7th Pay DA Hike Order Latest News: रक्षाबंधन से पहले सरकारी कर्मचारियों के खाते में आएगी बढ़े हुए महंगाई भत्ते की रकम, आदेश जारी, 8th Pay Commission के इंतेजार में बैठे कर्मचारियों के लिए खुशखबरी / Image: AI Generated
चंडीगढ़: 7th Pay DA Hike Order Latest News 8वें वेतन आयोग के इंतेजार में बैठे सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। जी हां सरकारी कर्मचारियों को रक्षाबंधन से पहले महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी होने वाली है। इतना ही नहीं बढ़े हुए महंगाई भत्ते की रकम भी इसी महीने त्योहरों से पहले खाते में आएगी। इस संबंध में हाईकोर्ट ने आदेश भी जारी कर दिया है। कोर्ट अपने आदेश में ये भी कहा है कि सरकार इसी महीने के अंत तक महंगाई भत्ते में रकम कर्मचारियों के खाते में नहीं डालती तो 6 प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान किया जाएगा।
7th Pay DA Hike Order Latest News मिली जानकारी के अनुसार पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों-पेंशनरों के महंगाई भत्ते के मामले में सुनवाई करते हुए पंजाब की भगवंत मान सरकार को आदेश दिया है कि 15 दिन के भीतर बकाया मंहगाई भत्ते और महंगाई राहत का भुगतान करें। इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार को कर्मचारियों का DA जारी होने तक बड़े स्तर के विज्ञापन अभियान चलाने से रोक दिया है। हाईकोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी से इसकी कंप्लायंस रिपोर्ट भी मांगी है। इस फैसले से मुलाजिमों की सैलरी 15 हजार रुपए तक बढ़ सकती है।
दूसरी ओर कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बयान जारी करते हुए कहा है कि ”पंजाब सरकार के कर्मचारियों को ऐतिहासिक रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में काफी अधिक वेतन मिलता रहा है। राज्य की वेतन संरचना के तहत कई संवर्गों के कर्मचारियों का वेतन केंद्रीय कर्मचारियों की तुलना में 30 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक अधिक है। पंजाब सरकार महंगाई भत्ता (डीए) 42 प्रतिशत की दर से दे रही है, जबकि केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को 60 प्रतिशत डीए देती है। इसके बावजूद, राज्य के उच्च वेतनमान के कारण कई श्रेणियों में पंजाब सरकार के कर्मचारियों का कुल मासिक वेतन केंद्रीय कर्मचारियों की तुलना में अब भी अधिक है।” हालांकि, राज्य सरकार का यह भी कहना है कि पंजाब के पहले से ही अधिक वेतनमान पर केंद्र सरकार की अधिक महंगाई भत्ता (डीए) दर लागू नहीं की जा सकती, क्योंकि दोनों वेतन संरचनाओं को एक साथ नहीं जोड़ा जा सकता। बयान के अनुसार, पंजाब सरकार ने यह भी कहा है कि महंगाई भत्ते की दर तय करना राज्य सरकार का नीतिगत और संप्रभु अधिकार है।
इससे पहले पंजाब सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल मनिंदरजीत सिंह बेदी ने दलील दी कि जिस समय सिंगल बेंच ने आदेश पारित किया उस समय उसके पास केवल वैधानिक निकायों और निगमों से जुड़े मामलों की सुनवाई का अधिकार था, पूरे राज्य के सेवा संबंधी मामलों का नहीं। इसलिए वह आदेश अधिकार क्षेत्र के बिना पारित किया गया और प्रारंभ से ही शून्य माना जाना चाहिए। एडवोकेट जनरल ने यह भी कहा कि राज्य सरकार के कर्मचारियों ने स्वयं अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया, इसलिए उनके संबंध में कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता।
वहीं, कर्मचारियों की ओर से सीनियर एडवोकेट संजय कौशल ने दलील दी कि अधिकार क्षेत्र को लेकर उठाई गई आपत्ति निराधार है, क्योंकि उस समय मामलों के आवंटन में आंशिक समानता थी। उन्होंने यह भी कहा कि PSPCL स्वयं स्वीकार कर चुका है कि वह राज्य सरकार के निर्देशों का पालन करता है, इसलिए राज्य सरकार के खिलाफ निर्देश जारी करना पूरी तरह उचित था।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने PSPCL की अपील खारिज की और कर्मचारियों तथा पेंशनरों को लंबित महंगाई भत्ता और महंगाई राहत का भुगतान करने का सिंगल बेंच का आदेश बरकरार रखा। साथ ही स्पष्ट किया कि जब तक पूरा बकाया अदा नहीं किया जाता, तब तक पंजाब सरकार बड़े स्तर पर विज्ञापन अभियानों पर सार्वजनिक धन खर्च नहीं करेगी।