यरुशलम, 19 जून (एपी) दक्षिणी लेबनान में इजराइल और हिज्बुल्ला के बीच लड़ाई के बाद शुक्रवार को अमेरिका और ईरान की बातचीत को स्थगित कर दिया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
इससे ईरान युद्ध समाप्त करने के प्रारंभिक समझौते को लेकर सवाल खड़े हो गये हैं।
तीन अधिकारियों ने बताया कि बाद में इजराइल और चरमपंथी समूह ने युद्धविराम पर सहमति जताई।
दो क्षेत्रीय अधिकारियों और एक अमेरिकी अधिकारी ने युद्धविराम बहाल करने पर सहमति बनने की जानकारी दी।
क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, इस अस्थायी युद्धविराम की मध्यस्थता कतर, अमेरिका और ईरान ने मिलकर की है।
हिज्बुल्ला के एक सदस्य ने कहा कि मध्यस्थों ने एक नए युद्धविराम को लागू करने का प्रयास किया और जल्द ही किसी समझौते की घोषणा हो सकती है, लेकिन उन्होंने यह पुष्टि नहीं की कि यह वास्तव में लागू हो चुका है।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की।
सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने कहा कि सेना को सरकार से कोई अलग निर्देश नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि इजराइली बल “अग्रिम रक्षा क्षेत्र” में काम कर रहे हैं और आगे भी ऐसा करते रहेंगे।
ईरानी अधिकारियों ने योजना के अनुसार स्विट्जरलैंड की यात्रा नहीं की और जोर दिया कि बातचीत शुरू होने से पहले लेबनान में लड़ाई रुकनी चाहिए।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी अपनी यात्रा स्थगित कर दी।
इजराइल की सेना ने शुक्रवार को कहा कि उसने रातभर दक्षिणी लेबनान में कई लक्ष्यों पर हमले किए, जबकि हिज्बुल्ला ने क्षेत्र में भीषण लड़ाई जारी रहने की जानकारी दी है।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि कम से कम 21 लोग मारे गए, जबकि इजराइल ने कहा कि उसके चार सैनिकों की मौत हुई।
इन घटनाओं ने ईरान और अमेरिका के बीच हाल में हुए युद्ध समाप्ति संबंधी प्रारंभिक समझौते के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। न तो इजराइल और न ही चरमपंथी समूह ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
इजराइली सेना ने कहा कि दक्षिणी लेबनान के नबातियह शहर के निकट हमले में एक लेफ्टिनेंट कर्नल समेत चार सैनिक मारे गए। इसने कहा कि एक ड्रोन हमले में अन्य पांच लोग घायल हो गए।
एक सैन्य बयान के अनुसार इसके बाद इजराइल ने नबातियह और अन्य क्षेत्रों में “हिज्बुल्ला के बुनियादी ढांचे से जुड़े ठिकानों” पर कई हमले किए।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बयान में कहा, ‘‘इजराइल अपने सैनिकों या अपने क्षेत्र पर हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा, और इन हमलों के लिए हिज्बुल्ला को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।’’
प्रारंभिक समझौते के अनुसार ईरान को अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में कम करना होगा और परमाणु हथियार विकसित न करने की प्रतिबद्धता दोहरानी होगी, हालांकि कई अन्य मुद्दों पर बातचीत बाकी है।
इस समझौते के तहत 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर स्थायी सहमति बनाने और होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल परिवहन को सामान्य करने का लक्ष्य रखा गया है।
एपी
धीरज देवेंद्र माधव
माधव