अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने जन्म के आधार पर नागरिकता पर रोक संबंधी ट्रंप का आदेश निरस्त किया
अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने जन्म के आधार पर नागरिकता पर रोक संबंधी ट्रंप का आदेश निरस्त किया
(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, 30 जून (भाषा) अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें जन्म के आधार पर नागरिकता पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया था। अदालत ने कहा कि अमेरिकी भूमि पर जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति अमेरिकी नागरिक है।
उच्चतम न्यायालय ने 5-4 के बहुमत से दिए फैसले में कहा कि अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को जन्म के आधार पर नागरिकता की गारंटी देता है, भले ही उनके माता-पिता देश में अवैध रूप से रह रहे हों या अस्थायी रूप से मौजूद हों।
पिछले वर्ष जनवरी में दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के कुछ घंटे बाद ही ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी किया था, जिसके तहत जन्म के आधार पर नागरिकता को केवल उन बच्चों तक सीमित करने का प्रयास किया गया था, जिनके कम से कम एक माता-पिता अमेरिका में कानूनी रूप से रह रहे हों।
ट्रंप ने जन्म के आधार पर नागरिकता की नीति को ‘‘शर्मनाक’’ बताया था, जबकि उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने इसे ‘‘दुनिया की सबसे मूर्खतापूर्ण आव्रजन नीति’’ कहा था।
एक अप्रैल को ट्रंप जन्म के आधार पर नागरिकता मामले में मौखिक दलीलें सुनने के लिए स्वयं उच्चतम न्यायालय पहुंचे थे। पद पर रहते हुए किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने ऐसा पहली बार किया था।
वर्ष 1868 में अनुमोदित 14वें संशोधन में कहा गया है कि अमेरिका में जन्म लेने या नागरिकता प्राप्त करने वाले तथा उसके अधिकार क्षेत्र के अधीन सभी व्यक्ति अमेरिका और जिस प्रांत में वे रहते हैं, उसके नागरिक होंगे।
प्रधान न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत के फैसले में कहा, ‘‘तब भी और अब भी, नागरिकता का अर्थ अधिकारों के साथ राजनीतिक समुदाय में स्वतंत्र रूप से भागीदारी करने का अधिकार है।’’
अदालत ने कहा, ‘‘अमेरिका में ऐसे माता-पिता के यहां जन्मे बच्चे, जो अवैध रूप से या अस्थायी तौर पर देश में रह रहे हैं, अमेरिका के अधिकार क्षेत्र के अधीन आते हैं और 14वें संशोधन के नागरिकता प्रावधान के तहत जन्म से ही अमेरिकी नागरिक हैं।’’
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की यह दूसरी प्रमुख नीति है, जिसे उच्चतम न्यायालय ने निरस्त किया है। इससे पहले फरवरी में अदालत ने उनके शुल्क (टैरिफ) संबंधी निर्णय को भी रद्द कर दिया था।
असहमति जताते हुए न्यायाधीश क्लेरेंस थॉमस ने कहा, ‘‘नागरिक अधिकार अधिनियम और नागरिकता प्रावधान दोनों ही अमेरिका में जन्मे और स्थायी रूप से रहने वाले लोगों को उनकी नस्ल की परवाह किए बिना नागरिकता की गारंटी देते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रपति के आदेश के कई संभावित अनुप्रयोग नागरिकता प्रावधान के मूल सार्वजनिक अर्थ के अनुरूप हैं, इसलिए मैं सम्मानपूर्वक असहमति व्यक्त करता हूं।’’
यदि अदालत ट्रंप के आदेश को बरकरार रखती तो अमेरिका में हर वर्ष जन्म लेने वाले करीब ढाई लाख बच्चों की कानूनी स्थिति प्रभावित होती और परिवारों को अपने नवजात बच्चों की नागरिकता के लिए माता-पिता की नागरिकता या कानूनी स्थिति साबित करनी पड़ती।
ट्रंप के करीबी सहयोगियों में शामिल विदेश मंत्री मार्को रुबियो, एफबीआई निदेशक काश पटेल और उपराष्ट्रपति की पत्नी उषा वेंस भी ऐसे प्रवासी परिवारों के बच्चे हैं, जिन्हें जन्म के आधार पर नागरिकता का लाभ मिला था।
नागरिक संगठन इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने कहा, ‘‘आज का फैसला इस बात की गहरी पुष्टि करता है कि अमेरिका में किसका स्थान है।’’
उन्होंने कहा कि भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रवासी परिवार उन समुदायों में शामिल हैं, जो ट्रंप के कार्यकारी आदेश से सबसे अधिक प्रभावित होते, क्योंकि लंबित वीजा प्रक्रियाओं के बीच उनके बच्चे अक्सर स्थायी निवास का दर्जा मिलने से पहले ही अमेरिका में जन्म लेते हैं।
प्रमुख भारतीय-अमेरिकी सामुदायिक नेता अजय जैन भुटोरिया ने इस फैसले को ‘‘ऐतिहासिक जीत’’ बताया। उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय के 5-4 के फैसले ने उन प्रवासी परिवारों के जन्म के आधार पर नागरिकता के अधिकार की रक्षा की है, जिन्होंने अमेरिका में अपना जीवन बनाया है। अमेरिका अपनी स्थापना की 250वीं वर्षगांठ की तैयारी कर रहा है और यह फैसला उस इतिहास का सम्मान करता है, जिसमें प्रवासियों ने देश को मजबूत बनाया है।’’
फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (एफआईआईडीएस) के अध्यक्ष और नीति एवं रणनीति प्रमुख खंडेराव कंद ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले से अमेरिका में जीवन बसा चुके लाखों परिवारों को आवश्यक कानूनी स्पष्टता मिली है।
उन्होंने कहा कि लगभग 52 लाख की भारतीय-अमेरिकी आबादी में 12 लाख से अधिक उच्च कुशल पेशेवर और उनके परिवार रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की लंबी प्रतीक्षा सूची में वर्षों से इंतजार कर रहे हैं।
कंद ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि यह फैसला कानूनी आव्रजन व्यवस्था के आधुनिकीकरण पर भी नए सिरे से ध्यान केंद्रित करेगा, ताकि नियमों का पालन करने वाले लोगों के साथ निष्पक्षता, निश्चितता और सम्मान का व्यवहार हो।’’
भाषा
अमित सुरेश
सुरेश

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