नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) भारी उद्योग मंत्रालय की 7,280 करोड़ रुपये की ‘सिंटर्ड दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक’ विनिर्माण प्रोत्साहन योजना को लेकर मंगलवार को आयोजित बोली-पूर्व बैठक में कम-से-कम 25 कंपनियों ने शिरकत की।
सूत्रों ने कहा कि बैठक में शामिल कंपनियों में जेएसडब्ल्यू ग्रुप एवं एनएलसी इंडिया के प्रतिनिधि भी शामिल थे।
मंत्रालय ने 20 मार्च को इस योजना के तहत 6,000 टन प्रति वर्ष क्षमता वाले चुंबक विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए बोलियां आमंत्रित की थीं।
सरकार बोली प्रक्रिया के जरिये अधिकतम पांच कंपनियों का चयन करेगी, जिनमें से प्रत्येक को 1,200 टन प्रति वर्ष तक की क्षमता स्थापित करने की अनुमति होगी।
भारी उद्योग मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि बोली से पहले आयोजित बैठक में योजना की रूपरेखा, निविदा प्रस्ताव के प्रमुख प्रावधानों और बोली प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। इस बैठक में कंपनी प्रतिभागियों के सवालों का जवाब भी दिया गया।
मंत्रालय ने कहा कि इच्छुक कंपनियां 22 अप्रैल तक ई-मेल के जरिये अपनी शंकाएं भेज सकती हैं।
इसके लिए बोलियां 28 मई को लगाई जाएंगी और तकनीकी बोलियां 29 मई, 2026 को खोली जाएंगी।
बोली प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और दो चरणों में पूरी की जाएगी। इसमें सबसे कम लागत (एलसीएस) वाली बोली के आधार पर चयन किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया सीपीपी पोर्टल पर होगी।
दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक अत्यधिक शक्तिशाली होते हैं और इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, वैमानिकी और रक्षा क्षेत्रों में किया जाता है।
सरकार का मानना है कि यह योजना घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने, आयात निर्भरता घटाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में मदद करेगी।
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प्रेम अजय
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