पटना, 11 जुलाई (भाषा) उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि बिहार ने न केवल देश के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि आपातकाल के दौरान ‘‘दूसरे स्वतंत्रता आंदोलन’’ का भी आगे बढ़कर नेतृत्व किया।
गयाजी जिले में बिहार के विधायकों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने जनप्रतिनिधियों से लोगों के कल्याण के लिए काम करने का आग्रह किया।
राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘बिहार ने न केवल देश के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि आपातकाल के दौरान दूसरे स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व करने में भी अग्रणी भूमिका निभाई।’’
उपराष्ट्रपति ने आपातकाल के दौरान प्रसिद्ध जेपी आंदोलन में कॉलेज छात्र के रूप में अपनी भागीदारी को याद किया। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने उनकी राजनीतिक यात्रा को गहराई से प्रभावित किया।
भारत में 25 जून, 1975 से 21 मार्च, 1977 तक संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल लागू रहा था।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि बिहार ने राजेंद्र प्रसाद सिंह से लेकर जयप्रकाश नारायण और कर्पूरी ठाकुर तक कई महान विभूतियां दी हैं, जिन्होंने गरीबों की बेहतरी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘चुनाव भले ही राजनीतिक दलों की विचारधारा के आधार पर लड़े जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद लोगों और विकास के लिए मिलकर काम करना हमारी जिम्मेदारी है। सदन में विचार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन संविधान हम सभी का साझा मार्गदर्शक होना चाहिए।’’
राधाकृष्णन ने विधायी कार्यवाही को मजबूत बनाने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी डिजिटल युग में रह रहे हैं। लंबे वर्षों का अनुभव रखने वाले विधायकों को भी विधायी कार्यवाही को मजबूत बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित उभरती प्रौद्योगिकियों की जानकारी रखनी चाहिए।’’
भाषा गोला नेत्रपाल
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