पटना, 26 मई (भाषा) बिहार की 75 सदस्यीय राज्य विधान परिषद की नौ सीट पर अगले महीने होने वाले चुनाव के लिए सियासी सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इनमें से सात सीट फिलहाल सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास हैं।
विधान परिषद के नौ सदस्यों का कार्यकाल 28 जून को समाप्त होगा, जिससे पहले ये द्विवार्षिक चुनाव होने हैं।
निर्वाचन आयोग (ईसी) ने मंगलवार को बिहार विधान परिषद की नौ सीट पर होने वाले द्विवार्षिक चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की।
इन नौ सीट में वह सीट भी शामिल है जो पिछले वर्ष नवंबर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। चौधरी ने नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में तारापुर से जीत हासिल की थी।
इसके अलावा, सम्राट चौधरी के पूर्ववर्ती और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार द्वारा मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद खाली हुई सीट पर भी 18 जून को उपचुनाव होगा।
निर्वाचन आयोग के अनुसार इन नौ सीट के लिए 18 जून को मतदान होगा। मतगणना भी उसी दिन शाम के समय होगी और चुनाव प्रक्रिया 20 जून तक पूरी कर ली जाएगी।
गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास इस नौ सीट में अभी केवल दो सीटें हैं, इस बार वह विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में अधिक हिस्सेदारी की मांग कर सकती है।
विधानसभा में उसके 89 विधायक हैं। इनमें एक सीट सम्राट चौधरी के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद रिक्त हुई थी, जबकि दूसरी सीट से पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक संजय प्रकाश उर्फ संजय मयूख सदस्य हैं, जिन्हें कम चर्चित लेकिन प्रभावशाली नेता माना जाता है।
कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि संजय मयूख को विधान परिषद में लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए मौका नहीं मिलता है, तो उन्हें बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में उतारा जा सकता है। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद रिक्त हुई है।
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता राजेश राठौर ने कहा, ‘‘हमें पूरा विश्वास है कि इंडिया गठबंधन एक सीट जरूर जीतेगा। यदि हम बेहतर तालमेल बना पाए, तो दूसरी सीट भी जीत सकते हैं। लेकिन पिछले वर्ष हुए राज्यसभा चुनाव जैसी गलती दोहराने के लिए हम तैयार नहीं हैं।’’
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुए चुनाव में राजग ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी। उस दौरान कांग्रेस के दो और राजद के एक विधायक मतदान के दिन अनुपस्थित रहे थे।
हालांकि राठौर ने कहा, ‘‘इस बार ऐसी कोई बाधा नहीं आएगी। राज्यसभा चुनाव में हमारे जिन विधायकों ने इंडिया गठबंधन के पक्ष में मतदान नहीं किया था, उन्होंने राजग का भी समर्थन नहीं किया था।’’
उन्होंने यह विश्वास भी जताया कि हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम के पांच विधायक और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के एक विधायक अगले महीने इंडिया गठबंधन का समर्थन करेंगे, जैसा उन्होंने राज्यसभा चुनाव में किया था।
विधान परिषद की जिन सीट पर चुनाव होना है, उनमें से दो सीटें राजद के पास हैं। पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद के करीबी माने जाने वाले राजद के विधान परिषद सदस्य सुनील कुमार सिंह वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के कारण अयोग्य घोषित कर दिए गए थे। हालांकि, उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद पिछले वर्ष उनकी सदस्यता बहाल कर दी गई थी।
कांग्रेस के पास एक सीट है। पार्टी के विधान परिषद सदस्य समीर कुमार सिंह को वर्ष 2020 के द्विवार्षिक चुनाव में अंतिम समय में उम्मीदवार बनाया गया था, क्योंकि पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार तारिक अनवर राज्य की मतदाता सूची में नाम दर्ज नहीं होने के कारण चुनाव लड़ने के लिए पात्र नहीं थे।
इस बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सामने छोटे सहयोगी दलों को संतुष्ट रखने की चुनौती बनी हुई है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा है कि उनकी चार विधायकों वाली पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) को एक और सीट मिलने से ‘‘राजग और मजबूत होगा।’’
मांझी के पुत्र संतोष मांझी विधान परिषद सदस्य और राज्य में मंत्री हैं।
भाजपा नीत राजग से बिना किसी सदन का सदस्य बने मंत्री दीपक प्रकाश को टिकट मिलना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं, जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को भी टिकट मिलने की चर्चा है। दोनों फिलहाल किसी सदन के सदस्य नहीं हैं।
भाषा कैलाश पारुल जोहेब
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