पटना, 24 फरवरी (भाषा) बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थानों के आसपास मांस-मछली की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने का संकल्प जताया है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी दुकानें ‘‘भावनाएं आहत” करती हैं और बच्चों में ‘‘हिंसक प्रवृत्तियों’’ को बढ़ावा देती हैं।
शहरी विकास विभाग का भी प्रभार संभाल रहे सिन्हा ने हाल ही में विभाग द्वारा जारी एक परिपत्र के संबंध में पूछे जाने पर यह बयान दिया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता सिन्हा ने कहा, ‘‘हम नया बिहार बना रहे हैं और यह हमारे हर कदम में झलकता है। हाल की विभागीय बैठक में मैंने नियमों के कड़ाई से पालन के निर्देश दिए हैं, जिन्हें स्वच्छता और सामाजिक सौहार्द सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।’’
सिन्हा ने कहा, “हम लोगों के खान-पान की पसंद के अधिकार के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन खुले में, खासकर धार्मिक स्थलों के आसपास ऐसी (मांस) वस्तुओं की बिक्री हमारी भावनाओं की पवित्रता को प्रभावित करती है। इसी प्रकार, बच्चों में हिंसक प्रवृत्तियों को रोकने के लिए इन्हें शैक्षणिक संस्थानों से भी दूर रखा जाना चाहिए।’’
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ये नियम कई वर्षों से लागू हैं।
उन्होंने कहा, “ऐसे स्थानों के आसपास मांस, मछली और पोल्ट्री की दुकानें अवैध रूप से संचालित होती रही हैं। इन नियमों के पीछे के कारणों पर हम टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन हाल में इनके अनुपालन पर विशेष जोर दिया गया है।’’
विभागीय सूत्रों के अनुसार, कुछ सप्ताह पहले उत्तर बिहार के दरभंगा जिले के दौरे के दौरान सड़क किनारे इन वस्तुओं की दुकानों से उठने वाली दुर्गंध से सिन्हा असहज हुए थे।
सूत्रों ने बताया कि इसके बाद जिला प्रशासन को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए और राज्यभर में बिहार नगर निगम कानून के सख्त अनुपालन का आदेश जारी किया गया।
होली पर्व और असम व पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित चुनावों से पहले सिन्हा के इस बयान को राजनीतिक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘स्कूलों और मंदिरों के पास मांस की बिक्री पर रोक के नियम पहले से मौजूद हैं। लेकिन जिस तरीके से विजय सिन्हा ने बयान दिया, उससे स्पष्ट है कि उनका निशाना एक विशेष समुदाय था।’’
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के विधायक अख्तरुल ईमान ने कहा, “ये नियम हमेशा से रहे हैं और इनके अनुपालन पर किसी को आपत्ति नहीं है। लेकिन जिस तरह से और जिस समय बयान दिया गया, उससे उनकी नीयत की पवित्रता पर ही सवाल उठता है।”
ईमान ने कहा कि भाजपा नेताओं को आत्ममंथन करना चाहिए कि दो दशकों से सत्ता में साझेदारी के बावजूद मांस-मछली की अवैध बिक्री की समस्या क्यों बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य कारण शहरों में समुचित बूचड़खानों की कमी है और इन्हें स्थापित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
एआईएमआईएम नेता ने कहा, “बेहद कम मात्रा में मांस-मछली की बिक्री करने वाले दुकानदारों से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वे दूरदराज स्थित बूचड़खानों तक जाएं। उन्हें उपयुक्त स्थान आवंटित किया जाए, इस बात का ध्यान रखते हुए कि वह मंदिर या स्कूल के पास न हो। केवल सुर्खियां बटोरने की राजनीति न की जाए। सामाजिक सौहार्द ऐसे बयानों से अधिक प्रभावित होता है।’’
भाषा कैलाश शफीक
शफीक