पटना उच्च न्यायालय ने पुलिस हिरासत से लापता व्यक्ति के मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया
पटना उच्च न्यायालय ने पुलिस हिरासत से लापता व्यक्ति के मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया
पटना, नौ अगस्त (भाषा) पटना उच्च न्यायालय ने बिहार के भोजपुर जिले में एक साल पहले आबकारी पुलिस अधिकारियों द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद लापता हुए एक व्यक्ति के मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने का आदेश दिया है।
अदालत ने कहा कि इस मामले में पुलिस की जांच पक्षपातपूर्ण है और प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांचकर्ताओं ने मामले में तत्परता नहीं दिखाई।
आरोप है कि मिस्त्री सनोज कुमार को बिहिया थाना क्षेत्र के धरहरा मुसहर टोली स्थित काली मंदिर के पास शराब पीने के आरोप में हिरासत में लिया गया था और 13 अगस्त, 2025 को पुलिसकर्मियों ने उसकी पिटाई की थी जिसके बाद से उसका कोई पता नहीं चला है।
पुलिस ने बताया था कि वह व्यक्ति पुलिस की गाड़ी से कूदकर फरार हो गया था। सनोज कुमार के पिता गौरी शंकर राम ने अपने बेटे के लापता होने के मामले की सीबीआई जांच का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था।
न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति आलोक कुमार सिन्हा की खंडपीठ ने सात अगस्त को एक आदेश में इस मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया।
आदेश के अनुसार, सनोज ने 13 अगस्त, 2025 की शाम अपने परिवार को फोन कर बताया था कि पुलिस ने उसे काली मंदिर के पास शराब पीने के आरोप में पकड़ लिया है। उसने दोबारा फोन कर परिवार को बताया कि पुलिसकर्मी उसे ‘‘बेरहमी से पीट रहे हैं’’, जिसके बाद संपर्क टूट गया।
अगले दिन सनोज के पिता ने बिहिया थाने में शिकायत दर्ज कराई और अपने बेटे के ठिकाने के बारे में जानकारी मांगी। अदालत ने कहा कि बाद में सनोज की मोटरसाइकिल उस जगह के पास लावारिस हालत में मिली, जहां उसे कथित तौर पर हिरासत में लिया गया था।
पुलिस ने आबकारी विभाग के उप निरीक्षक धीरज कुमार, सहायक उप निरीक्षक राजू कुमार, होमगार्ड जवान धर्मेंद्र पासवान, उमेश कुमार यादव और राजू कुमार तथा वाहन चालकों राजू कुमार सिंह, विकास कुमार और सुरेंद्र कुमार सिंह को संदिग्ध के रूप में चिह्नित किया था।
इसे ‘‘दुर्लभ और असाधारण मामलों’’ में से एक बताते हुए अदालत ने कहा कि मामले की जांच को सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपना जरूरी है।
अदालत ने कहा कि इसकी खास वजह यह है कि कई आबकारी पुलिस अधिकारी इस मामले में संदिग्ध हैं और बीते एक साल में जांच की प्रगति बेहद धीमी रही है। खंडपीठ ने कहा, ‘‘राज्य की जांच एजेंसी की निष्क्रियता से उसके पक्षपातपूर्ण रवैये का स्पष्ट रूप से पता चलता है।’’
खंडपीठ ने सीबीआई को प्रतिष्ठित अधिकारियों की एक टीम गठित करने का भी निर्देश दिया और कहा कि एजेंसी पहले की जांच से जुड़े पुलिस अधिकारियों से पूछताछ करने के लिए स्वतंत्र होगी। सीबीआई को अगली सुनवाई 11 सितंबर तक कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
भाषा आशीष प्रशांत
प्रशांत

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