फरक्का जल बंटवारा समझौते के नवीनीकरण का जदयू ने विरोध किया

फरक्का जल बंटवारा समझौते के नवीनीकरण का जदयू ने विरोध किया

फरक्का जल बंटवारा समझौते के नवीनीकरण का जदयू ने विरोध किया
Modified Date: September 4, 2026 / 04:12 pm IST
Published Date: September 4, 2026 4:12 pm IST

पटना, चार सितंबर (भाषा) जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने शुक्रवार को गंगा जल संधि पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि वह फरक्का जल बंटवारा समझौते के नवीनीकरण के खिलाफ है, क्योंकि यह बिहार के लोगों के हितों के खिलाफ है।

उल्लेखनीय है कि फरक्का जल बंटवारा संधि भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर, 1996 को हस्ताक्षरित 30 वर्षीय अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसके तहत फरक्का बैराज पर शुष्क मौसम में गंगा के जल बंटवारे को विनियमित किया जाता है।

पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा, ‘‘हमारे नेता नीतीश कुमार हमेशा से इस संधि का विरोध करते रहे हैं। अब जबकि इसका कार्यकाल समाप्त होने वाला है, हमारा स्पष्ट मत है कि इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह बिहार के लोगों के हितों को नुकसान पहुंचाता है।”

उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश इस अंतरराष्ट्रीय संधि का नवीनीकरण होता भी है, तो उसमें बिहार के लोगों की चिंताओं को प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए।

कुशवाहा ने आरोप लगाया कि वर्ष 1996 में लालू प्रसाद के नेतृत्व वाली बिहार सरकार और एच. डी. देवगौड़ा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने यह समझौता करते समय बिहार के लोगों की चिंताओं की अनदेखी की थी।

उन्होंने कहा, “देवगौड़ा सरकार का चरित्र और उन्हें प्रधानमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले लालू प्रसाद का रवैया किसी से छिपा नहीं है।”

जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि वह कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और अन्य पार्टी नेताओं के साथ शनिवार को बक्सर से ‘नीतीश संवाद यात्रा’ शुरू करेंगे। यह यात्रा गंगा के तटवर्ती बिहार के 12 जिलों से होकर गुजरेगी और कटिहार में समाप्त होगी।

उन्होंने कहा, “नीतीश संवाद यात्रा का मार्ग बिहार में गंगा नदी के प्रवाह के समानांतर होगा। हम लोगों से संवाद करेंगे, उनकी समस्याएं जानेंगे और स्थानीय स्थिति का आकलन करेंगे।”

कुशवाहा ने कहा कि फरक्का बैराज के भारतीय हिस्से में गाद (सिल्ट) के अत्यधिक जमाव के कारण अतिरिक्त जल अन्य धाराओं की ओर मोड़ना पड़ता है, जिससे बिहार में बाढ़ और व्यापक तबाही की स्थिति उत्पन्न होती है।

उन्होंने कहा, “बिहार दशकों से बाढ़ की विभीषिका झेलता आया है, लेकिन अब हम राज्य के लोगों की चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

भाषा कैलाश

संतोष

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