नयी दिल्ली, 18 जून (भाषा) भारत में ‘प्रवेश स्तर’ की नौकरियों के लगभग 37 प्रतिशत कार्य पहले से ही कृत्रिम मेधा (एआई) कर रहा है जबकि वैश्विक स्तर पर यह औसत 33 प्रतिशत से अधिक है। एक संयुक्त अध्ययन में यह बात सामने आई।
‘एंट्री-लेवल’ भूमिकाएं से तात्पर्य उन कार्यों से है जिनके लिए बहुत ज्यादा अनुभव की जरूरत नहीं होती।
कॉग्निजेंट एवं पियर्सन की रिपोर्ट अनुसार, ‘प्रवेश स्तर’ की भूमिकाएं अब तेजी से बदल रही हैं और कंपनियां कार्य निष्पादन से आगे बढ़कर एआई प्रणाली के साथ काम करने की दिशा में जा रही हैं।
यह सर्वेक्षण अमेरिका, ब्रिटेन और भारत के 750 एचआर दिग्गजों पर आधारित है। इसे 23 मार्च से तीन अप्रैल, 2026 के बीच वेकफील्ड रिसर्च द्वारा किया गया।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में 37 प्रतिशत ‘एंट्री-लेवल’ कार्य एआई कर रहा है, जबकि वैश्विक औसत 33 प्रतिशत है। लगभग 18 प्रतिशत एचआर पेशेवरों ने बताया कि एआई अब आधे या उससे अधिक प्रवेश स्तर के काम को संभाल रहा है।
अध्ययन के अनुसार, 96 प्रतिशत एचआर कर्मियों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में प्रवेश स्तर की नौकरियां ऐसी बन जाएंगी जहां कर्मचारी एआई प्रणाली की निगरानी एवं प्रबंधन करेंगे।
करीब 94 प्रतिशत एचआर पेशेवरों का कहना है कि एआई भविष्य में ऐसी नई ‘एंट्री-लेवल’ भूमिकाएं बनाएगा जो पहले अस्तित्व में नहीं थे।
अध्ययन में यह भी कहा गया कि भारत में 80 प्रतिशत संगठन मानते हैं कि एआई कर्मचारियों को उच्च मूल्य वाले कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद कर रहा है, जो वैश्विक स्तर पर 77 प्रतिशत है।
कॉग्निजेंट इंडिया के अध्यक्ष (वैश्विक संचालन) और चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक राजेश वेरियर ने कहा कि भारत प्रवेश स्तर के काम में एआई बदलाव के मामले में अग्रणी है और कंपनियां एआई को रोजमर्रा के काम में तेजी से शामिल कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि भूमिकाओं का मौलिक पुनर्गठन हो रहा है, जहां शुरुआती करियर वाले कर्मचारियों से एआई के साथ काम करने और अधिक मूल्य आधारित परिणाम देने की उम्मीद की जा रही है।
पियर्सन की मुख्य मानव संसाधन अधिकारी अली बेबो ने कहा कि जैसे-जैसे काम का तरीका बदलेगा, बड़े संगठन उन क्षमताओं को विकसित करने पर अधिक ध्यान देंगे जो लोगों और एआई को एक साथ काम करने में मदद करेंगी।
भाषा निहारिका अजय
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