एसईजेड नीति में बड़े सुधारों के लिए 17 सदस्यीय समिति का गठन

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एसईजेड नीति में बड़े सुधारों के लिए 17 सदस्यीय समिति का गठन

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  • Publish Date - March 8, 2026 / 07:48 PM IST,
    Updated On - March 8, 2026 / 07:48 PM IST

नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) सरकार ने विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) नीति में व्यापक सुधारों के बारे में सुझाव देने के लिए एक 17 सदस्यीय समिति का गठन किया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

यह समिति ‘एसईजेड 2.0’ नीति तैयार करने के लिए एक रिपोर्ट सौंपेगी, जिसमें व्यापक और समावेशी सुधारों की रूपरेखा सुझाई जाएगी।

समिति मौजूदा विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के समन्वय और एकीकरण पर केंद्रित एक अध्ययन करेगी। इसमें एसईजेड, निर्यात उन्मुख इकाइयां (ईओयू), गोदामों में विनिर्माण और अन्य परिचालन (एमओओडब्ल्यूआर), अग्रिम मंजूरी, पूंजीगत वस्तुओं के लिए निर्यात प्रोत्साहन (ईपीसीजी) और शुल्क मुक्त आयात मंजूरी (डीएफआईए) जैसी योजनाएं शामिल हैं।

समिति में वाणिज्य विभाग, सीमा शुल्क, नीति आयोग, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के प्रतिनिधि शामिल हैं।

समिति के कार्यक्षेत्र (टीओआर) में विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) अधिनियम, 2005 की समीक्षा करना शामिल है। इसका उद्देश्य वर्तमान वैश्विक व्यापार, निवेश वातावरण और वृहत आर्थिक परिदृश्य में इस अधिनियम की प्रभावशीलता का आकलन करना है। साथ ही, अन्य निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के साथ इसका तालमेल बिठाना है ताकि यदि नीतिगत स्तर पर कोई विसंगति हो, तो उसे दूर किया जा सके।

यह समिति एसईजेड नीति में हाल के और प्रस्तावित सुधारों के प्रभाव का भी मूल्यांकन करेगी। इसमें घरेलू शुल्क क्षेत्र (डीटीए) में बिक्री, राजकोषीय और गैर-राजकोषीय प्रोत्साहन, अनुपालन आवश्यकताओं और परिचालन लचीलेपन जैसे उपाय शामिल हैं। समिति यह देखेगी कि इन सुधारों का निर्यात, निवेश, रोजगार और व्यापार सुगमता पर क्या असर पड़ा है।

इसके अलावा, समिति घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करने, विनिर्माण, सेवाओं, प्रौद्योगिकी के उन्नयन, मूल्य संवर्धन और सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम (एमएसएमई) सहित रोजगार सृजन में एसईजेड की प्रभावशीलता का आकलन करेगी।

समिति के कार्यक्षेत्र में एसईजेड डेवलपर्स और इकाइयों के सामने आने वाली परिचालन, प्रक्रियात्मक और नियामक चुनौतियों की पहचान करना भी शामिल है। इसमें सीमा शुल्क, कराधान, अनुपालन का बोझ, बुनियादी ढांचा और विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय से जुड़े मुद्दे शामिल होंगे।

भाषा सुमित रमण

रमण