संशोधित मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि को जल्द मिल सकती है मंत्रिमंडल की मंजूरी: सूत्र

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संशोधित मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि को जल्द मिल सकती है मंत्रिमंडल की मंजूरी: सूत्र

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  • Publish Date - September 25, 2026 / 01:02 PM IST,
    Updated On - September 25, 2026 / 01:02 PM IST

नयी दिल्ली, 25 सितंबर (भाषा) नया मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) ढांचा तैयार हो चुका है और इसे जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने की संभावना है। सरकारी सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

सूत्रों ने बताया कि वित्त मंत्रालय ने प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए कैबिनेट सचिवालय को मसौदा नोट भेज दिया है।

सूत्रों के अनुसार द्विपक्षीय निवेश संधि का संशोधित मॉडल भारत की वार्ता प्रक्रियाओं को आसान बनाएगा और निवेशकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। मौजूदा मॉडल बीआईटी को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2015 में मंजूरी दी थी।

सूत्रों ने कहा कि नए मॉडल बीआईटी को तैयार करते समय कुछ ऐसी ‘लक्ष्मण रेखाएं’ तय की गई हैं, जिनसे सरकार कोई समझौता करने को तैयार नहीं है।

सूत्रों ने बताया, ”कर से संबंधित कोई भी प्रावधान इस ढांचे का हिस्सा नहीं होगा क्योंकि हम कराधान पर अपने संप्रभु अधिकार को छोड़ने को तैयार नहीं हैं।”

इसके साथ ही, स्थानीय कानूनी प्रावधान भी इसका हिस्सा नहीं होंगे क्योंकि सरकार न्यायपालिका को द्विपक्षीय निवेश संधि के दायरे से बाहर रखना चाहती है।

द्विपक्षीय निवेश संधि दो देशों के बीच एक ऐसा समझौता है, जिसका उद्देश्य एक-दूसरे के क्षेत्र में अपने निवेशकों द्वारा किए गए निवेश को बढ़ावा देना और उसकी रक्षा करना है। निवेश संरक्षण संधियों के तहत निवेशक किसी संप्रभु सरकार को मध्यस्थता में ले जा सकते हैं।

भारत से विदेश में होने वाले प्रत्यक्ष निवेश (ओडीआई) में वृद्धि के साथ, यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि विदेशों में निवेश करने वाले घरेलू निवेशकों और कंपनियों को भी पर्याप्त सुरक्षा मिले।

मौजूदा ढांचे के तहत विदेशी निवेशकों को भारत के खिलाफ संधि-आधारित मध्यस्थता शुरू करने से पहले पांच साल तक इंतजार करना अनिवार्य है। इसका अर्थ यह है कि अगर किसी विदेशी निवेशक का भारत के साथ कोई विवाद होता है, तो उसे समझौते के तहत दावा पेश करने से पहले पांच वर्षों तक घरेलू कानूनी उपायों का सहारा लेना होगा।

पिछले कुछ वर्षों में इस पांच साल की अवधि का विरोध बढ़ा है और कई पक्ष इसे कम करने की मांग कर रहे हैं।

हाल के वर्षों में भारत ने इजराइल, उज्बेकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ द्विपक्षीय निवेश संधियों पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत अब तक कुल मिलाकर लगभग 90 द्विपक्षीय निवेश समझौते कर चुका है।

सरकार ने 2025-26 के बजट में मौजूदा ढांचे में बदलाव का प्रस्ताव रखा था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा था, ”टिकाऊ विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने और ‘फर्स्ट डेवलप इंडिया’ (पहले भारत का विकास) की भावना के तहत, मौजूदा मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि में संशोधन किया जाएगा और इसे अधिक निवेशक-अनुकूल बनाया जाएगा।”

भारत इस समय कनाडा और ब्रिटेन सहित 4-5 देशों के साथ द्विपक्षीय निवेश संधि पर बातचीत कर रहा है।

भाषा पाण्डेय

पाण्डेय