बैंक खातों को धोखाधड़ी घोषित करने से पहले उधारकर्ता निजी सुनवाई के हकदार नहींः उच्चतम न्यायालय

Ads

बैंक खातों को धोखाधड़ी घोषित करने से पहले उधारकर्ता निजी सुनवाई के हकदार नहींः उच्चतम न्यायालय

  •  
  • Publish Date - April 7, 2026 / 08:37 PM IST,
    Updated On - April 7, 2026 / 08:37 PM IST

नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि बैंकों द्वारा खातों को ‘धोखाधड़ी’ के रूप में वर्गीकृत करने से पहले उधारकर्ता व्यक्तिगत सुनवाई का अनिवार्य रूप से अवसर दिए जाने के हकदार नहीं हैं।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें उधारकर्ता को धोखाधड़ी वाला खाता घोषित करने से पहले व्यक्तिगत सुनवाई देने का बैंक को निर्देश दिया गया था।

शीर्ष अदालत ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन से जुड़े नियमों की व्याख्या करते हुए कहा कि ‘प्राकृतिक न्याय’ के सिद्धांतों का पालन करने के लिए कारण बताओ नोटिस देना, जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराना, उधारकर्ता के जवाब पर विचार करना और कारण के साथ आदेश पारित करना पर्याप्त है।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि यदि बैंक किसी खाते को धोखाधड़ी घोषित करने में ऑडिट रिपोर्ट (फॉरेंसिक ऑडिट समेत) पर निर्भर करते हैं, तो उसकी प्रति उधारकर्ता को देनी होगी ताकि वह उस पर अपनी आपत्ति या जवाब दे सके।

इसके साथ ही पीठ ने कहा, ‘‘ऐसे मामलों में निर्णय मुख्य रूप से दस्तावेजी साक्ष्यों- जैसे वित्तीय रिकॉर्ड, लेन-देन विवरण और ऑडिट रिपोर्ट पर आधारित होता है इसलिए हर मामले में मौखिक सुनवाई जरूरी नहीं होती।’’

पीठ ने कहा कि हर मामले में व्यक्तिगत सुनवाई अनिवार्य करने से प्रक्रिया में देरी होगी और धोखाधड़ी वाले खातों की समय पर पहचान और जांच प्रभावित हो सकती है।

पीठ ने कहा, “हम आरबीआई के इस रुख से सहमत हैं कि कारण बताओ नोटिस जारी करना, संबंधित साक्ष्य मुहैया कराना, जवाब पाना और कारण के साथ आदेश पारित करना निष्पक्षता की शर्तों को पूरा करते हैं और न्याय में किसी भी तरह की चूक को रोकते हैं।”

इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पहले के फैसलों में भी नोटिस और जवाब देने का अवसर जैसी प्रक्रियागत निष्पक्षता पर जोर दिया गया था, न कि व्यक्तिगत सुनवाई को अनिवार्य बताया गया था।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय