नीतीश, चिराग और मांझी हैं दलित वोटों पर निर्भर, पर प्रधान न्यायाधीश पर हमले पर हैं चुप: तनुज पुनिया
नीतीश, चिराग और मांझी हैं दलित वोटों पर निर्भर, पर प्रधान न्यायाधीश पर हमले पर हैं चुप: तनुज पुनिया
पटना, आठ अक्टूबर (भाषा) कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने बुधवार को कहा कि यह हैरान करने वाला है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतन राम मांझी जैसे बिहार के नेता उच्चतम न्यायालय के अंदर प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई पर जूता फेंकने के प्रयास पर चुप हैं।
उन्होंने यहां कांग्रेस की बिहार इकाई के मुख्यालय सदाकत आश्रम में प्रेसवार्ता में कहा,‘‘चिराग और मांझी जैसे नेता दलित वोटों पर निर्भर रहते हैं, लेकिन इस गंभीर मामले पर चुप हैं-यह अकल्पनीय है।”
सोमवार को अदालती कार्यवाही के दौरान 71 वर्षीय एक वकील न्यायमूर्ति गवई पर जूता फेंकने ही वाला था, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोक लिया। गवई देश के दूसरे दलित प्रधान न्यायाधीश हैं।
पुनिया उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से सांसद और कांग्रेस के प्रमुख दलित चेहरों में से एक माने जाते हैं।
उन्होंने कहा,‘‘प्रधान न्यायाधीश के प्रति यह असम्मान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की गहरी जड़ें जमा चुकी जातिवादी सोच को उजागर करता है।’’
पुनिया ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(राजग) और महागठबंधन के बीच होने वाला आगामी बिहार विधानसभा चुनाव ‘‘जूते और कलम’’ के बीच की लड़ाई होगी। उन्होंने ‘कलम’ शब्द का प्रयोग दलित प्रतीक डॉ. भीमराव आंबेडकर के संदर्भ में किया।
राजग पर निशाना साधते हुए कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि केंद्र और बिहार की सरकारों ने अपने “पक्षपातपूर्ण रवैये” से दलितों को हाशिये पर धकेल दिया है।
पुनिया ने राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (एनएसएस) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि बिहार में करीब 19.15 लाख दलित परिवार कृषि पर निर्भर हैं, जिनमें लगभग सभी छोटे और सीमांत किसान हैं और उनकी औसत आय 50 रुपए प्रतिदिन से भी कम है।
उन्होंने कहा, “यही है राजग के 20 साल के शासन का परिणाम।”
पुनिया ने दावा किया कि दलितों पर अत्याचार के मामलों में बिहार देश में उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे स्थान पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजग सरकार ने दलितों को ‘‘सिर्फ वोट बैंक’’ के रूप में इस्तेमाल किया है, लेकिन नीति निर्माण और क्रियान्वयन में उन्हें दरकिनार कर दिया।
कांग्रेस सांसद ने केंद्र सरकार पर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के निजीकरण के जरिए ‘‘सामाजिक न्याय की रीढ़ तोड़ने’’ का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे आरक्षित वर्गों की लगभग 4.8 लाख नौकरियां खत्म हो जाएंगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ही सच्चे अर्थों में दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। पुनिया ने कहा,“राहुल गांधी ‘जूते’ के खिलाफ ‘कलम’ थामे हुए हैं।”
भाषा कैलाश
राजकुमार
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