ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर पिछली तारीख से 28 प्रतिशत जीएसटी लगाना सहीः उच्चतम न्यायालय

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ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर पिछली तारीख से 28 प्रतिशत जीएसटी लगाना सहीः उच्चतम न्यायालय

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  • Publish Date - May 27, 2026 / 08:11 PM IST,
    Updated On - May 27, 2026 / 08:11 PM IST

नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर 28 प्रतिशत जीएसटी की पिछली तारीख से वसूली को बरकरार रखते हुए कहा कि ऐसा कर लगाना संवैधानिक रूप से वैध है।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग मंच केवल मध्यस्थ नहीं हैं, बल्कि उन्हें माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत कर-योग्य ‘आपूर्तिकर्ता’ माना जाएगा।

शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा, “ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियां, जिनमें फैंटेसी स्पोर्ट्स और अन्य डिजिटल खेल शामिल हैं और जिनमें अनिश्चित परिणामों पर दांव लगाया जाता है, जीएसटी रूपरेखा के तहत सट्टेबाजी और जुए की श्रेणी में आती हैं।”

पीठ ने कहा, ‘सट्टेबाजी और जुए से उपजे ‘कार्यान्वित किए जा सकने वाले दावों’ की आपूर्ति पर जीएसटी लगाना संविधान के अनुच्छेद 366(12) और 366(12ए) का उल्लंघन नहीं करता है।’

इसके साथ ही पीठ ने तमिलनाडु और कर्नाटक सरकारों द्वारा बनाए गए उन कानूनों की वैधता भी बरकरार रखी, जिनमें दांव लगाने से संबंधित ऑनलाइन गेम और रम्मी एवं पोकर जैसे कौशल-आधारित खेलों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

जीएसटी अधिकारियों ने अक्टूबर, 2023 में ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को कर चोरी के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। इसके बाद सरकार ने कानून में संशोधन करते हुए एक अक्टूबर, 2023 से विदेशी ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के लिए भारत में पंजीकरण अनिवार्य कर दिया।

इससे पहले, अगस्त 2023 में जीएसटी परिषद ने कहा था कि ऑनलाइन गेमिंग मंच पर लगाए गए कुल दांव की राशि पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाएगा।

कई गेमिंग कंपनियों ने इन प्रावधानों को चुनौती देते हुए विभिन्न उच्च न्यायालयों में अपील की थीं।

बाद में केंद्र की याचिका पर शीर्ष अदालत ने नौ उच्च न्यायालयों में लंबित सभी मामलों को अपने पास स्थानांतरित कर लिया था, ताकि इस मुद्दे पर अंतिम और प्रामाणिक निर्णय दिया जा सके।

गेम्स 24×7, हेड डिजिटल वर्क्स और फेडरेशन ऑफ इंडियन फैंटेसी स्पोर्ट्स सहित कई ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने जीएसटी की इस व्यवस्था को अदालत में चुनौती दी थी।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण