प्राचीन भारत में जड़ें रखने वाला योग आज सचमुच वैश्विक बन चुका है: गुतारेस

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प्राचीन भारत में जड़ें रखने वाला योग आज सचमुच वैश्विक बन चुका है: गुतारेस

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  • Publish Date - June 19, 2026 / 01:25 PM IST,
    Updated On - June 19, 2026 / 01:25 PM IST

(योषिता सिंह )

संयुक्त राष्ट्र, 19 जून (भाषा) संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कहा कि प्राचीन भारत में गहरी जड़ें रखने वाला योग आज वास्तव में एक वैश्विक अभ्यास बन चुका है, जो सभी आस्थाओं और संस्कृतियों के लाखों लोगों को शांति, शक्ति और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने में मदद कर रहा है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने बृहस्पतिवार को विश्व संस्था के मुख्यालय में 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया। इस वर्ष का विषय ‘बढ़ती उम्र में योग से रहें निरोग’ है।

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के उत्तरी लॉन में महात्मा गांधी की प्रतिमा के निकट योग दिवस समारोह आयोजित किया गया। इसमें योग साधकों, राजनयिकों, संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों, विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों ने भाग लिया।

मंच पर भारत के 2028-29 कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी से संबंधित ‘बैनर’ भी प्रदर्शित किया गया।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अपने संदेश में गुतारेस ने कहा, ‘‘हम एक ऐसी प्राचीन परंपरा का उत्सव मनाने के लिए एकत्र हुए हैं जो संतुलन, समग्रता और अपने शरीर तथा दुनिया के साथ शांतिपूर्ण जुड़ाव पर जोर देती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘प्राचीन भारत में गहरी जड़ें रखने वाला योग आज सचमुच सार्वभौमिक बन चुका है और सभी आस्थाओं तथा संस्कृतियों के लाखों लोगों को शांति पाने, शक्ति अर्जित करने और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने में सहायता कर रहा है।’’

इस वर्ष की थीम ‘बढ़ती उम्र में योग से रहें निरोग’ का उल्लेख करते हुए गुतारेस ने कहा कि यह दुनिया भर में बढ़ती उम्र की आबादी के बीच शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, गतिशीलता तथा गरिमा के महत्व को रेखांकित करती है।

उन्होंने कहा, ‘‘योग हमें अपने प्रति, पृथ्वी के प्रति और एक-दूसरे के प्रति सजगता, सम्मान और देखभाल का भाव सिखाता है। इस अंतरराष्ट्रीय दिवस पर आइए हम अपने मानव परिवार के बुजुर्ग सदस्यों के प्रति भी यही संवेदनशीलता दिखाएं और ऐसा विश्व बनाएं, जहां हर पीढ़ी स्वस्थ जीवन जी सके।’’ उन्होंने अपना संदेश ‘नमस्ते’ के साथ समाप्त किया।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पार्वथनेनी ने कहा कि जब 12 वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का विचार रखा था, तब उनकी परिकल्पना थी कि योग विश्व के हर कोने तक पहुंचे और व्यक्तिगत अभ्यास से आगे बढ़कर एक जन-आंदोलन बने, जो स्वस्थ जीवन, कल्याण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दे।

पार्वथनेनी ने कहा कि योग का सबसे सरल आसन ‘नमस्ते’ है, जो ‘‘मन और शरीर, मानव और प्रकृति की एकता’’ का प्रतीक है।

समारोह को संबोधित करते हुए 81 वर्षीय योगमाता केइको आइकावा ने कहा कि ‘‘योग ने मेरा जीवन बदल दिया।’’

पिछले 60 वर्षों से योग का अभ्यास कर रहीं आइकावा ने कहा कि वास्तविक स्वास्थ्य केवल बीमारी का अभाव नहीं है और दीर्घायु का अर्थ केवल लंबा जीवन जीना नहीं, बल्कि उद्देश्य, कृतज्ञता, प्रेम और ऊर्जा के साथ जीवन जीना है।

उन्होंने कहा कि संघर्ष, विभाजन, अकेलेपन, पर्यावरणीय चुनौतियों और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से जूझ रही दुनिया में भी शांति कोई असंभव सपना नहीं है।

इस अवसर पर ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रशिक्षकों ने योगासन, श्वास अभ्यास और ध्यान सत्र का संचालन किया, जिसमें उपस्थित लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 2014 में योग की वैश्विक लोकप्रियता को मान्यता देते हुए 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस संबंधी संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव का मसौदा भारत ने पेश किया था, जिसे रिकॉर्ड 175 सदस्य देशों का समर्थन प्राप्त हुआ था।

प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र के उद्घाटन के दौरान पहली बार यह प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा था, ‘‘योग हमारी प्राचीन परंपरा की अमूल्य देन है।’’

भाषा मनीषा निहारिका

निहारिका