UAE Drops Pak Airport Project: पीएम मोदी ने कर दिया पाकिस्तान के साथ खेला!.. इस देश ने वापस लिया प्रोजेक्ट, पड़ोसी देश को लगा बड़ा झटका..

Ads

UAE Drops Pak Airport Project: लगभग चार दशक पहले, संयुक्त अरब अमीरात पाकिस्तान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक था। यूएई में हजारों पाकिस्तानी कामगार कार्यरत थे। दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा और निवेश परियोजनाओं में भी सहयोग किया।

  •  
  • Publish Date - January 27, 2026 / 10:23 AM IST,
    Updated On - January 27, 2026 / 10:24 AM IST

UAE Drops Pak Airport Project || Image- The Tribune File

HIGHLIGHTS
  • यूएई ने इस्लामाबाद एयरपोर्ट प्रोजेक्ट छोड़ा
  • पाकिस्तान को आर्थिक और कूटनीतिक झटका
  • भारत यात्रा के बाद लिया गया फैसला

इस्लामाबाद: संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति और अबू धाबी के शासक शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के एक फैसले ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। (UAE Drops Pak Airport Project) हैरान की बात ये है कि, यूएई ने यह निर्णय तब लिया है जब पाकिस्तान आर्थिक मोर्चो पर जूझ रहा है।

पाकिस्तानी मीडिया ने की पुष्टि

दरअसल भारत की अचानक यात्रा के कुछ ही दिनों बाद, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने इस्लामाबाद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन की अपनी योजना को रद्द करके पाकिस्तान को चौंका दिया। यह परियोजना अगस्त 2025 से चर्चा में थी, लेकिन अबू धाबी ने अब प्रोजकेट में शामिल नहीं होने का मन बना लिया है। पाकिस्तानी प्रकाशन द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि परियोजना रद्द करने का आधिकारिक तौर पर राजनीति से कोई संबंध नहीं है। लेकिन यह यूएई और सऊदी अरब के बीच बढ़ते मतभेद और भारत-यूएई तथा पाकिस्तान-सऊदी अरब के गहरे होते संबंधों के बीच आया है।

बता दें कि, कभी खाड़ी देशों के घनिष्ठ सहयोगी रहे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात अब एक-दूसरे के विरोधी हैं। खासकर यमन के मुद्दे पर दोनों के बीच काफी मतभेद है। रियाद ने संयुक्त अरब अमीरात समर्थित अलगाववादी गुटों का विरोध किया है। दूसरी तरफ सऊदी मीडिया ने अबू धाबी की क्षेत्रीय रणनीति की खुलेआम आलोचना की है। (UAE Drops Pak Airport Project) इन सबके बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ रक्षा संबंध मजबूत किए हैं और तुर्की के साथ मिलकर एक “इस्लामिक नाटो” बनाने का लक्ष्य रखा है।

रिपोर्टों में कहा गया है, “सऊदी अरब पाकिस्तान की सैन्य विशेषज्ञता का लाभ उठा रहा है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात ने भारत के साथ नए रक्षा समझौते किए हैं।” खाड़ी के इन दो महाशक्तियों के बीच बढ़ती खाई का असर पाकिस्तान की हवाई अड्डे की योजनाओं पर भी पड़ रहा है।

पाकिस्तान-यूएई संबंधों में आई खटास

लगभग चार दशक पहले, संयुक्त अरब अमीरात पाकिस्तान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक था। यूएई में हजारों पाकिस्तानी कामगार कार्यरत थे। दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा और निवेश परियोजनाओं में भी सहयोग किया।

हालांकि, समय के साथ सुरक्षा संबंधी चिंताओं, लाइसेंस विवादों और पुरानी बुनियादी ढाँचे के कारण संबंध खराब हो गए। (UAE Drops Pak Airport Project) सरकारी उद्यमों में कुप्रबंधन और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण भारी नुकसान हुआ, जिसके चलते इस्लामाबाद को पिछले साल पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) जैसी संपत्तियों को बेचना पड़ा।

इन्हें भी पढ़ें:-

Q1. यूएई ने किस परियोजना से खुद को अलग किया है?

👉 यूएई ने इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन प्रोजेक्ट को रद्द किया।

Q2. यह फैसला पाकिस्तान के लिए क्यों अहम है?

👉 पाकिस्तान आर्थिक संकट से जूझ रहा है और इस निवेश से बड़ी उम्मीदें थीं।

Q3. क्या इस फैसले के पीछे राजनीतिक कारण बताए गए हैं?

👉 आधिकारिक तौर पर नहीं, लेकिन खाड़ी देशों के मतभेदों को कारण माना जा रहा है।