शराबबंदी वाले बिहार में शराब सेवन ‘रोकना’ जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी: मंत्री विजय चौधरी

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शराबबंदी वाले बिहार में शराब सेवन ‘रोकना’ जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी: मंत्री विजय चौधरी

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  • Publish Date - February 26, 2026 / 07:46 PM IST,
    Updated On - February 26, 2026 / 07:46 PM IST

पटना, 26 फरवरी (भाषा) बिहार के मंत्री विजय चौधरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि शराबबंदी वाले इस राज्य में शराब के सेवन को “रोकना” और “नियंत्रित” करना दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

वह विधानपरिषद में जारी बजट सत्र के दौरान बोल रहे थे।

विधानपरिषद में विपक्षी सदस्यों द्वारा यह आरोप लगाए जाने पर कि इस शुष्क राज्य में शराब व्यापक रूप से उपलब्ध है, चौधरी ने कहा, “यदि राज्य में कहीं भी शराब मिलती है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है और विपक्षी नेताओं को इसके सेवन को रोकने में सहयोग करना चाहिए।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 में “शराब पर पूर्ण प्रतिबंध” का प्रावधान नहीं है, बल्कि इसमें शराब के “उत्पादन और सेवन” को अपराध घोषित किया गया है।

उन्होंने कहा, “कानून में शराब पीना अपराध बताया गया है। इसका अर्थ है कि यह ‘प्रतिबंध कानून’ नहीं है, बल्कि इसका मकसद सेवन को ‘रोकना और नियंत्रित करना’ है।”

मंत्री ने कहा कि जनता के प्रतिनिधि होने के नाते विधानपरिषद के सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है कि वे शराबबंदी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में सरकार का सहयोग करें।

मंत्री के वक्तव्य से पहले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सदस्य सुनील सिंह ने दावा किया था कि बिहार में शराबबंदी कानून सफल नहीं है।

जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के सदस्य नीरज कुमार द्वारा यह आरोप लगाए जाने पर कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले राजद को एक शराब निर्माण कंपनी से चंदा मिला था, सिंह ने पलटवार करते हुए सत्तारूढ़ दल पर भी इसी प्रकार का आरोप लगाया।

सिंह ने आरोप लगाया, “जदयू को एक शराब कारोबारी से पांच वर्षों तक प्रतिमाह 99 लाख रुपये प्राप्त हुए।”

नीतीश कुमार सरकार ने घरेलू हिंसा के बढ़ते मामलों का हवाला देते हुए अप्रैल 2016 में राज्य में शराब की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लगा दिया था।

भाषा कैलाश

राजकुमार

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