पटना, 24 जून (भाषा) बिहार सरकार ने प्रारंभिक विद्यालयों से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक के शिक्षकों, प्रधान शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों के स्थानांतरण को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और मानवीय बनाने के लिए ‘बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नियमावली, 2026’ बनाने का निर्णय लिया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि नियमावली अधिसूचित होने के बाद शिक्षकों का स्थानांतरण पोर्टल आधारित प्रणाली के माध्यम से निर्धारित नियमों के तहत किया जाएगा।
अधिकारी के अनुसार उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में कुल 46 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
बैठक के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने संवाददाताओं को बताया कि नई व्यवस्था के तहत स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, दिव्यांगता, पति-पत्नी के अलग-अलग पदस्थापन, पारिवारिक परिस्थितियों तथा अन्य मानवीय आधारों को स्थानांतरण में प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षिकाओं को गृह पंचायत से बाहर, लेकिन अपने प्रखंड के भीतर निकटवर्ती पंचायत में पदस्थापन का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को गृह प्रखंड से अलग, जिले के भीतर निकटवर्ती प्रखंड में स्थानांतरण की सुविधा दी जा सकेगी।
चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य शिक्षकों की वास्तविक कठिनाइयों और व्यक्तिगत समस्याओं को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण प्रक्रिया को अधिक संवेदनशील बनाना है तथा जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है, वहां आवश्यकता के अनुसार पदस्थापन कर शिक्षक-छात्र अनुपात में सुधार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों के संतुलित वितरण से विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियां अधिक प्रभावी होंगी और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण वातावरण मिलेगा।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में भी सहायक होगी।
सरकार के अनुसार नई नियमावली का उद्देश्य शिक्षकों के कल्याण, विद्यार्थियों के हित और विद्यालयों की आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करना है। इससे स्थानांतरण प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी, नियमबद्ध और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
अपर मुख्य सचिव के अनुसार मंत्रिमंडल ने राज्य में ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के विकास के लिए एक लाख करोड़ रुपये तथा पर्यटन अवसंरचना के विकास के लिए 5,000 करोड़ रुपये तक की वित्तीय व्यवस्था को भी मंजूरी दे दी।
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना के लिए ‘हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (हुडको) से एक लाख करोड़ रुपये के दीर्घकालिक ऋण का मार्ग प्रशस्त किया गया है तथा इसके लिए राज्य सरकार को हुडको के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने की स्वीकृति दी गई है।
उन्होंने कहा कि इस राशि से टाउनशिप क्षेत्रों में सुनियोजित आधारभूत संरचना और आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि इससे निजी निवेश आकर्षित होगा, रोजगार के अवसर सृजित होंगे तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
चौधरी ने कहा कि मंत्रिमंडल ने बिहार पर्यटन नीति-2023 के तहत पर्यटन आधारभूत संरचना को सुदृढ़ बनाने के लिए बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड को हुडको एवं अन्य वित्तीय संस्थानों से राज्य सरकार की गारंटी पर 5,000 करोड़ रुपये तक का वित्तपोषण प्राप्त करने की भी मंजूरी दी।
उन्होंने कहा कि इस राशि का उपयोग सितारा होटलों, कन्वेंशन सेंटर, मार्गीय सुविधाओं, स्मार्ट शौचालयों, वाई-फाई जोन, वाटर एटीएम, स्मार्ट पार्किंग तथा पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी विकसित करने में किया जाएगा।
चौधरी ने कहा कि मंत्रिमंडल ने बिहार शहरी आयोजना तथा विकास नियमावली, 2014 (यथासंशोधित) में संशोधन को भी मंजूरी दी तथा नए प्रावधान के तहत अब प्रमंडलीय आयुक्त आयोजना क्षेत्र प्राधिकार के पदेन अध्यक्ष तथा जिला पदाधिकारी पदेन उपाध्यक्ष होंगे।
उन्होंने कहा कि इस बदलाव से विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा तथा क्षेत्रीय विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि इससे शहरी विकास परियोजनाओं की निगरानी, योजना निर्माण और क्रियान्वयन में पारदर्शिता तथा दक्षता बढ़ेगी।
चौधरी के अनुसार मंत्रिमंडल ने भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत के मामले की जांच के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग को भी मंजूरी प्रदान की। आयोग की अध्यक्षता पटना उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा करेंगे।
भाषा कैलाश
राजकुमार
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