Sonia Gandhi को मिली कड़ी टक्कर, अब Mamata Banerjee रोकेंगी रास्ता

आज हम बात करने वाले हैं Mamata Banerjee की Sonia Gandhi से टक्कर की। सोनिया गांधी को Mamta Banerjee ने चुनौती दे दी है

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  • Publish Date - December 2, 2021 / 08:45 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 07:01 PM IST

Sonia Gandhi को पहली बार मिली कड़ी टक्कर, अब Mamata Banerjee रोकेंगी रास्ता

आज हम बात करने वाले हैं ममता बनर्जी की सोनिया गांधी से टक्कर की….विदेशी होने के कारण प्रधानमंत्री नहीं बन पाई सोनिया गांधी को पहली बार देश में उनके अपने ही खेमे में रह चुकी महिला ने चुनौती दे दी है….फिलहाल यह सोनिया गांधी के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती नजर आ रही है।

सोनिया पिछले 20 सालों से अधिक समय से देश के भीतर सत्ता का… और सत्ता के बाहर रहते हुए विपक्ष का मजबूत चेहरा बनी हुई हैं… 2004 ले 2014 तक कांग्रेस शासन काल में उनको सुपर पीएम कहा जाता था… उस समय कहा जाता था कि प्रधानमंत्री के दस्तखत होने से पहले हर फाइल पर सोनिया की मंजूरी के लिए जाती थी… सत्ता से बाहर रहने के बाद भी सोनिया सबसे प्रभावशाली महिला बनी हुई हैं पर अब उनके नेतृत्व को कड़ी टक्कर देने के लिए बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी मैदान में कूद पड़ी हैं….दरअसल UPA यानी United Progressive Alliance संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन…. जिसका नेतृत्व कांग्रेस पार्टी कर रही थी अब बिखरता नजर आ रहा है और इसी का फायदा उठाकर अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के सपने ममता बनर्जी देख रही हैं…वह इन दिनों UPA में शामिल रहे नेताओं से मिलकर अपने लिए अवसर की तलाश कर रही हैं…इसके साथ ही वह यह भी बताने की कोशिश कर रही हैं कि कांग्रेस अब संयुक्त विपक्ष का नेतृत्व करने के लायक नहीं रही…. कुछ समय तक तृणमूल कांग्रेस खुद UPA का हिस्सा थी. लेकिन अब उसने कांग्रेस से दूरी बना ली है….पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के दौरान भी ममता बनर्जी ने कांग्रेस के साथ कोई अलायंस नहीं बनाया…हालांकि कांग्रेस ने लेफ्ट पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव को कुछ ऐसा मैनेज किया कि उसका फायदा तृणमूल को ही हुआ।

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पश्चिम बंगाल में मोदी के जादू को अपने हौसले और बेहद आक्रामक रणनीति से बेअसर करने वाली ममता बनर्जी अब खुद को अब सोनिया गांधी का विकल्प समझने लगी हैं…उन्हें लगता है कि मोदी के MAGIC को पिछले दो चुनावों में कांग्रेस और उसके सहयोगी तोड़ने में विफल रहे हैं… जबकि उन्होंने बंगाल में यह चमत्कार किया है… तो उनको 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष का नेतृत्व करने का मौका मिलना चाहिए…वैसे बंगाल की जीत में कई फैक्टर रहे हैं… उनमें से एक तो यही था कि ममता बनर्जी खुद सीएम थीं और पुलिस से लेकर प्रशासन तक सबकुछ उनके इशारे पर बेशर्मी के साथ काम कर रहा था…. दूसरा यह कि तृणमूल के पास बेहद आक्रामक लोगों की फौज भी बंगाल में है, जो विरोधियों को बिलकुल बर्दाश्त नहीं कर सकती….देश के बाकी हिस्सों में कम से कम ये दो फैक्टर बंगाल की दीदी को नहीं मिल पाएंगे…पर हां सब ठीक रहा तो सोनिया गांधी के गिरते ग्रॉफ के बीच वे खुद को स्थापित तो कर ही सकती हैं….ये भी लगता है कि ममता बनर्जी भले ही अभी 2024 की बात कर रही हैं पर उनकी नजर आगे 2029 तक खुद की पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने पर है…

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अब जरा अभी की बात करें तो यूपी समेत 5 राज्यों में चुनाव होने वाले हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए इन चुनावों को ट्रेलर समझा जा रहा है…ऐसे में ममता बनर्जी अपने अभियान पर निकल पड़ी हैं…और अभियान है… विपक्ष की नेता के रूप में सोनिया के वर्चस्व को तोड़ना….इसके लिए वे दिल्ली में कई दलों के नेताओं से मिल चुकी हैं और अभी उन्होंने मुंबई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की है….
एक समय था जब सोनिया गांधी प्रधानमंत्री की कुर्सी के बेहद करीब थीं पर उनकी किस्मत उन्हें दगा दे गई और विदेशी मूल का होने के कारण वे प्रधानमंत्री नहीं बन पाई थीं… लेकिन ममता बनर्जी के साथ ऐसा नहीं है…वे देशी हैं… इसलिए सोनिया की तुलना में कुछ ज्यादा अवसर उनके पास है… यही वजह है कि ममता बनर्जी ने विदेशी महिला के खिलाफ 1999 में मोर्चा खोलने वाले शरद पवार से मुलाकात की है… आपको याद होगा 1999 में शरद पवार ने कांग्रेस पार्टी छोड़कर एनसीपी बनायी थी। बताया गया है कि पवार और ममता बनर्जी ने मजबूत विपक्ष बनने पर चर्चा की है… इधर मुलाकात के बाद पत्रकारों ने ममता बनर्जी से सवाल पूछा कि क्या शरद पवार को UPA का अध्यक्ष बनाया जाए ? इस सवाल के जवाब में ममता बनर्जी ने उल्टे पूछा कि- क्या यूपीए है ? उन्होंने यहां तक कह दिया कि अब कोई यूपीए नहीं है? हम एक मजबूत विकल्प चाहते हैं… यानी ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि वे आगे किस तरह की राजनीति करने वाली हैं… इसके बाद उन्होंने राहुल गाँधी पर भी हमला बोला और राहुल का नाम लिए बिना कहा कि अगर कोई कुछ करता नहीं है, आधा समय विदेश में रहता है तो उसकी राजनीति कैसे चलेगी।
बंगाल की दीदी को लगता है कि अगर सभी रीज़नल पार्टियां एक साथ आ जायें तो बीजेपी को हराया जा सकता है….यही आइडिया लेकर वे इन दिनों अलग अलग राज्यों में घूम रही हैं… वे महाराष्ट्र में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे से भी मिल चुकी हैं और उसके बाद उन्होंने ये ऐलान किया कि तृणमूल कांग्रेस महाराष्ट्र में चुनाव नहीं लड़ेंगी। अब यह भी अलग बात है कि वहां उनकी कोई हैसियत ही नहीं है तो चुनाव लड़के भी भला क्या होगा…कहीं ऐसा तो नहीं है कि इस तरह का ऐलान करके दीदी ने बंगाल में अपनी जमीन बचाए रखने की कोशिश की है… ताकि भविष्य में शिवसेना या एनसीपी जैसे दल बंगाल में चुनाव नहीं लड़ें…ऐसा ही गठबंधन या अलायंस वे दूसरे दलों के साथ करके एक तीर से दो निशाने लगाने चाहती एक अपना बंगाल सुरक्षित रखना चाहती हैं….और दूसरा सोनिया गांधी की जगह विपक्ष का नेता बनना चाहती हैं….

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कुछ लोगों को शक है कि दीदी का मोदी से कोई समझौता तो नहीं हो गया है…? ऐसा सोचने वालों को लगता है कि कांग्रेस और उसके अलायंस को कमजोर करके दीदी को फायदा हो या न हो बीजेपी जरूर 2024 में फिर मजबूत हो सकती है…इधर कांग्रेस भी अब ममता बनर्जी और भाजपा में मिलीभगत होने का आरोप लगा रही है। बंगाल से आने वाले कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि दीदी 2012 में भी UPA को तोडना चाहती थी पर वो ऐसा करने में असफल रही। अब उन्होंने एक बार फिर ऐसा करना शुरू कर दिया है क्योंकि उनके पीछे मोदी जी खड़े हैं।
ऐसा भी कहा जाता है कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने ममता बनर्जी को आगे बढ़ाने के लिए सारी रणनीति तैयार की है….प्रशांत किशोर ने भी कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा है कि जो पार्टी पिछले 10 सालों में 90 फीसदी चुनाव हार चुकी है, उसका विपक्ष के नेतृत्व पर कोई दैवीय अधिकार नहीं हो सकता।
खैर पहली बार इस देश में किसी महिला ने सोनिया गांधी को इस तरह चुनौती दी है… इसके पहले पुरूष नेता ही उनके बराबर की हैसियत वाले दिखते थे… हालांकि अब उनमें से ज्यादातर या तो संसार से विदा हो गए… या फिर दूसरी पार्टी में पहुंच गए है…अब ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी को चुनौती दी है तो देखना होगा कांग्रेस और सोनिया गांधी इस चुनौती से किस तरह निपटती हैं…. फिलहाल तो यही दिख रहा है कि कांग्रेस के भीतर 2024 तक माहौल काफी बदल चुका होगा और यह भी उम्मीद है कि तब तक कांग्रेस खुद में सुधार के लिए गंभीरता से जुट चुकी होगी…ऐसे में दीदी की चुनौती का असर कितना होगा यह देखना होगा….

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