(रॉबिन टायलर, यूनिवर्सिटी ऑफ़ वेस्टर्न केप)
केप टाउन, 20 अगस्त (द कन्वरसेशन) दक्षिण अफ्रीका के नि:शुल्क प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई और परीक्षाओं के लिए अफ्रीकी भाषाओं के साथ-साथ अंग्रेजी का भी इस्तेमाल किया जाता है। वर्ष 2025 से पहले बच्चे शुरुआती तीन वर्षों तक अपनी मातृभाषा में पढ़ाई करते थे और चौथी कक्षा (10-11 वर्ष की आयु) में पहुंचने के बाद अंग्रेजी माध्यम में पढ़ते थे। अब उच्च प्राथमिक कक्षाओं में भी धीरे-धीरे द्विभाषी शिक्षा का विस्तार किया जा रहा है।
दक्षिण अफ्रीका की सार्वजनिक प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था में करीब 1.27 करोड़ विद्यार्थी हैं। इनमें से 80 प्रतिशत बच्चे ऐसी भाषा में शिक्षा प्राप्त करते हैं, जो उनकी मातृभाषा नहीं है।
शिक्षा शोधकर्ता रॉबिन टायलर ने बहुभाषी वातावरण में भाषा आधारित शिक्षा पर किए गए अपने हालिया अध्ययन में यह जानने की कोशिश की कि एक से अधिक भाषाओं में पढ़ाने और परीक्षा लेने का कितना प्रभाव पड़ता है तथा इस तरीके को लेकर अभिभावकों की क्या राय है।
केपटाउन के एक स्कूल में द्विभाषी विज्ञान शिक्षा कार्यक्रम पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि बच्चों को उनकी मातृभाषा और अंग्रेजी दोनों में विज्ञान पढ़ाने तथा परीक्षा लेने से केवल अंग्रेजी माध्यम की तुलना में काफी बेहतर परिणाम मिले। साथ ही अभिभावकों ने भी इस व्यवस्था का समर्थन किया।
अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि द्विभाषी कक्षा शिक्षण और मूल्यांकन को बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है और इसके लाभों के बारे में अभिभावकों को जानकारी देना जरूरी है।
दो भाषाओं में परीक्षा से बेहतर परिणाम
यह अध्ययन केपटाउन के बाहरी इलाके खयेलित्शा स्थित एक स्कूल में किया गया। यह नि:शुल्क विद्यालय अच्छी व्यवस्था के कारण दूर-दराज के क्षेत्रों से भी विद्यार्थियों को आकर्षित करता है।
अध्ययन के समय चौथी कक्षा में सभी विषय अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाए जाते थे जिसमें विज्ञान भी शामिल था। हालांकि, प्रधानाचार्य ने अध्ययन के लिए विज्ञान विषय में द्विभाषी शिक्षा पद्धति अपनाने की अनुमति दी।
अध्ययन में चौथी कक्षा के 168 विद्यार्थियों को अंग्रेजी और उनकी मातृभाषा इसिखोसा में तैयार विज्ञान की पाठ्यपुस्तक दी गई। एक ही शिक्षक ने चार कक्षाओं को दोनों भाषाओं में पढ़ाया और विद्यार्थियों ने अपनी अभ्यास पुस्तिकाओं में दोनों भाषाओं का इस्तेमाल किया।
एक कक्षा के विद्यार्थियों ने द्विभाषी परीक्षा दी, जबकि अन्य विद्यार्थियों ने पारंपरिक अंग्रेजी माध्यम वाली परीक्षा दी।
अध्ययन में पाया गया कि द्विभाषी शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चे कक्षा में अधिक सक्रिय रहे। अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने वाले समान आयु के बच्चों की तुलना में उन्होंने चर्चा में अधिक भाग लिया और अभ्यास पुस्तिकाओं में अधिक लिखा।
द्विभाषी परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों में 86 प्रतिशत सफल रहे, जबकि केवल अंग्रेजी में परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों की सफलता दर 51 प्रतिशत रही।
अभिभावकों ने किया समर्थन
परीक्षा के बाद आयोजित प्रतिक्रिया सत्र में विद्यार्थियों के अभिभावकों ने कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि द्विभाषी पाठ्यपुस्तक ने उन्हें बच्चों की पढ़ाई से जुड़ने में मदद की।
अभिभावकों ने बताया कि उनके बच्चे घर पर विज्ञान से जुड़ी बातें साझा करते थे और आसपास की दुनिया को स्कूल में सीखी अवधारणाओं से जोड़ते थे।
एक अभिभावक ने कहा, “मेरा बच्चा घर लौटने के बाद हमारे आसपास होने वाली चीजों में ज्यादा रुचि लेने लगा।”
एक अन्य अभिभावक ने कहा कि अपनी भाषा में पढ़ाई होने से वे बच्चों के स्कूल कार्य में ज्यादा मदद कर पा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “कई बार माता-पिता खाना बनाने में व्यस्त होते हैं, लेकिन जब बच्चा कोई सवाल पूछता है तो आप उसका जवाब दे सकते हैं, भले ही आपने वह सवाल पहले न देखा हो।”
एक अन्य अभिभावक ने कहा, “मैंने खुद किताब के पन्ने पढ़े और मुझे बच्चे से पूछने की जरूरत नहीं पड़ी कि उसमें क्या लिखा है।”
अभिभावकों ने यह भी कहा कि उनके इलाके में एक से अधिक भाषाओं का इस्तेमाल सामान्य बात है। बच्चे बहुभाषी हैं और जब कोई बात समझ में नहीं आती तो एक-दूसरे के लिए उसका अनुवाद करते हैं। इसलिए स्कूल में अपनाया गया द्विभाषी मॉडल घर में इस्तेमाल होने वाली भाषा व्यवस्था के अधिक करीब था।
एक अभिभावक ने कहा कि इस मजबूत शुरुआत के कारण उन्हें उम्मीद है कि उनका बच्चा आगे चलकर विज्ञान को करियर के रूप में चुनेगा। अभिभावकों ने यह भी जानना चाहा कि क्या मातृभाषा आधारित द्विभाषी शिक्षा को पूरे देश और सभी कक्षाओं में लागू किया जाएगा।
किसी भी अभिभावक ने यह चिंता नहीं जताई कि इससे बच्चों की अंग्रेजी सीखने की क्षमता प्रभावित होगी।
कक्षा में भाषा को लेकर बहस
यह बात महत्वपूर्ण है क्योंकि समाज में अंग्रेजी के प्रभुत्व के कारण यह धारणा बनी हुई है कि बच्चों को जितनी जल्दी केवल अंग्रेजी में पढ़ाया जाएगा, वे उच्च शिक्षा और रोजगार के लिए उतने ही बेहतर तैयार होंगे।
शिक्षक बताते हैं कि अभिभावकों की ओर से अक्सर अंग्रेजी से किसी अफ्रीकी भाषा में बदलाव न करने का दबाव महसूस किया जाता है।
हालांकि, शोध से पता चलता है कि केवल अंग्रेजी में शिक्षा देने की व्यवस्था दक्षिण अफ्रीकी बच्चों की कम उपलब्धियों का एक कारण है, खासकर गणित और विज्ञान जैसे विषयों में।
जब अभिभावकों से शिक्षा में भाषा को लेकर उनकी राय पूछी गई तो अक्सर उनके सामने केवल दो विकल्प रखे गए-या तो पूरी तरह अंग्रेजी माध्यम या पूरी तरह अफ्रीकी भाषा माध्यम।
इसके अलावा, अभिभावकों को अंग्रेजी और अफ्रीकी भाषा के मजबूत द्विभाषी शिक्षा मॉडल का अनुभव बहुत कम मिला है। कई अश्वेत दक्षिण अफ्रीकियों के लिए मातृभाषा में शिक्षा का संबंध अभी भी रंगभेद शासन के दौरान लागू की गई “बंटू शिक्षा” व्यवस्था से जुड़ा है, जो 1953 से 1979 तक अश्वेत बच्चों के लिए बनाई गई थी।
द्विभाषी कार्यक्रम हो सकते हैं सफल
द्विभाषी विज्ञान शिक्षा अध्ययन से पता चलता है कि यदि द्विभाषी कार्यक्रम के लिए पर्याप्त शिक्षण सामग्री, मूल्यांकन व्यवस्था और दोनों भाषाओं में अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाए तो इसके अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।
इसके अलावा, जब अभिभावकों को द्विभाषी शिक्षा के बारे में सही जानकारी दी जाती है तो वे इसका समर्थन करते हैं। वे समझते हैं कि बच्चों की पढ़ाई में पूरी भागीदारी स्कूल और जीवन दोनों के लिए सकारात्मक प्रभाव डालती है।
(द कन्वरसेशन) शोभना नरेश
नरेश