बिहार चुनाव: राघोपुर पर टिकी सभी की निगाहें, दे सकता है अगला मुख्यमंत्री

बिहार चुनाव: राघोपुर पर टिकी सभी की निगाहें, दे सकता है अगला मुख्यमंत्री

बिहार चुनाव: राघोपुर पर टिकी सभी की निगाहें, दे सकता है अगला मुख्यमंत्री
Modified Date: October 26, 2025 / 03:49 pm IST
Published Date: October 26, 2025 3:49 pm IST

(नचिकेता नारायण)

राघोपुर (बिहार), 26 अक्टूबर (भाषा) राघोपुर विधानसभा क्षेत्र में माहौल उत्सुकता से भरा हुआ है, जहां 3.4 लाख से अधिक मतदाता इस बात से बखूबी वाकिफ हैं कि वे जिस उम्मीदवार को चुनेंगे, वह राज्य का अगला मुख्यमंत्री भी हो सकता है।

यह निर्वाचन क्षेत्र वैशाली जिले का हिस्सा है और इसे पूर्व में भी दो मुख्यमंत्रियों — लालू प्रसाद (1995) और राबड़ी देवी (2000) — को चुनने का गौरव प्राप्त है।

उनके पुत्र और राजनीतिक उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव ने 2015 में 25 वर्ष की उम्र में यहीं से चुनावी पारी की शुरुआत की थी। वह महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं।

महागठबंधन का नेतृत्व राजद के पास है और इसमें कांग्रेस, वाम दल और विकासशील इंसान पार्टी भी शामिल है, जो ‘निषाद’ समुदाय के वोटों पर मजबूत पकड़ रखती है।

तेजस्वी इस सीट से लगातार तीसरी बार जीत का लक्ष्य लेकर चुनावी मैदान में हैं। नामांकन दाखिल करने के बाद उन्होंने मतदाताओं से कहा था, “यह सामान्य चुनाव नहीं है। यह बिहार को बदलने का अवसर है।” हाल में उन्होंने कई बड़े वादे किए हैं।

राघोपुर में यादव समुदाय की संख्या सर्वाधिक है और अब तक यहां कोई भी उम्मीदवार इस समुदाय के समर्थन के बिना नहीं जीत सका है।

वर्तमान में विपक्ष के नेता तेजस्वी का कद बढ़ने से यह समुदाय अपना राजनीतिक वर्चस्व फिर से हासिल करना चाहता है, जो कभी राजद के शासनकाल में हुआ करता था।

एक युवा मतदाता ने कहा, “नीतीश कुमार के 20 साल के शासन में यादवों के साथ सौतेला व्यवहार हुआ है। भाजपा भी इस खेल का हिस्सा रही है, क्योंकि वह यादवों के दबदबे का डर दिखाकर समाज के शेष सभी वर्गों के लोगों, अगड़ी जातियों से लेकर दलितों तक, को एकजुट करने की कोशिश कर रही है।’’

हालांकि, तेजस्वी के मुख्य प्रतिद्वंद्वी एवं भाजपा उम्मीदवार सतीश कुमार — जिन्होंने 2010 में राबड़ी देवी को हराया था — फिर से इतिहास दोहराने के दावे के साथ चुनाव मैदान में हैं।

सतीश कुमार (59) का कहना है, “लंबे समय से राघोपुर को ‘वीआईपी’ सीट कहा जाता है, लेकिन इससे यहां के लोगों को मिला क्या? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में पास के राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण से पहले यहां से हाजीपुर तक पहुंचने में छह-सात घंटे लग जाते थे।”

उन्होंने कहा, ‘‘तेजस्वी यादव दो बार उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं। हालांकि दोनों कार्यकाल छोटे थे, लेकिन क्या वह अपने निर्वाचन क्षेत्र के लिए एक डिग्री कॉलेज और एक रेफरल अस्पताल मंज़ूर नहीं करवा सकते थे? अगर उनमें इतनी भी राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं है, तो पूरे राज्य में स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को बदलने के उनके दावों पर आसानी से विश्वास नहीं किया जा सकता।’’

कुमार का मानना है कि 2020 में तेजस्वी से 38,000 से अधिक वोटों से उनकी ‘‘हार का मुख्य कारण राजग में बिखराव था।’’

चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने अपने बूते वह चुनाव लड़ा था और पार्टी के उम्मीदवार को करीब 30,000 वोट मिले थे। वर्तमान में हाजीपुर के सांसद चिराग, राजग के साथ मजबूती से खड़े हैं।

वहीं, जन सुराज पार्टी ने चंचल सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि पार्टी संस्थापक प्रशांत किशोर ने पहले तेजस्वी को चुनौती देने की बात कही थी, लेकिन खुद चुनाव मैदान में उतरने से परहेज किया।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल सीट से कुल 13 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें तेज प्रताप यादव के करीबी प्रे​म कुमार भी शामिल हैं, जिन्होंने परिवार से अलग होकर जनशक्ति जनता दल बनाया है और पड़ोस की महुआ सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

वहीं, राघोपुर में तेजस्वी और भाजपा के सतीश कुमार के बीच सीधी टक्कर होने की संभावना है।

भाषा

कैलाश

रंजन सुभाष

सुभाष


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