( मैडलीन स्प्रैजसर एवं अलाइसा बैकमेन, सीक्यू यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया )
मेलबर्न, 28 मई (द कन्वरसेशन) चाहे आप रोज दफ्तर आने-जाने के लिए गाड़ी चला रहे हों या समुद्र किनारे लंबी यात्रा पर निकले हों, लगातार ‘ड्राइविंग’ शरीर और दिमाग दोनों को थका सकता है।
ऐसा इसलिए क्योंकि गाड़ी चलाना एक बेहद जटिल काम है, जिसमें दिमाग के कई हिस्सों को एक साथ काम करना पड़ता है। इनमें योजना बनाना, सतर्क रहना और आसपास की चीजों को समझना शामिल हैं।
लेकिन जब आप थक जाते हैं, तो दिमाग के ये हिस्से पहले की तरह प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाते। यही वजह है कि चालक की थकान को सड़क सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना जाता है।
हालिया शोध बताते हैं कि ऑस्ट्रेलिया की सड़कों पर हुए हादसों में से 20 से 30 प्रतिशत उनींदे होकर गाड़ी चलाना एक प्रमुख कारण रहा। इसका असर हर उम्र और अनुभव वाले चालकों पर पड़ सकता है।
ड्राइविंग के दौरान दिमाग कैसे काम करता है-
ड्राइविंग एक ऐसा कार्य है जिसमें ध्यान, सतर्कता, चीजों को पहचानने की क्षमता, शरीर की गतिविधियों पर नियंत्रण और तेज निर्णय लेने जैसी कई मानसिक प्रक्रियाएं एक साथ सक्रिय रहती हैं।
एक शोध विश्लेषण में पाया गया कि गाड़ी चलाने के दौरान दिमाग के बहुत से खास हिस्से सक्रिय हो जाते हैं।
इनमें ‘सेरिबेलम’ और ‘प्रीमोटर कॉर्टेक्स’ शामिल हैं, जो शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित और समन्वित करने में मदद करते हैं। इसके अलावा ‘एक्स्ट्रास्ट्रिएट कॉर्टेक्स’ आसपास के दृश्य संकेतों को समझने का काम करता है। वहीं ‘थैलेमस’ दिमाग को सतर्क बनाए रखने और इंद्रियों से मिलने वाले संकेतों को शारीरिक गतिविधियों में बदलने में मदद करता है।
थकान में ड्राइविंग क्यों खतरनाक-
शोध बताते हैं कि थकान की हालत में गाड़ी चलाना कई बार शराब पीकर ड्राइविंग करने जितना खतरनाक हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया में हुए सड़क हादसों में से करीब 20 प्रतिशत मौतें चालक की थकान से जुड़ी होती हैं।
थकान ऐसी शारीरिक अवस्था है, जिसमें दिमाग और शरीर दोनों की कार्यक्षमता प्रभावित हो जाती है। इसका असर ध्यान केंद्रित करने, सही फैसला लेने और आसपास की स्थिति पर तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता पर पड़ता है। सुरक्षित ड्राइविंग के लिए ये सभी चीजें बेहद जरूरी हैं।
हालांकि, सबसे बड़ा खतरा ‘झपकी’ आ जाने के कारण होता है।
अगर कोई व्यक्ति 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ी चला रहा हो और उसे सिर्फ तीन सेकंड झपकी आ जाए, तो उसकी गाड़ी बिना नियंत्रण के 80 मीटर से ज्यादा दूरी तय कर सकती है। ऐसे में वाहन सड़क से उतर सकता है या किसी अन्य वाहन अथवा पैदल यात्री से टकरा सकता है।
लगातार ड्राइविंग दिमाग पर डालती है दबाव
अक्सर लोगों को लगता है कि ड्राइविंग एक दिनचर्या का हिस्सा और लगभग अपने आप होने वाला है, लेकिन वास्तव में इसमें लगातार ध्यान बनाए रखना पड़ता है।
ईमेल का जवाब देने, मशीन चलाने या सामान्य दफ्तर के काम की तुलना में ड्राइविंग कहीं ज्यादा मानसिक ऊर्जा खपत वाली होती है। कुछ शोधों में यह भी पाया गया है कि सिर्फ 60 मिनट की लगातार ड्राइविंग के बाद थकान महसूस होने लगती है।
जितनी ज्यादा देर तक आप लगातार गाड़ी चलाते हैं, उतनी ही अधिक आशंका है कि आप गलत फैसला लें या झपकी आ जाए।
यह खतरा रात में या सीधी सपाट वीरान सड़कों पर और बढ़ जाता है। कई बार व्यक्ति खुद को थका हुआ महसूस नहीं करता, लेकिन उसका दिमाग पूरी तरह सतर्क नहीं होता।
इसी वजह से विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लंबी यात्रा को दो-दो घंटे के हिस्सों में बांटना चाहिए। इससे बिना रुके लंबे समय तक ड्राइविंग करने से बचा जा सकता है और थकान कम होती है।
किन वजहों से बढ़ सकती है थकान
ड्राइविंग के दौरान कई दूसरी चीजें भी थकान बढ़ा सकती हैं। इनमें सबसे अहम है कम नींद लेना। शोध बताते हैं कि यदि किसी व्यक्ति ने पांच घंटे से कम नींद ली हो, तो सड़क हादसे का खतरा दोगुना हो सकता है।
इसके अलावा 17 घंटे से ज्यादा समय तक लगातार जागते रहना भी चालक की थकान का बड़ा कारण माना जाता है।
जब आप उन घंटों में गाड़ी चलाते हैं, जिनमें आपका शरीर स्वाभाविक रूप से आराम और नींद की अवस्था में जाने का आदी होता है तो शरीर का ‘बॉडी क्लॉक’ असंतुलित होने लगती है। ऐसे में ड्राइविंग के दौरान अचानक नींद आने या झपकी लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
शोध यह भी बताते हैं कि तनाव, नवजात बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी, पर्याप्त पानी न पीना और अस्वस्थ खानपान भी चालक की थकान बढ़ा सकते हैं।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि अनुभवी चालक होना आपको थकान से पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनाता। कई अनुभवी चालक जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास में सड़क पर अधिक जोखिम उठाने लगते हैं।
ड्राइविंग के दौरान सतर्क कैसे रहें
विशेषज्ञों के अनुसार, वाहन चलाने से पहले पर्याप्त नींद लेना सबसे जरूरी है। सामान्य रूप से वयस्कों को हर रात सात से नौ घंटे की नींद की जरूरत होती है, लेकिन सुरक्षित ड्राइविंग के लिए कम से कम पांच घंटे की नींद लेना बेहद जरूरी माना जाता है।
शोधों में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है कि गाड़ी का शीशा खोल देना या तेज संगीत सुनना वास्तव में थकान दूर करता है।
लंबी यात्रा के दौरान नियमित अंतराल पर आराम करना और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना ज्यादा प्रभावी तरीका माना जाता है।
अगर आपको बहुत ज्यादा थकान महसूस हो रही हो, तो पहले थोड़ी देर सो लेना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर ड्राइविंग किसी दूसरे व्यक्ति के साथ बांट लें या यात्रा को कुछ समय के लिए टाल दें।
द कन्वरसेशन खारी रंजन
रंजन