आंध्र प्रदेश में डेटा सेंटरों के लिए 70 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा अनिवार्य: नारा लोकेश

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आंध्र प्रदेश में डेटा सेंटरों के लिए 70 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा अनिवार्य: नारा लोकेश

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  • Publish Date - September 25, 2026 / 01:44 PM IST,
    Updated On - September 25, 2026 / 01:44 PM IST

नयी दिल्ली, 25 सितंबर (भाषा) आंध्र प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री नारा लोकेश ने कहा कि राज्य अपने यहां डेटा सेंटर विस्तार के लिए पर्यावरण के अनुकूल नजरिया अपना रहा है। उन्होंने कहा कि इसके तहत डेटा सेंटरों द्वारा उपयोग की जाने वाली ऊर्जा का कम से कम 70 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से आना अनिवार्य है।

राज्य सरकार तकनीकी निवेश को आकर्षित करने के लिए विशाखापत्तनम को एक प्रमुख डेटा सेंटर केंद्र के रूप में स्थापित कर रही है। हालांकि, डेटा सेंटर में आमतौर पर भारी मात्रा में ऊर्जा और पानी की खपत होती है।

लोकेश ने पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया (पीएएफआई) द्वारा आयोजित एक परिचर्चा में कहा कि राज्य सरकार ऊर्जा, पानी और अन्य संसाधनों की आवश्यकताओं पर एक साथ ध्यान केंद्रित करके डेटा सेंटर विकास के पर्यावरणीय प्रभावों का समाधान कर रही है।

सौर, पवन, पंप स्टोरेज और बैटरी आधारित ऊर्जा सहित विभिन्न स्रोतों का उल्लेख करते हुए लोकेश ने कहा, ”पहला बुनियादी नियम यह है कि डेटा सेंटरों द्वारा उपयोग की जाने वाली ऊर्जा का न्यूनतम 70 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से आना चाहिए।”

उन्होंने बताया कि राज्य विशाखापत्तनम में एक डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित कर रहा है और पोलावरम लेफ्ट बैंक नहर के माध्यम से इसकी पानी की आवश्यकताओं को पूरा करने की भी योजना बना रहा है।

लोकेश ने कहा कि पोलावरम परियोजना उस पानी का उपयोग करने में मदद करेगी जो अन्यथा बंगाल की खाड़ी में बह जाता। डेटा सेंटरों की जरूरत को पूरा करने के लिए आपूर्ति को विशाखापत्तनम की ओर मोड़ा जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि आंध्र प्रदेश निवेश आकर्षित करने, नवाचार को गति देने और विभिन्न कौशल स्तरों पर रोजगार पैदा करने की रणनीति के तहत क्वांटम प्रौद्योगिकी, बागवानी, दुर्लभ पृथ्वी खनिज, बायोमेडिसिन, दवा, कृत्रिम मेधा (एआई) और डेटा सेंटर सहित 23 क्षेत्र विशिष्ट क्लस्टर विकसित कर रहा है।

लोकेश ने कहा कि ये क्लस्टर उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ ही सीमेंट और ऑटोमोटिव जैसे पारंपरिक उद्योगों को भी शामिल करते हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य दो अक्टूबर को अपना बागवानी मिशन शुरू करेगा, जिसके तहत अनुसंधान के लिए लगभग एक लाख करोड़ रुपये की योजना बनाई गई है।

भाषा पाण्डेय

पाण्डेय