पटना, 14 जून (भाषा) असम में भारतीय वायुसेना के एंटोनोव एएन-32 परिवहन विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से जान गंवाने वाले पांच सैन्यकर्मियों में बिहार के जहानाबाद के ‘फ्लाइट लेफ्टिनेंट’ शुभम कुमार और भोजपुर के अग्निवीरवायु दानिश आलम भी शामिल थे। उनके परिजनों के पास अब आखिरी वीडियो कॉल और तस्वीरें ही यादों के रूप में बची हैं।
परिजनों के अनुसार, जहानाबाद जिले के बनवरिया गांव निवासी शुभम कुमार ने शनिवार सुबह करीब नौ बजे अपनी मां से वीडियो कॉल पर बात की थी।
परिवार के एक सदस्य ने बताया कि शुभम खुश नजर आ रहे थे। उन्होंने कहा था कि वह जल्दबाजी में हैं और बाद में विस्तार से बात करेंगे।
शुभम के छोटे भाई सत्यम ने बताया कि परिवार को सुबह करीब 11 बजे विमान दुर्घटना की जानकारी मिली, लेकिन शुरुआत में इस पर विश्वास करना मुश्किल था।
उन्होंने कहा कि जब मोबाइल फोन पर उनसे संपर्क करने के कई प्रयास विफल हो गए और अधिकारियों ने हादसे की पुष्टि की, तब परिवार को सच्चाई का एहसास हुआ।
शुभम के पिता किसान और मां गृहिणी हैं। शुभम कुमार का भारतीय वायुसेना में सेवा देने का सपना 2021 में तब पूरा हुआ, जब उनका चयन ‘फ्लाइंग ऑफिसर’ के रूप में हुआ था।
परिजनों ने बताया कि हाल में उनकी शादी की बातचीत शुरू हुई थी, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इसे टाल दिया था कि फिलहाल करियर और सेवा संबंधी जिम्मेदारियां उनकी प्राथमिकता में हैं।
गांव के लोग उन्हें एक विनम्र युवक के रूप में याद करते हैं, जो छुट्टियों में घर आने पर सभी से आत्मीयता से मिलते थे। ग्रामीण अब उनके पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं।
भोजपुर जिले के कायमनगर गांव में दानिश आलम के परिजन भी उनकी एक तस्वीर को आखिरी याद के रूप में संजोए हुए हैं, जो उन्होंने शनिवार सुबह विमान के भीतर से भेजी थी।
दानिश की मां अख्तरी बेगम ने बताया, ‘‘शुक्रवार शाम हमारी उससे वीडियो कॉल पर बात हुई थी और वह काफी खुश था। शनिवार सुबह उसने विमान के अंदर बैठे हुए अपनी एक तस्वीर भेजी थी। बाद में हम आरा बाजार गए थे और वहीं हमें हादसे की सूचना मिली। इसके बाद हम तुरंत घर लौट आए।’’
दानिश अख्तरी बेगम का इकलौता बेटा था। बेगम की दो बेटियां हैं।
अख्तरी बेगम ने कहा, ‘‘भारतीय वायुसेना में सेवा देना उनके बेटे का सपना था। दानिश ने अपनी पढ़ाई की योजना खुद बनाई और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की।’’
दोस्तों और पड़ोसियों ने उन्हें एक ऐसे युवा के रूप में याद किया, जो अपने परिवार की उम्मीदों का सहारा था।
दानिश के मित्र सुजीत तिवारी ने शोकाकुल परिवार को आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग की।
तिवारी ने कहा, ‘‘दानिश परिवार का सहारा था। उसकी बड़ी बहन की अभी शादी नहीं हुई है, मां अस्वस्थ रहती हैं और परिवार के पास सीमित साधन हैं। उनके पिता प्राइवेट नौकरी करते हैं और करीब 10,000 रुपये मासिक कमाते हैं। हमें उम्मीद है कि सरकार परिवार की मदद करेगी।’’
भाषा
राखी दिलीप
दिलीप