छह गीगाहर्ट्ज बैंड में 500 मेगाहर्ट्ज का स्पेक्ट्रम लाइसेंस से मुक्त, वाई-फाई को मिलेगा बढ़ावा

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छह गीगाहर्ट्ज बैंड में 500 मेगाहर्ट्ज का स्पेक्ट्रम लाइसेंस से मुक्त, वाई-फाई को मिलेगा बढ़ावा

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  • Publish Date - January 21, 2026 / 08:56 PM IST,
    Updated On - January 21, 2026 / 08:56 PM IST

नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) दूरसंचार विभाग ने छह गीगाहर्ट्ज बैंड की निचली फ्रीक्वेंसी रेंज में 500 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम को लाइसेंस-मुक्त करने की अधिसूचना जारी कर दी है। इस कदम से देश में वाई-फाई सेवाओं को काफी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

यह अधिसूचना 16 मई, 2025 को जारी मसौदा गजट अधिसूचना में छह गीगाहर्ट्ज बैंड वाली इस फ्रीक्वेंसी को लाइसेंस से मुक्त करने के इरादे की घोषणा के करीब छह महीने बाद जारी की गई है।

अधिसूचना के मुताबिक, 5925-6425 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी बैंड में कम-पावर इनडोर और बहुत कम पावर वाले आउटडोर वायरलेस एक्सेस सिस्टम (रेडियो लोकल एरिया नेटवर्क (वाई-फाई) शामिल) के संचालन के लिए किसी लाइसेंस या फ्रीक्वेंसी आवंटन की जरूरत नहीं होगी। यह उपयोग गैर-हस्तक्षेप, गैर-संरक्षण और साझा (गैर-विशेषाधिकार) आधार पर किया जाएगा।

अधिसूचना में 6425-6725 मेगाहर्ट्ज और 6725-7125 मेगाहर्ट्ज बैंड को छह गीगाहर्ट्ज के ऊपरी हिस्से का अंग बताया गया है।

राष्ट्रीय फ्रीक्वेंसी आवंटन योजना (एनएफएपी) के तहत दूरसंचार विभाग ने इन ऊपरी फ्रीक्वेंसी को उन्नत मोबाइल सेवाओं के लिए चिन्हित किया है। एनएफएपी से विभिन्न प्रौद्योगिकियों के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन का आधार तय होता है।

अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों एप्पल, अमेजन, सिस्को, मेटा, एचपी और इंटेल कॉरपोरेशन ने संयुक्त रूप से मांग की है कि छह गीगाहर्ट्ज बैंड में उपलब्ध पूरे 1,200 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम को वाई-फाई सेवाओं के लिए लाइसेंस-मुक्त किया जाए।

दूसरी तरफ, घरेलू दूरसंचार सेवा कंपनी रिलायंस जियो का कहना है कि पूरे 1,200 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम को आगामी स्पेक्ट्रम नीलामी में रखा जाना चाहिए।

दूरसंचार विभाग की अधिसूचना में सिग्नल की उत्सर्जन ताकत की सीमा तय की है, जिससे वाई-फाई उपकरणों का संचालन संभव हो सके, जबकि अधिक पावर की जरूरत वाले मोबाइल एंटीना को इससे बाहर रखा गया है।

आईटीयू-एपीटी फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भरत भाटिया ने कहा कि छह गीगाहर्ट्ज बैंड का निचला हिस्सा वाई-फाई के लिए उपलब्ध होने से 5जी नेटवर्क के मौजूदा विस्तार को पूरक समर्थन मिलेगा, 6जी नेटवर्क की तैयारी में मदद मिलेगी और घरों एवं दफ्तरों में उच्च गति ब्रॉडबैंड अनुभव बेहतर होगा।

ब्रॉडबैंड उपकरण विनिर्माता जीएक्स ग्रुप के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पारितोष प्रजापति ने कहा कि यह फैसला भारत के वायरलेस परिवेश के लिए अहम है और वाई-फाई 7 जैसी अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों के लाइसेंस-मुक्त उपयोग का रास्ता खोलता है।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण