कोलंबो, 23 मार्च (भाषा) श्रीलंका में ईरान के राजदूत अलीरजा दिलखुश ने सोमवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य मित्र देशों के लिए खुला है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जरूरत पड़ने पर तेहरान द्वीपीय राष्ट्र को तेल या अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने के लिए तैयार है।
पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी कर दी गई है। यह एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके माध्यम से विश्व की 20 प्रतिशत ऊर्जा का परिवहन होता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण रखने वाले ईरान ने 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से बहुत कम जहाजों को इसे पार करने की अनुमति दी है।
अलीरजा दिलखुश ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य मित्र देशों के जहाजों के आवागमन के लिए खुला है। उन्होंने कहा, “श्रीलंका हमारा मित्र देश है और जैसा कि मैंने आपको बताया, होर्मुज जलडमरूमध्य श्रीलंका जैसे हमारे मित्रों के लिए बंद नहीं है।”
उन्होंने कहा, “यदि श्रीलंका तेल या किसी अन्य आवश्यक वस्तु की मांग करता है, तो ईरान आपूर्ति करेगा।”
इस संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजारों को प्रभावित किया है। यह संघर्ष चौथे सप्ताह में प्रवेश कर गया है, जिसके साथ ही श्रीलंका सरकार ने रविवार को ईंधन की कीमतों में 25 प्रतिशत की वृद्धि की।
एक मार्च के बाद से सरकार द्वारा ईंधन की कीमतों में यह तीसरी वृद्धि थी।
इस महीने की शुरुआत में श्रीलंका के तट से दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबोए गए एक ईरानी जहाज के बारे में राजदूत ने कहा कि वह “युद्ध के लिए यहां नहीं आया था।’’
उन्होंने कहा, “डेना युद्ध के लिए तैयार नहीं था। वह युद्ध के लिए यहां नहीं आया था। वह संघर्ष के लिए यहां नहीं आया था। वह भारत में एक शांतिपूर्ण अभ्यास में भाग ले रहा था।”
उन्होंने इस हमले को मानवीय कानून का उल्लंघन बताया।
भारत द्वारा आयोजित बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘मिलन’ में भाग लेने के बाद ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना लौट रहा था, तभी उस पर हमला हुआ। इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविक मारे गए।
दिलखुश ने बताया कि श्रीलंका सरकार ने मिलन अभ्यास में शामिल तीनों ईरानी जहाजों को द्वीपीय देश का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया था।
उन्होंने कहा, “इस जहाज को, दो अन्य जहाजों के साथ, श्रीलंका ने यहां आने का निमंत्रण दिया था और वे उनके निमंत्रण पर यहां आए थे।”
दिलखुश ने एक अन्य जहाज, आईआरआईएस बुशहर के 200 से अधिक नाविकों को शरण देने के लिए श्रीलंका का आभार जताया, जिनमें से अधिकांश कैडेट थे।
इंजन में खराबी का हवाला देते हुए श्रीलंकाई जलक्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति मांगने के बाद, श्रीलंका ने उसे अपने पूर्वी बंदरगाह त्रिंकोमाली पर रुकने की अनुमति दी।
भाषा अमित सुरेश
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