बिहार: दीपावली के बाद सात शहरों में वायु गुणवत्ता ‘खराब’

बिहार: दीपावली के बाद सात शहरों में वायु गुणवत्ता ‘खराब’

बिहार: दीपावली के बाद सात शहरों में वायु गुणवत्ता ‘खराब’
Modified Date: October 21, 2025 / 08:39 pm IST
Published Date: October 21, 2025 8:39 pm IST

पटना, 21 अक्टूबर (भाषा) बिहार की राजधानी पटना सहित छह अन्य शहरों की वायु गुणवत्ता दीपावली के एक दिन बाद मंगलवार को ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 21 अक्टूबर के दैनिक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एएक्यूआई) बुलेटिन के अनुसार, बिहार में सबसे खराब स्थिति हाजीपुर की रही, जहां एएक्यूआई 291 दर्ज किया गया।

राज्य के जिन अन्य छह शहरों की वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में रही, उनमें सहरसा (273), समस्तीपुर (236), पटना (226), अररिया (222), पूर्णिया (211) और बेगूसराय (203) शामिल हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ‘खराब’ वायु गुणवत्ता के लंबे समय तक संपर्क में रहने पर अधिकांश लोगों को सांस लेने में तकलीफ शुरू हो सकती है।

बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (बीएसपीसीबी) के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार शुक्ला ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया, ‘‘यह सही है कि कुछ शहरों में वायु गुणवत्ता में गिरावट आई है लेकिन स्थिति असामान्य नहीं है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार स्थिति बेहतर है। पिछले साल दीपावली के अगले दिन पटना में एएक्यूआई 230 था, जबकि उस समय बिहार में सभी प्रकार के पटाखों की बिक्री और आतिशबाजी पर प्रतिबंध था। इसलिए स्थिति चिंताजनक नहीं है।’’

उन्होंने दावा किया कि वायु प्रदूषण पर नियंत्रण से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू किया गया।

शुक्ला ने बताया कि राज्य की राजधानी में कुछ क्षेत्रों में दीपावली की रात ध्वनि प्रदूषण का स्तर सामान्य सीमा से अधिक पाया गया।

उन्होंने बताया, ‘‘बोर्ड ने दीपावली के दिन मीठापुर, रेलवे कार्यालय दानापुर, राजकीय महिला महाविद्यालय (गुलजारबाग) और प्रखंड कार्यालय, भूतनाथ रोड (कंकड़बाग) में ध्वनि प्रदूषण की निगरानी की। इन स्थानों पर शोर का स्तर सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहा।’’

अधिकारी ने बताया, ‘‘शांत क्षेत्र में रात के समय 40 डेसिबल (डीबी) की अनुशंसित सीमा के मुकाबले शोर स्तर 67.3 डीबी दर्ज किया गया, जबकि आवासीय क्षेत्रों में यह 45 डीबी की सीमा के मुकाबले 68.1 डीबी पाया गया।’’

विशेषज्ञों ने बताया कि कुछ शहरों में वायु गुणवत्ता के ‘खराब’ स्तर पर पहुंचने का मुख्य कारण हवा की गति का कम होना रहा।

भाषा कैलाश जितेंद्र

जितेंद्र


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