ईस्टर आत्मघाती हमला मामले में मंगलवार को 24 आरोपियों में से 15 को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक दोषी को 200 साल से अधिक के कारावास की सजा सुनाई।

आईएसआईएस से जुड़े स्थानीय इस्लामी चरमपंथी संगठन नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) से जुड़े नौ आत्मघाती हमलावरों ने 21 अप्रैल, 2019 को तीन कैथोलिक गिरजाघरों और तीन आलीशान होटलों को निशाना बनाकर सिलसिलेवार विस्फोट किए थे।

इन हमलों में 11 भारतीयों समेत 270 लोगों की मौत हुई थी और 500 से अधिक लोग घायल हुए थे।

‘अदादेराना’ समाचार पोर्टल की खबर के अनुसार, कोलंबो उच्च न्यायालय की एक पीठ ने सभी 15 दोषियों को 220-220 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

न्यायमूर्ति नवरत्ने मारासिंघे, न्यायमूर्ति रामनाथन कन्नन और न्यायमूर्ति सुजीवा निसांका की तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए 15 आरोपियों को दोषी करार दिया, जबकि नौ अन्य को बरी कर दिया।

इस मामले की करीब पांच साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने मुख्य आरोपी नौफर मौलवी को भी दोषी ठहराया। अभियुक्तों के खिलाफ कुल 23,270 आरोप तय किए गए थे, जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से 2,309 गवाहों ने बयान दर्ज कराए।

आरोपियों पर आतंकवाद रोकथाम अधिनियम के तहत हत्या और हत्या के प्रयास, आतंकवादी गतिविधियों की साजिश, हथियार एवं विस्फोटक रखने और उनके इस्तेमाल से जुड़े आरोप लगाए गए थे।

नेशनल तौहीद जमात के नेता जाहरान हाशिम ने खुद आत्मघाती दस्ते का नेतृत्व किया था, जिसने ईस्टर संडे की प्रार्थना सभा को निशाना बनाया था।

इस हमले के बाद श्रीलंका में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे पर पहले से खुफिया जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद हमलों को रोकने में विफल रहने के आरोप लगे थे।

हमलों के बाद सिरिसेना द्वारा गठित राष्ट्रपति जांच पैनल ने भी तत्कालीन राष्ट्रपति को हमलों को रोकने में विफल रहने का जिम्मेदार ठहराया था।

भाषा खारी वैभव

वैभव