मानसून की गमी से 111 जिलों में फसल नुकसान का सबसे ज्यादा खतरा : सरकार

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मानसून की गमी से 111 जिलों में फसल नुकसान का सबसे ज्यादा खतरा : सरकार

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  • Publish Date - June 23, 2026 / 07:18 PM IST,
    Updated On - June 23, 2026 / 07:18 PM IST

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि सरकार ने 111 जिलों की पहचान की है जहां फसल को सबसे ज्यादा नुकसान का खतरा है, क्योंकि अल नीनो के कारण मानसून में 43 प्रतिशत की कमी खरीफ की बुवाई को प्रभावित कर रही है।

चौहान ने कहा कि मानसून की कमजोर स्थिति दो जुलाई तक बने रहने की संभावना है, जिससे किसानों के पास खरीफ (गर्मी) की फसल बोने के लिए बहुत कम समय बचेगा। 22 जून तक, खरीफ फसलों की बुवाई कुल बोए जाने वाले क्षेत्र के 10 प्रतिशत से भी कम हिस्से में हुई है, जो पिछले साल की इसी अवधि में दर्ज एक करोड़ 17.9 लाख हेक्टेयर की तुलना में थोड़ा अधिक यानी एक करोड़ 19.9 लाख हेक्टेयर है। और सोयाबीन को छोड़कर ज्यादातर फसलें आगे चल रही हैं।

मानसून की प्रगति पर समीक्षा बैठक के बाद चौहान ने पत्रकारों से कहा, ‘‘कुल मिलाकर, मानसून की बारिश में 43 प्रतिशत की कमी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि कमजोर मानसून दो जुलाई तक जारी रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है।’’

मंत्रालय ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में 315 जिलों की पहचान की है, जहां सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।

इनमें से 111 जिलों — जिनमें महाराष्ट्र के 20 जिले शामिल हैं — को ‘‘सबसे ज्यादा जोखिम वाले’’ जिलों के तौर पर वर्गीकृत किया गया है, क्योंकि वहां सिंचाई की सुविधा 25 प्रतिशत से कम है। 25-50 प्रतिशत सिंचाई सुविधा वाले 76 जिले ‘‘मध्यम जोखिम’’ वाली श्रेणी में आते हैं, जबकि पर्याप्त बांध और सिंचाई बुनियादी ढांचे वाले 128 जिलों को ‘‘सबसे कम जोखिम’’ वाला माना गया है।

मंत्रालय ने राज्य-वार आकस्मिक योजनाएं तैयार की हैं, जिनमें कम बारिश की स्थिति के अनुकूल वैकल्पिक फसलों की सिफारिश की गई है। राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे कम पानी की जरूरत वाली दालों, तिलहनों और मोटे अनाजों को बढ़ावा दें और किसी एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय कम समय में तैयार होने वाली और जलवायु के अनुकूल बीजों की किस्मों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें।

मंत्री ने कहा, ‘‘बारिश में कमी है। हमें किसानों को वैकल्पिक फसलें अपनाने का सुझाव देने की जरूरत है। हम खेतों को खाली नहीं रहने देंगे।’’ उन्होंने कहा कि इस सत्र के लिए बीज और खाद की पर्याप्त उपलब्धता है।

जलाशयों में पानी का स्तर अभी पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है, हालांकि इसमें कमी आ रही है। राज्यों से कहा गया है कि वे पानी का समझदारी से इस्तेमाल करें और सिंचाई की जरूरतों के लिए पानी बचाने के मकसद से वीबी-ग्राम जी (विकसित भारत–रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन ग्रामीण) कार्यक्रम के तहत तालाबों, नदियों, खेतों के तालाबों और चेक डैम की सफाई करें।

मंत्रालय ने चुनिंदा राज्यों में फसल बीमा योजनाओं और किसान क्रेडिट कार्ड के तहत बड़े पैमाने पर पंजीकरण करने को कहा है। 731 कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) से कहा गया है कि वे किसानों तक अपनी पहुंच बढ़ाएं और एसएमएस, व्हाट्सएप, कॉल सेंटर व अन्य माध्यमों से समय-समय पर सलाह पहुंचाएं।

उत्पादन के अनुमानों पर चौहान ने कहा कि ये अनुमान सामान्य स्थितियों पर आधारित हैं, लेकिन उन्होंने भरोसा दिलाया, ‘‘हम यह पक्का करेंगे कि उत्पादन में कोई कमी न आए।’’

मंत्रालय ने वास्तविक समय पर निगरानी और सलाह देने के लिए एक ‘अल नीनो निगरानी प्रकोष्ठ’ और ‘क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप’ बनाया है।

संवाददाता सम्मेलन में कृषि सचिव अतिश चंद्र, आईसीएआर के महानिदेशक एमएल जाट और कृषि आयुक्त पीके सिंह भी मौजूद थे।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय