पटना, 12 जून (भाषा) बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की ओर से इस वर्ष आयोजित दो प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्न-पत्र लीक और अन्य अनियमितताओं के लिए नयी तकनीक का इस्तेमाल किए जाने का खुलासा हुआ है और मामले की जांच कर रही आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने अब तक आठ प्राथमिकी दर्ज कर 35 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा संचालन का ठेका पाने वाली कंपनी को कालीसूची में डालने की अनुशंसा की गई है।
ईओयू के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) मानवजीत सिंह ढिल्लो ने आज पुलिस मुख्यालय स्थित सरदार पटेल भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बीपीएससी की सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (एईडीओ) परीक्षा के प्रश्न-पत्र लीक मामले में अब तक आठ प्राथमिकी दर्ज की गई हैं जिनमें से पांच मामले ईओयू ने दर्ज किए हैं।
उन्होंने बताया कि मुंगेर, बांका, लखीसराय और नालंदा से जुड़े मामलों की जांच ईओयू कर रही है तथा अब तक 35 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि इसी वर्ष आयोजित बीपीएससी की एक अन्य प्रतियोगी परीक्षा सहायक अवशिष्ट प्रबंधक एवं लोक स्वास्थ्य पदाधिकारी परीक्षा में भी धांधली के प्रमाण मिले हैं और इस संबंध में पटना के एसके पुरी थाने में एक मामला दर्ज किया गया है, जिसमें दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
ढिल्लो ने कहा कि दोनों परीक्षाओं में नयी तरह की धांधली की गई। इसके तहत बायोमेट्रिक प्रणाली से जुड़ी कंपनी के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से प्रश्न-पत्र लीक कराया गया और चुनिंदा अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचाए गए।
उन्होंने बताया कि जांच में कई स्तरों पर अनियमितताओं के ठोस साक्ष्य मिले हैं। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक डेटा संग्रह के लिए तैनात कुछ कर्मचारी पहले भी परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के आरोपों का सामना कर चुके हैं। उनकी तैनाती भी निर्धारित यादृच्छिकीकरण प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई थी।
डीआईजी ने बताया कि मुंगेर के परीक्षा केंद्रों से बायोमेट्रिक पर्यवेक्षकों को गिरफ्तार किया गया है और जांच में यह भी सामने आया कि कुछ कर्मचारियों ने अपने परिजनों को परीक्षा कार्य में शामिल कराया, जो नियमों के विरुद्ध है।
आरोप है कि परीक्षा से कुछ घंटे पहले प्रश्न-पत्र लीक कर उसके उत्तर तैयार कराए गए और उन्हें चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया।
उन्होंने कहा कि संबंधित कंपनी के पर्यवेक्षकों और अन्य कर्मचारियों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी, जो स्वयं भी प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी थे।
ढिल्लो के अनुसार, परीक्षा संचालन का ठेका पाने वाली जयपुर स्थित ‘मेसर्स साईं एडुकेयर प्राइवेट लिमिटेड’ की भूमिका भी जांच के दायरे में है। ईओयू ने बीपीएससी को इस कंपनी को कालीसूची में डालने की सिफारिश की है।
उन्होंने बताया कि जैमर लगाने वाली एजेंसी के स्तर पर भी गंभीर लापरवाही सामने आई है। कई परीक्षा केंद्रों के कुछ हिस्से जैमर की कवरेज से बाहर थे, जिसका फायदा परीक्षा माफिया ने उठाया।
डीआईजी ने कहा कि नालंदा जिले में कंपनी के एक पर्यवेक्षक चंदन कुमार को बिहारशरीफ के सोहसराय थाना क्षेत्र स्थित प्रयागलाल साहू विद्यालय से गिरफ्तार किया गया था। जांच में पता चला कि उसे पहले भी बायोमेट्रिक प्रक्रिया के उल्लंघन के आरोप में एक परीक्षा केंद्र से निष्कासित किया गया था, लेकिन उसके खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
एक अन्य सवाल के जवाब में ढिल्लो ने बताया कि ईओयू ने आय से अधिक संपत्ति के मामलों में भी कार्रवाई की है। जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनमें सुपौल के जिला अवर निबंधक अपमरेंद्र कुमार, झाझा ग्रामीण कार्य प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार, दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड के बीडीओ चंद्रमोहन पासवान तथा हाजीपुर नगर परिषद कार्यालय के लेखापाल मनीष कुमार शामिल हैं।
भाषा कैलाश खारी
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