तालिबान महिलाओं के खिलाफ युद्ध छेड़ता है, लेकिन उनकी आवाज बुलंद है

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तालिबान महिलाओं के खिलाफ युद्ध छेड़ता है, लेकिन उनकी आवाज बुलंद है

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  • Publish Date - March 7, 2026 / 06:39 PM IST,
    Updated On - March 7, 2026 / 06:39 PM IST

(आयशा जहांगीर, यूएनएसडब्ल्यू सिडनी द्वारा)

सिडनी, सात मार्च (द कन्वरसेशन) अफगान महिला लेखिकाओं में एक गहरी विद्रोही और भड़काऊ भावना दिखाई देती है। जब अगस्त 2021 में तालिबान ने काबुल पर दोबारा नियंत्रण हासिल किया, तो सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करती महिलाओं और स्कूल की कक्षाओं में जाने से रोकी जा रही लड़कियों की तस्वीरें दुनिया भर में प्रसारित हुईं।

अफगानिस्तान में तब से महिलाओं के सार्वजनिक जीवन को व्यवस्थित रूप से दबाने के तहत कई प्रतिगामी कानून लागू किए गए हैं, जिनमें महिलाओं के सार्वजनिक रूप से बोलने पर प्रतिबंध लगाना भी शामिल है।

हाल में तालिबान के शिक्षा अधिकारियों ने महिलाओं द्वारा लिखी गई 140 पुस्तकों को “शरिया विरोधी” बताकर काली सूची में डाल दिया।

इस संस्थागत उपेक्षा के बीच, लेखन प्रतिरोध का एक माध्यम बन जाता है। हालिया अफगान महिला साहित्य इस उपेक्षा को चुनौती देता है। यह स्वायत्तता को पुनः प्राप्त करने का एक तरीका है।

अफगानिस्तान अक्सर युद्ध रिपोर्टिंग की कठिन भाषा और नीतिगत बहस की प्रक्रियात्मक भाषा के माध्यम से ऑस्ट्रेलियाई पाठकों तक पहुंचता है। साहित्य एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

यहां समकालीन अफगान महिला लेखिकाओं द्वारा लिखित पांच महत्वपूर्ण पुस्तकें दी गई हैं।

‘माई डियर काबुल’: एक अफगान महिला लेखन समूह के जीवन का एक वर्ष।

‘माई डियर काबुल’ (2024) एक पारंपरिक संस्मरण नहीं है, बल्कि वास्तविक अनुभवों का एक मानचित्रण है। इसमें 21 अफगान महिला लेखिकाओं की आवाजें शामिल हैं, जिन्होंने तालिबान के सत्ता पर कब्जा जमाने के दौरान एक गुप्त डिजिटल लेखन समूह चलाया था।

व्हाट्सएप पर हुई बातचीत को डाउनलोड करके, अनुवाद करके और एक सामूहिक डायरी के रूप में संकलित करके तैयार की गई यह पुस्तक, एक राजनीतिक व्यवस्था के पतन के दौरान जीवन का एक मार्मिक वर्णन प्रस्तुत करती है।

‘माई डियर काबुल’ की महिलाएं अधिकतर 20 से 30 वर्ष की आयु वर्ग की हैं, हालांकि एक महिला 60 वर्ष की भी है। यह विविधता अफगान महिलाओं के एकतरफा चित्रण को चुनौती देती है।

हम सदाफ की कहानी के माध्यम से व्यक्तिगत भय का अनुभव करते हैं, जो एक शिक्षिका है और अपने कक्षा के अचानक समाप्त होने का वर्णन करती है जब प्रधानाध्यापक तालिबान के शहर में प्रवेश करने के कारण परीक्षा रोककर कक्षा 8वीं के छात्रों को छुट्टी दे देता है।

लूसी हन्ना और जरघुना कारगर द्वारा संपादित और सारा रहमानी द्वारा सचित्रित दूसरी पुस्तक, ‘राइजिंग आफ्टर द फॉल’ (2023), ने ‘माई डियर काबुल’ की सामूहिक अवधारणा को युवा पाठकों के लिए रूपांतरित किया है। ‘राइजिंग आफ्टर द फॉल’ में विभिन्न आयु वर्ग के पाठकों की आवाज़ें शामिल हैं।

यह पुस्तक घरेलू प्रतिरोध, विस्थापित स्कूली शिक्षा और सीमित स्वतंत्रता की झलकियों के माध्यम से वास्तविक जीवन के अनुभवों के अंशों को संक्षेप में प्रस्तुत करती है।

‘माई पेन इज द विंग ऑफ ए बर्ड’ : अफगान महिलाओं द्वारा लिखित नयी कथाएं

लाइस डौसेट और लूसी हन्ना द्वारा संपादित, ‘माई पेन इज द विंग ऑफ ए बर्ड’ (2022) में अफगानिस्तान में रहने वाली 18 अफगान महिलाओं की लघु कथाएं संकलित हैं।

ये कहानियां अफगानिस्तान की दो प्रमुख भाषाओं, पश्तो और दारी में लिखी गई हैं और अफगानियों द्वारा अंग्रेजी में अनुवादित की गई हैं, जिनमें से कई स्वयं लेखक हैं।

‘वी आर स्टिल हियर: अफगान महिलाएं साहस, स्वतंत्रता और अपनी बात सुनाने के संघर्ष पर

नाहिद शाहलीमी द्वारा संपादित, वी आर स्टिल हियर (2022) में 13 अफगान महिला पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, कोडर्स, संगीतकारों और कलाकारों के निबंध, अनुभव और विचार संकलित हैं। इसमें तालिबान के सत्ता पर कब्जे से पहले और बाद की अवधि को शामिल किया गया है।

‘डांसिंग इन द मॉस्क: एक अफगान मां का अपने बेटे को लिखा पत्र

हालांकि होमीरा कादेरी का संस्मरण ‘डांसिंग इन द मॉस्क’ (2021) काबुल के पतन से पहले का है, लेकिन 2021 के बाद के परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।

यह पत्र कादेरी के बेटे को संबोधित है, जिसे उसे अपने दुर्व्यवहार करने वाले पति से तलाक के बाद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

(द कन्वरसेशन)

देवेंद्र पवनेश

पवनेश