अमेरिकी सुरक्षा विशेषज्ञों ने भारत को होने वाली हथियारों की बिक्री की समीक्षा करने का आग्रह किया

अमेरिकी सुरक्षा विशेषज्ञों ने भारत को होने वाली हथियारों की बिक्री की समीक्षा करने का आग्रह किया

अमेरिकी सुरक्षा विशेषज्ञों ने भारत को होने वाली हथियारों की बिक्री की समीक्षा करने का आग्रह किया
Modified Date: July 18, 2026 / 06:24 pm IST
Published Date: July 18, 2026 6:24 pm IST

(सागर कुलकर्णी)

वाशिंगटन, 18 जुलाई (भाषा) अमेरिका के एक सांसद और राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों ने भारत को होने वाली हथियारों की बिक्री की समीक्षा करने का अमेरिकी कांग्रेस से आग्रह किया है।

सुरक्षा विशेषज्ञों ने कथित अंतरराष्ट्रीय दमन का हवाला देते हुए यह आग्रह किया।

टॉम लैंटोस मानवाधिकार आयोग के सह-अध्यक्ष, अमेरिकी सांसद जिम मैकगवर्न ने भी कांग्रेस से द्विदलीय और द्विसदनीय ‘ट्रांसनेशनल रिप्रेशन पॉलिसी एक्ट’ पारित करने का आह्वान किया।

मैकगवर्न ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो से आग्रह किया कि वे हथियार निर्यात नियंत्रण अधिनियम के तहत अमेरिका द्वारा भारत को की जाने वाली हथियारों की बिक्री के लिए उसकी पात्रता की समीक्षा करें।

गत 14 जुलाई को अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में एक बैठक हुई थी। यह बैठक ‘इक्विटास फोरम यूएसए’ ने कुछ मानवाधिकार और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर आयोजित की थी।

कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा विभाग के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी डैनियल स्टैंटन ने चेतावनी दी कि शत्रुतापूर्ण देश अपनी सरकारी शक्ति के साधन के रूप में संगठित आपराधिक नेटवर्कों का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘वे विदेशों में रहने वाले अपने विरोधियों या समुदायों को डराने की कोशिश करते हैं, अपराधियों की मदद लेते हैं और दूसरे देशों में लोगों के खिलाफ हिंसक घटनाओं को बढ़ावा देते हैं।’’

अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) के पूर्व प्रमुख स्टीफन श्नेक ने कहा कि आयोग ने अपनी 2026 की रिपोर्ट में लगातार सातवीं बार सिफारिश की है कि भारत को धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी चिंताओं वाले देशों की सूची में रखा जाए।

भारत ने यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट को खारिज कर दिया और कहा कि इसमें तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है तथा “पूर्वाग्रह से ग्रस्त एक विमर्श को बढ़ावा देती है’’।

‘सिख कोएलिशन’ के संघीय नीति प्रबंधक हरजोत सिंह ने कहा, ‘‘विदेशों से किया जाने वाला दमन सिर्फ कुछ समुदायों को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि यह अमेरिका की स्वतंत्रता, नागरिक अधिकारों और वहां रहने वाले सभी लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा है।’’

भाषा

देवेंद्र नेत्रपाल

नेत्रपाल


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