Wedding Cost Survey: शादियों में केवल खाना खाने आते हैं 65% मेहमान, व्यतीत करते हैं सिर्फ 20 सेंकेंड, इतना भोजन होता है बर्बाद, सर्वे में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Wedding News: Weddingwire Survey of Indian Marriage

Wedding Cost Survey: शादियों में केवल खाना खाने आते हैं 65% मेहमान, व्यतीत करते हैं सिर्फ 20 सेंकेंड, इतना भोजन होता है बर्बाद, सर्वे में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Wedding Cost Survey. Image Source- IBC24 Archive

Modified Date: February 4, 2026 / 12:03 am IST
Published Date: February 3, 2026 11:20 pm IST

नई दिल्लीः Wedding Cost Survey: शादी जीवन का सबसे पवित्र और आनंददायक संस्कार मानी जाती है, लेकिन आज के दौर में यह संस्कार धीरे-धीरे दिखावे और प्रतिस्पर्धा का मंच बनता जा रहा है। शादी अब दो परिवारों के मिलन का उत्सव नहीं, बल्कि यह साबित करने का जरिया बन गई है कि किसके पास कितना पैसा है और कौन कितना भव्य आयोजन कर सकता है? इस बीच अब शादियों को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

वेडिंग वायर के Newlyweds सर्वें के अनुसार भारतीय शादियों में औसतन 330 मेहमान आते हैं और एक शादी का कुल खर्च लगभग 29 लाख 60 हजार रुपये तक होता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस भारी-भरकम खर्च के बाद भी हर मेहमान के पास आपके लिए औसतन सिर्फ 20 सेकंड होते हैं। यानी मेहमान सिर्फ सेंकेंड आपके पास रहते हैं।

इन 20 सेकंड में क्या देखते हैं मेहमान?

वेडिंग वायर के एक सर्वे के अनुसार 65% मेहमान केवल खाने पर ध्यान देते हैं। 60% मेहमान शादी को फैशन शो की तरह लेते हैं, जहां वे अपने कपड़े दिखाने आते हैं। और 55% लोग सिर्फ सामाजिक औपचारिकता निभाने पहुंचते हैं। इस डर से कि अगर वे नहीं गए, तो सामने वाला भी उनकी शादी में नहीं आएगा। यानि लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद, शादी का अनुभव ज़्यादातर मेहमानों के लिए या तो प्लेट तक सीमित रहता है या कपड़ों तक।

बर्बाद हो जाता है 20 प्रतिशत खाना

Wedding Cost Survey: सबसे चिंताजनक पहलू भोजन की बर्बादी है। यूनिवर्सिटी ऑफ बेंगलुरु द्वारा हाल ही में 75 शादियों पर किए गए सर्वे में सामने आया कि करीब 20% खाना सीधे कचरे में चला जाता है। बुफे सिस्टम में खाना भूख के अनुसार नहीं, बल्कि दिखावे के अनुसार लिया जाता है। विडंबना यह है कि इस दिखावे की होड़ में एक औसत भारतीय परिवार अपनी सालाना आय से लगभग 6 गुना अधिक खर्च शादी पर कर देता है। नतीजा शादी के बाद जहां नए जीवन की शुरुआत सुकून से होनी चाहिए, वहां कर्ज, तनाव और आर्थिक असुरक्षा साथ चलने लगती है।

देखें ये वीडियो

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Sanjay Arora (@sanjayarora)

इन्हें भी पढ़े:-

 


लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।