असम में पांच कार्यकर्ताओं की हिरासत पर संरा विशेषज्ञों ने चिंता जताई

असम में पांच कार्यकर्ताओं की हिरासत पर संरा विशेषज्ञों ने चिंता जताई

असम में पांच कार्यकर्ताओं की हिरासत पर संरा विशेषज्ञों ने चिंता जताई
Modified Date: July 18, 2026 / 08:41 pm IST
Published Date: July 18, 2026 8:41 pm IST

जिनेवा, 18 जुलाई (भाषा) संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के एक समूह ने असम में ‘‘मूल निवासी समुदायों के मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले’’ पांच कार्यकर्ताओं की हिरासत पर चिंता जताते हुए कहा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप इन समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए किए जा रहे वैध प्रयासों को कमजोर कर सकते हैं।

व्यापार और मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र कार्य समूह तथा संयुक्त राष्ट्र के चार विशेष प्रतिवेदकों (स्वतंत्र विशेषज्ञों) ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा कि वे उन खबरों से ‘‘बेहद चिंतित’’ हैं, जिनमें कहा गया है कि ‘‘मूल निवासी समुदायों की भूमि और अधिकारों के पक्ष में शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठाने के कारण इन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।’’

बयान के अनुसार, असम पुलिस ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास एक लक्जरी पर्यटन परियोजना के प्रस्तावित निर्माण के विरोध में 29 जून को हुए प्रदर्शन के सिलसिले में प्रणब डोले, राजीब पेगू, बृजित कुटुम, अमित नाग और भास्कर सैकिया को गिरफ्तार किया।

खबरों के अनुसार, यह परियोजना असम सरकार और एक प्रमुख होटल समूह के बीच हुए समझौते से जुड़ी है।

पुलिस ने इस सप्ताह की शुरुआत में पांचों को आपराधिक साजिश, गैरकानूनी रूप से एकत्र होना, आपराधिक अतिचार, दंगा, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने और आपराधिक धमकी देने के आरोपों में हिरासत में लिया।

विशेषज्ञों ने बयान में कहा, ‘‘इस तरह की गिरफ्तारियों और मुकदमों से लोगों में भय पैदा हो सकता है तथा अन्य लोग भी ज्यादतियों के खिलाफ आवाज उठाने को लेकर हतोत्साहित हो सकते हैं।’’

उन्होंने कहा कि धमकियां, गिरफ्तारियां, निगरानी, बदले की कार्रवाई और कानूनी उत्पीड़न मूल निवासी समुदायों एवं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं तथा इससे व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ी प्रक्रियाओं में स्वतंत्र रूप से भाग लेने की उनकी क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञों ने कहा, ‘‘देशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मानवाधिकार कार्यकर्ता मानवाधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर सकें तथा किसी धमकी, बदले की कार्रवाई या आपराधिक मामले में फंसाए जाने के डर के बिना सुरक्षित रूप से अपना काम कर सकें।’’

उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि हिरासत में लिए गए सभी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए और उनके अधिकारों की पूरी तरह रक्षा की जाए।

विशेषज्ञों ने कहा कि यदि कार्यकर्ताओं को केवल अपने अधिकारों का शांतिपूर्ण ढंग से इस्तेमाल करने के कारण हिरासत में लिया गया है, तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाना चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया कि किसी भी आपराधिक कार्यवाही में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का पूरी तरह पालन हो।

विशेषज्ञों ने भूमि अधिग्रहण या विकास कार्यों को तब तक रोकने का आह्वान किया, जब तक प्रभावित मूल निवासी समुदायों से सार्थक बातचीत नहीं की जाती और उनकी सहमति नहीं ली जाती।

भाषा

सिम्मी दिलीप

दिलीप


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