UAE Drops Pak Airport Project || Image- The Tribune File
इस्लामाबाद: संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति और अबू धाबी के शासक शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के एक फैसले ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। (UAE Drops Pak Airport Project) हैरान की बात ये है कि, यूएई ने यह निर्णय तब लिया है जब पाकिस्तान आर्थिक मोर्चो पर जूझ रहा है।
Pakistan has OFFICIALLY cancelled the agreement with the UAE to operate Islamabad International Airport.
Multiple intelligence reports indicate UAE was backing secessionist elements in Kashmir, pushing for the region to break from Pakistan and join India.
– @RealAbyan pic.twitter.com/jGK7IJ2RBs
— Imtiaz Mahmood (@ImtiazMadmood) January 24, 2026
दरअसल भारत की अचानक यात्रा के कुछ ही दिनों बाद, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने इस्लामाबाद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन की अपनी योजना को रद्द करके पाकिस्तान को चौंका दिया। यह परियोजना अगस्त 2025 से चर्चा में थी, लेकिन अबू धाबी ने अब प्रोजकेट में शामिल नहीं होने का मन बना लिया है। पाकिस्तानी प्रकाशन द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि परियोजना रद्द करने का आधिकारिक तौर पर राजनीति से कोई संबंध नहीं है। लेकिन यह यूएई और सऊदी अरब के बीच बढ़ते मतभेद और भारत-यूएई तथा पाकिस्तान-सऊदी अरब के गहरे होते संबंधों के बीच आया है।
बता दें कि, कभी खाड़ी देशों के घनिष्ठ सहयोगी रहे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात अब एक-दूसरे के विरोधी हैं। खासकर यमन के मुद्दे पर दोनों के बीच काफी मतभेद है। रियाद ने संयुक्त अरब अमीरात समर्थित अलगाववादी गुटों का विरोध किया है। दूसरी तरफ सऊदी मीडिया ने अबू धाबी की क्षेत्रीय रणनीति की खुलेआम आलोचना की है। (UAE Drops Pak Airport Project) इन सबके बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ रक्षा संबंध मजबूत किए हैं और तुर्की के साथ मिलकर एक “इस्लामिक नाटो” बनाने का लक्ष्य रखा है।
रिपोर्टों में कहा गया है, “सऊदी अरब पाकिस्तान की सैन्य विशेषज्ञता का लाभ उठा रहा है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात ने भारत के साथ नए रक्षा समझौते किए हैं।” खाड़ी के इन दो महाशक्तियों के बीच बढ़ती खाई का असर पाकिस्तान की हवाई अड्डे की योजनाओं पर भी पड़ रहा है।
लगभग चार दशक पहले, संयुक्त अरब अमीरात पाकिस्तान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक था। यूएई में हजारों पाकिस्तानी कामगार कार्यरत थे। दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा और निवेश परियोजनाओं में भी सहयोग किया।
हालांकि, समय के साथ सुरक्षा संबंधी चिंताओं, लाइसेंस विवादों और पुरानी बुनियादी ढाँचे के कारण संबंध खराब हो गए। (UAE Drops Pak Airport Project) सरकारी उद्यमों में कुप्रबंधन और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण भारी नुकसान हुआ, जिसके चलते इस्लामाबाद को पिछले साल पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) जैसी संपत्तियों को बेचना पड़ा।
इन्हें भी पढ़ें:-