ज्ञान भारतम मिशन में बिहार अव्वल, एक हजार पांडुलिपि सर्वेक्षण पूरे किए
ज्ञान भारतम मिशन में बिहार अव्वल, एक हजार पांडुलिपि सर्वेक्षण पूरे किए
पटना, 26 मई (भाषा) ज्ञान भारतम मिशन के तहत देशभर में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण करने के मामले में बिहार पहले स्थान पर है। देशभर में अब तक हुए कुल 5,500 सर्वेक्षणों में से बिहार ने अकेले 1,000 सर्वेक्षण पूरे कर यह उपलब्धि हासिल की है। राज्य के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
कुमार ने कहा कि बिहार ने अपनी पौराणिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के आधार पर देश में विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और अधिक मजबूत करेगा।
कुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने इस तरह के कार्यों के लिए वर्ष 1950 के दशक में स्थापित दो ऐतिहासिक संस्थानों—काशी प्रसाद जायसवाल शोध संस्थान और वैशाली स्थित प्राकृत जैन शोध संस्थान—को कला एवं संस्कृति विभाग के अधीन लाने के लिए मंत्रिपरिषद की मंजूरी हासिल की थी।
मंत्री ने बताया कि ज्ञान भारतम मिशन को सफल बनाने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में अधिकारियों और विशेषज्ञों की राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया, साथ ही राज्य के सभी 38 जिलों में जिलाधिकारियों के नेतृत्व में जिला स्तरीय समितियां भी बनाई गईं। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप राज्य के सभी जिलों में पंचायत और प्रखंड स्तर तक सर्वेक्षण का कार्य पूरा कर लिया गया है।
सर्वेक्षण कार्य 16 मार्च 2026 को शुरू हुआ था, जो 15 जून 2026 तक पूरा होगा। देशभर में अब तक 85 लाख से अधिक पांडुलिपियों की पहचान की जा चुकी है, जबकि बिहार में आठ लाख से अधिक पांडुलिपियां चिह्नित की गई हैं।
कुमार के मुताबिक, पांडुलिपियों की पहचान के मामले में बिहार देश में पांचवें स्थान पर है और राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश तथा मध्यप्रदेश उससे आगे हैं। हालांकि, उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण की संख्या के मामले में बिहार 1,000 सर्वेक्षणों के साथ देश में शीर्ष पर है।
मंत्री ने बताया सर्वेक्षण के दौरान कई दुर्लभ पांडुलिपियां भी चिह्नित की गई हैं, जिनमें महाबोधि मंदिर में वर्ष 1956 में दलाई लामा की लाई 101 पांडुलिपियां, नवादा, कटिहार और सारण में प्राप्त गुरु ग्रंथ साहिब की अत्यंत प्राचीन हस्तलिखित प्रतियां, बेतिया से मिली राजकुमार शुक्ल की डायरी (जिसमें चंपारण आंदोलन का विस्तृत उल्लेख है) शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि अमर शहीद खुदीराम बोस को फांसी दिए जाने से संबंधित आदेश, बिहार शरीफ से प्राप्त अमीर खुसरो की पांडुलिपि, राजगीर स्थित मायोजी मंदिर में जापानी भाषा की बौद्ध धर्म संबंधी पांडुलिपियां, औरंगाबाद में मिली 1,200 वर्ष पुरानी अरबी भाषा में कुरान शरीफ की प्रति तथा जहांगीर काल की 450 वर्ष पुरानी 1,181 पन्नों वाली पुस्तक तुरफातुल फुकहा सहित अन्य दुर्लभ पांडुलिपियां भी चिह्नित की गई हैं।
ज्ञान भारतम मिशन भारत सरकार की एक राष्ट्रीय पहल है, जिसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई थी। इसका उद्देश्य भारत की प्राचीन पांडुलिपियों, हस्तलिखित ग्रंथों और ज्ञान परंपरा की खोज, संरक्षण तथा उनका डिजिटलीकरण करना है।
भाषा
कैलाश पारुल
पारुल

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