(रेशल वुड्स, लिंकन विश्वविद्यालय)
लिंकन, 11 जनवरी (द कन्वरसेशन) ओजेंपिक, वेगोवी और मौनजारो जैसी दवाएं मुख्य रूप से भूख में कमी लाकर वजन घटाती हैं। ये दवाएं शरीर में पैदा होने वाले ‘ग्लूकागॉन-लाइक पेप्टाइड-1 (जीएलपी-1)’ हार्मोन की नकल करती हैं, जो भूख और तृप्ति की भावना को काबू में रखने में मदद करता है।
जीएलपी-1 आधारित दवाएं भोजन के पेट से बाहर निकलने की गति को धीमा करती हैं और भूख का एहसास जगाने वाले मस्तिष्कीय केंद्रों की क्रिया नियंत्रित करती हैं। इससे पेट जल्दी भरा हुआ महसूस होता है और भूख का एहसास भी लंबे समय तक नहीं जगता। साथ ही व्यक्ति को कुछ चटर-पटर खाने की ललक भी नहीं महसूस होती।
ऐसी दवाओं का भूख का एहसास दबाने वाला प्रभाव काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि जीएलपी-1 आधारित दवाएं लेने वाले लोग 16 से 40 फीसदी कम कैलोरी की खपत करते हैं।
हालांकि, ऐसी दवाओं से भोजन की मात्रा तो घट जाती है, लेकिन कोशिकाओं, मांसपेशियों और अंगों के सुचारु रूप से काम करने के लिए शरीर को तब भी अहम विटामिन, मिनरल और प्रोटीन की जरूरत होती है। अगर सीमित मात्रा में लिए गए भोजन में ये पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में न हों, तो इनकी कमी से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं उभर सकती हैं।
——भरपाई की गुंजाइश कम हो जाती है——
आम तौर पर पूरे हफ्ते अलग-अलग तरह का आहार लेने से शरीर में पोषक तत्वों की कमी की भरपाई होने की संभावना बढ़ जाती है, फिर चाहे व्यक्ति कुछ दिन कम पोषक भोजन ही क्यों न करे। लेकिन जब भोजन की मात्रा घट जाती है, तो इस भरपाई की गुंजाइश भी कम हो जाती है, क्योंकि आहार का चयन बहुत सीमित हो जाता है।
यह कोई नयी समस्या नहीं है। कम कैलोरी वाली पारंपरिक डाइट लेने से शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने की शिकायत हमेशा ही सामने आई है। हालांकि, ऐसी डाइट अक्सर सफल नहीं होती, क्योंकि स्वाद की कमी के कारण लोग ज्यादा समय तक इन पर नहीं टिक पाते और उनमें पोषण संबंधी दीर्घकालिक समस्याएं नहीं उभरतीं। यही नहीं, सामान्य खानपान पर लौटने के साथ ही पोषक तत्वों की कमी भी दूर होने लगती है।
हालांकि, जीएलपी-1 आधारित दवाएं इस “पैटर्न” को बदल देती हैं। अध्ययन दिखाते हैं कि इन दवाओं का सेवन रोकने के कुछ ही दिनों बाद लोगों को वजन तेजी से बढ़ने लगता है, जो एक नयी चुनौती पेश करता है।
——मांसपेशियों में क्षरण, खून की कमी संभव——
अगर कम आहार लेने से किसी व्यक्ति में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है और यह समस्या कई महीनों या वर्षों तक बनी रहती है, तो इससे मांसपेशियों में क्षरण, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता, खून की कमी, हड्डियों के क्षय और तंत्रिका तंत्र संबंधी शिकायतें उभर सकती हैं।
चूंकि, वजन घटाने के लिए जीएलपी-1 आधारित दवाओं के सेवन का चलन हाल-फिलहाल में बढ़ा है, इसलिए इनके पोषण संबंधी परिणामों पर दीर्घकालिक डेटा अभी भी सीमित हैं। यही नहीं, खून की जांच के बिना लोगों के लिए पोषक तत्वों की कमी पहचानना मुश्किल होता है, क्योंकि थकान, कमजोरी या बाल झड़ने जैसे लक्षण अस्पष्ट हो सकते हैं और इन्हें आम तौर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
बहरहाल, चेतावनी संकेत शुरुआत से ही दिखने लगे हैं। एक अध्ययन में ‘जीएलपी-1’ आधारित दवाओं की मदद से वजन घटाने वाले उन लोगों में कुपोषण और गंभीर कुपोषण की उच्च दर पाई गई, जो आर्थोप्लास्टी (जोड़ों के प्रतिस्थापन से जुड़ी सर्जरी) कराने को मजबूर हैं। खून की जांच में इन लोगों में प्रमुख प्रोटीन का स्तर बेहद कम पाया गया, जो समग्र पोषण की कमी का संकेत देता है।
एक अन्य अध्ययन में ‘जीएलपी-1’ आधारित दवाएं लेने वाले लोगों से पूछा गया कि वे क्या खाते हैं। कई प्रतिभागियों ने ऐसी डाइट लेने की बात कही, जिसमें फाइबर, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम और विटामिन ए, सी, डी और ई सहित कई विटामिन पर्याप्त मात्रा में मौजूद नहीं थे। इन लोगों के आहार में फल, सब्जी, अनाज और डेयरी उत्पादों की मात्रा भी कम दर्ज की गई।
——प्रोटीन की कमी खास तौर पर चिंताजनक——
एक और अध्ययन में पाया गया कि वजन घटाने के लिए ‘जीएलपी-1’ आधारित दवाओं का सहारा लेने वाले 13 फीसदी लोगों में छह महीने के भीतर पोषक तत्वों (विटामिन, मिनरल, आयरन, प्रोटीन) की कमी पैदा होने लगती है। एक साल के भीतर ऐसे लोगों की संख्या बढ़कर 22 फीसदी तक पहुंच गई।
प्रोटीन की कमी खास तौर पर चिंता का सबब है, क्योंकि यह मांसपेशियों की मजबूती और उन्हें सक्रिय बनाए रखने के लिए आवश्यक है। वजन घटाने की प्रक्रिया में न सिर्फ चर्बी कम होती है, बल्कि अक्सर मांसपेशियों का भी क्षरण होता है। कम मात्रा में प्रोटीन युक्त आहार मांसपेशियों में क्षरण की दर को बढ़ा सकता है, जिससे चलने-फिरने में दिक्कत, लड़खड़ाने और जोड़ों के घिसने की समस्या उभर सकती है।
——पोषक तत्वों से भरपूर आहार जरूरी——
‘जीएलपी-1’ आधारित दवाएं लेने वाले लोगों को भारी मात्रा में पोषक तत्वों से युक्त आहार को प्राथमिकता देनी चाहिए, जिसमें कैलोरी की उपलब्धता कम हो, लेकिन विटामिन, मिनरल, फाइबर और प्रोटीन उच्च मात्रा में मौजूद हो।
हालांकि, एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि ‘जीएलपी-1’ आधारित दवाएं लेने वालों को पोषण के संबंध में सार्थक सलाह बहुत कम या बिल्कुल नहीं मिलती है। सही मार्गदर्शन के बिना, भूख में भारी कमी आने पर पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
मोटापे से ग्रस्त ज्यादातर लोगों में पोषक तत्वों की कमी की आशंका पहले से ही अधिक होती है, खास तौर पर आयरन और विटामिन बी6 की कमी की। दरअसल, शरीर में जमा चर्बी खाने में मौजूद पोषक तत्वों को सोखने और उनका इस्तेमाल करने की क्षमता को प्रभावित करती है। ऐसे में ‘जीएलपी-1’ आधारित दवाओं का सेवन करने और भोजन की मात्रा घटाने से शरीर में पहले से मौजूद पोषण संबंधी कमियां और भी बढ़ सकती हैं।
——कमी से निपटने के उपाय——
‘जीएलपी-1’ आधारित दवाओं का सेवन करने वाले घर बैठे कम खर्च में पोषण संबंधी लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें भोजन में बीज, मेवे या ‘नट बटर’ शामिल करना चाहिए, क्विनोआ जैसे अनाज का सेवन बढ़ाना चाहिए और सब्जियों व दालों से बना सूप लेना चाहिए, जो पोषक तत्वों की खुराक बढ़ाने में मददगार साबित हो सकते हैं।
पोषक तत्वों से भरपूर कुछ चुनिंदा सामग्रियों को हमेशा अपने किचन में रखना और उनमें से एक या दो को हर भोजन में शामिल करना वास्तव में फर्क ला सकता है।
(द कन्वरसेशन) पारुल दिलीप
दिलीप