केजरीवाल ने फिर किया बवाल, विज्ञापन देकर बताया अपना सीक्रेट प्लान

मोदी और केजरीवाल दोनो ही संदेशों की सियासत के माहिर खिलाड़ी हैं। मोदी ने जहां सियासत को एलिट से किचन डिस्कशन में बदल दिया है तो वहीं केजरीवाल भी संदेशों पर बहुत फोकस हैं। केजरीवाल सरकार ने बैसाखी पर 7 भाषाओं में विज्ञापन जारी करके अपना सीक्रेट पॉलिटिकल प्लान जाहिर किया है।

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  • Publish Date - April 17, 2022 / 02:34 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 05:13 PM IST

बरुण सखाजी. नईदिल्ली

पंजाब जीत के बाद केजरीवाल के राजनीतिक अरमान किसी से छिपे नहीं हैं। वे कुछ भी कहते हैं, करते हैं, दिखते हैं इसके मायने निकलते हैं। 2010 के बाद की सियासत में संदेश बहुत मायने रखते हैं। मोदी और केजरीवाल दोनो ही संदेशों की सियासत के माहिर खिलाड़ी हैं। मोदी ने जहां सियासत को एलिट से किचन डिस्कशन में बदल दिया है तो वहीं केजरीवाल भी संदेशों पर बहुत फोकस हैं। केजरीवाल सरकार ने बैसाखी पर 7 भाषाओं में विज्ञापन जारी करके अपना सीक्रेट पॉलिटिकल प्लान जाहिर किया है। राजनीति विश्लेषक इसे उनकी आगामी राजनीतिक रणनीति मान रहे हैं।

7 भाषाओं में बैसाखी की बधाइयां, मायने साफ

केजरीवाल ने बैसाखी के त्योहार पर 7 भाषाओं में विज्ञापन जारी किया है। इस विज्ञापन में सबसे ऊपर हिंदी, दूसरे नंबर पर पंजाबी, तीसरे पर गुजराती, चौथे पर मलयालम, पांचवें पर असमिया, छठे पर तमिल और सातवें नंबर पर बांग्ला में बैसाखी की बधाइयां लिखी गई हैं। यह बधाइयां यूं तो अलग-अलग प्रदेशों में बैसाखी व नववर्ष मानाए जाने को लेकर हैं, लेकिन केजरीवाल का विज्ञापन है, इसलिए इसे यूं ही बधाई तो नहीं कहा जा सकता। वरिष्ठ पत्रकार व आईबीसी24 के संपादक परिवेश वात्सायन कहते हैं केजरीवाल की राजनीतिक रणनीति अपना आधार बनाने की है, लेकिन जनता भी बहुत कुछ समझ जाती है।

कांग्रेस के लिए बन रहे खतरा

केजरीवाल ने हिंदी में बधाइयां देकर आगामी दिनों में चुनावी हिंदी राज्य एमपी, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हिमाचल में विस्तार का संदेश दिया है, तो वहीं पंजाबी में त्योहार की बधाई हाल की जीत का प्रतीक है। इस विज्ञापन में गुजराती भाषा में बधाई तीसरे नंबर पर रखी गई है। यानी इसी साल होने जा रहे गुजरात विधानसभा के चुनावों में केजरीवाल पूरी ताकत से अपने आपको आजमाने जा रहे हैं। केजरीवाल का यह संदेश भाजपा के साथ ही कांग्रेस के लिए ज्यादा खतरनाक है। केजरीवाल ने पंजाब जीत से यह संदेश साफ कर दिया है कि वे भाजपा से हर राज्य में लड़ेंगे और जहां कांग्रेस की कमजोरी का वैक्यूम आ रहा है, वहां खासतौर से पिचिंग करेंगे। इसी विज्ञापन में चौथी भाषा मलयालम है। लगातार एक दशक से केरल में कांग्रेस कमजोर हो रही है। एलडीएफ दूसरी बार लगातार सत्ता में आने वाला पहला गठबंधन बना है। भाजपा अपने पांव जमाने की कोशिश में है। लेकिन सफल नहीं हो रही। कांग्रेस लीड यूडीएफ की हार केरल में दूसरे दल की संभावनाओं को बढ़ाती है। यानी केजरीवाल सीधे दिल्ली, पंजाब से केरल में काम करने जा रहे हैं। इस विज्ञापन की अगली भाषा असमिया है। यहां भी कांग्रेस बुरी तरह से कमजोर ही है। हेमंत विस्वसरमा के नेतृत्व में भाजपा अलग ही चल रही है। जबकि स्थानीय स्तर बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ भाजपा को रोकने में नाकामयाब रही है। कांग्रेस भीतरी झगड़ों से नहीं उबर पा रही। ऐसे में आम आदमी पार्टी के लिए असम भी एक राजनीतिक उर्बरा वाला राज्य दिखाई दे रहा है। इस विज्ञापन में छठे नंबर पर तमिल में संदेश लिखा गया है। तमिल में जयललिता के बाद ढह रही अनामुनेंद्र कषगम (एआईडीएमके) का वैक्यूम भाजपा भरने में नाकामयाब दिखी तो इसे केजरीवाल ने लपकना चाहा है। उनकी रणनीति है कि वे तमिल में नॉन द्रमुकों और मुस्लिमों को साथ लेकर नया कंपोजीशन बनाएं। इस विज्ञापन में सबसे आखिरी पर बांग्ला में संदेश लिखा गया है। इसका मतलब बहुत साफ है कि ममता दीदी को अभी चिंता करने की जरूरत नहीं। केजरीवाल बंगाल सबसे बाद में जाएंगे।

तेलंगाना केजरीवाल की राह में नहीं

केजरीवाल भली तरह से जानते हैं कि दक्षिण के राज्यों में घुसपैठ आसान नहीं होती। जबकि भाजपा वहां घुसपैठ बना रही है। इन राज्यों में भाजपा या कांग्रेस के वोटरों को छीनना आसान होगा। तेलंगाना में कांग्रेस और केसीआर के अलावा टीडीपी, वायएसआर भी है। यहां अधिक वैक्यूम नहीं है। संभवतः पार्टी इसीलिए यहां दांव नहीं लगाना चाहती। केजरीवाल की सियासत बहुत दूरदर्शी होती है। वे जो आज कर रहे होते हैं वह कल के लिए और जो कल करने का कह रहे होते हैं वह परसों के लिए समझना चाहिए। साल 2013 की अधूरी दिल्ली विजय के बाद की जल्दबाजी से केजरीवाल ने यह जरूर सीखा है कि राजनीति में भोजन ठंडा करके खाया जाता है, वरना मुंह तो जलता ही है हाथ भी बचते नहीं।