(अदिति खन्ना)
लंदन, 24 जून (भाषा) लंदन के उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बैंक ऑफ इंडिया को 1.15 करोड़ डॉलर से ज़्यादा की रकम चुकानी होगी। इस रकम में निजी कर्ज की गारंटी पर लगने वाला ब्याज भी शामिल है।
नीरव (55) ने उस व्यक्तिगत गारंटी की वैधता पर सवाल उठाया था, जो दुबई में पंजीकृत फायरस्टार डायमंड एफजेडई नामक उसकी संबद्ध कंपनी को दिए गए ऋण से जुड़ी थी।
जेल में बंद नीरव दो अरब अमेरिकी डॉलर के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) धोखाधड़ी और धन शोधन मामले में भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ मुकदमा लड़ रहा है।
मंगलवार को लंदन सर्किट कमर्शियल कोर्ट में सुनाए गए फैसले में न्यायमूर्ति साइमन टिंकलर ने बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में निर्णय दिया। यह फैसला एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आया, जो ब्रिटेन जेल सेवा के भीतर दस्तावेजों के स्थानांतरण में हुई देरी के कारण जटिल हो गई थी।
न्यायमूर्ति टिंकलर ने कहा, “नीरव मोदी को अक्टूबर 2025 में जारी मांग विधिवत रूप से तामील कराई गई थी। यह व्यक्तिगत गारंटी के तहत बैंक के प्रति देयता से संबंधित एक वैध मांग थी।”
उन्होंने कहा, “भारतीय कानून के अनुसार यह व्यक्तिगत गारंटी न तो शून्य है और न ही अप्रवर्तनीय। इसलिए नीरव मोदी इस व्यक्तिगत गारंटी के तहत बैंक को देय मूल राशि 4,105,189.34 अमेरिकी डॉलर के लिए उत्तरदायी है।”
न्यायाधीश ने ‘‘उस रकम पर लगने वाले ब्याज’’ का भी उल्लेख किया जिसके लिए नीरव मोदी जिम्मेदार है। मार्च 2026 तक यह रकम अनुमानित 1.15 करोड़ अमेरिकी डॉलर हो गई और उस तारीख के बाद भी इस पर ब्याज जुड़ता रहेगा।
बैंक ऑफ इंडिया 2018 से इस मामले की पैरवी कर रहा था, जब नीरव मोदी से जुड़ी कंपनियों को लेकर आरोप सामने आने लगे थे। बैंक का प्रतिनिधित्व फ्लैडगेट एलएलपी के मिलन कपाड़िया ने किया।
न्यायाधीश के समक्ष तीन मुख्य प्रश्न विचारार्थ थे: क्या नीरव मोदी को वैध रूप से मांग तामील कराई गई थी; क्या वह मांग बैंक के प्रति उसकी देयता से संबंधित थी; और क्या व्यक्तिगत गारंटी प्रवर्तनीय थी।
सभी पहलुओं पर, न्यायमूर्ति टिंकलर ने बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में निर्णय दिया। मामले में अदालत ने भारतीय कानून के विशेषज्ञों की भी दलीलें सुनीं। इस दौरान नीरव मोदी ने खुद भी अपना पक्ष रखा।
पिछले साल कई सुनवाइयों के दौरान, नीरव ने दृष्टि कमज़ोर होने, क्लिनिकल डिप्रेशन और जेल की पाबंदियों का हवाला देते हुए सुनवाई टालने का अनुरोध किया।
भारत में नीरव मोदी के खिलाफ तीन आपराधिक मामले चल रहे हैं। इनमें पीएनबी धोखाधड़ी का केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का मामला, उस धोखाधड़ी से मिली रकम के धन शोधन से जुड़ा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का मामला, और तीसरा मामला सीबीआई की कार्यवाही के दौरान सबूतों और गवाहों के साथ कथित छेड़छाड़ से जुड़ा है।
भाषा आशीष प्रशांत
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